खबरों में बीकानेर
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असहमतियों के साथ संवाद के हामीदार थे चंद्र-आनंद : ऊमट
आनंद वि. आचार्य के यादवेंद्र शर्मा 'चंद्र' पर लिखे मोनोग्राफ का लोकार्पण
बीकानेर। वरिष्ठ शायर व रंगकर्मी आनंद वि.आचार्य के कथापुरुष यादवेंद्र शर्मा 'चंद्र' पर लिखे मोनाग्राफ 'भारतीय साहित्य रा निर्माता : यादवेंद्र शर्मा चंद्र' का लोकार्पण शनिवार को स्थानीय बाफना स्कूल सभागार में हुआ। साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली से प्रकाशित इस मोनोग्राफ में चंद्र के व्यक्तित्व-कृतित्त्व सहित कई घटनाओं और नई जानकारियों का समावेश है।
लोकार्पण समारोह के मुख्य अतिथि ख्यात उपन्यासकार अनिरुद्ध ऊमट ने कहा कि हम कहीं न कहीं अपनी संवाद की पंरपरा से छूटते जा रहे हैं। यादवेंद्र शर्मा 'चंद्र' और आनंद वि. आचार्य संवाद के हामीदार थे। संवाद द्वंद्व के बगैर नहीं हो सकता। असहमतियों के बगैर नहीं हो सकता। असहमतियों के लिए निरंतर अपडेट रहना पड़ता है। हमारे बीच हमेशा असहमतियों का संवाद रहा। उन्होंने आनंदजी और चंद्रजी के लेखन के बीच साम्यता उल्लेखित करते हुए कहा कि दोनों का ही लेखन परिवेश के प्रतिरोध में रहता था। दोनों में रचनात्मकता सदैव प्रवाहित रहती। जो प्रकाश स्तंभ होते हैं, उनकी रोशनी कभी कम नहीं होती। उन्होंने कहा कि मोनोग्राफ के माध्यम से देश का पाठक नई दृष्टि से चंद्रजी को जान सकेगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कवि व कलासमीक्षक राजेश कुमार व्यास ने कहा कि चंद्रजी व आनंदजी की सबसे बड़ी खासियत उनका फकीराना अंदाज था। जिस फक्कड़पन के साथ दोनों जीये, अपने आप में एक नजीर है। एक समय में सर्वाधिक छपने वाले चंद्रजी ने कभी संबंध बनाने के लिए नहीं लिखा। कभी असहमतियों को पाला नहीं। उन्होंने कहा कि आनंदजी सुकून के लिए रंगकर्म करते थे। आत्मीयता और अपनापे के साथ जीते और अपने हर प्रदर्शन में कलाओं के इस सत्य का ध्यान रखते थे कि दिखने के बाद दर्शक के मन में क्या घटेगा। उन्होंने इस बात का हमेशा ध्यान रखा कि घटित क्या होगा, क्योंकि किसी भी कला रूप को देखने के बाद जो मन में घटित होता है, वही महत्वपूर्ण होता है। व्यास ने भी इस बात की चिंता जताई कि संवादहीनता बढ़ती जा रही है। आनंदजी ने कभी किसी को छोटा करने का प्रयास नहीं किया।
विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ रंगकमी दयानंद शर्मा ने कहा कि आनंदजी एक समर्पित लेकिन बेबाक रंगकर्मी थे, जिन्हें कभी भी गलत बर्दाश्त नहीं हुआ। हालांकि उनके साथ नाटकों पर हमारी हमेशा ही बहस होती रही, लेकिन व्यक्तिगत संबंधों पर कभी आंच नहीं आई। 'कर्णकथा' का जिक्र करते हुए शर्मा ने कहा कि उन्हें इस शहर में भीष्म पितामह का किरदार निभाने के लिए आनंद जी के अलावा कोई भी नजर नहीं आया।
वरिष्ठ शायर जाकिर अदीब ने इस मौके पर कहा कि आनंद जी का शेर 'मुल्क के इन रहनुमाओं से करें उम्मीद क्या, जुल्म का खंजर चलाकर काट देते हैं जो सर' कालजयी शेर है। अदीब ने कहा कि आनंदजी इतने सहज इंसान थे कि वे इस बात पर कभी ध्यान ही नहीं देते थे कि कोई उन्हें कुछ मान रहा है या नहीं। आज तो जो कुछ भी नहीं है, वे भी खुद को बहुत कुछ मान बैठे हैं।
बाफना स्कूल के वाइस प्रिंसीपल ने जितेंद्र शर्मा ने कहा कि चंद्रजी व आनंदजी की स्मृति में होने वाले कार्यक्रम के लिए बाफना स्कूल सभागार का चुना जाना हमारे लिय गौरव की बात है। हम सदैव इस तरह की गतिविधियों के लिए तत्पर हैं। इस अवसर पर आनंदजी की धर्मपत्नी विजयलक्ष्मी आचार्य का स्कूल प्रबंधन द्वारा सम्मान किया गया गया। जितेंद्र शर्मा ने शॉल ओढ़ाया। श्रीमती किरणलक्ष्मी ऊमट नें माल्यार्पण किया। आनंदजी का परिचय देते हुए वरिष्ठ कवि ्र-कथाकार राजेंद्र जोशी ने उन्हें विद्या का सागर बताते हुए जानकारियां साझाा की। आभार वरिष्ठ पत्रकार अनुराग हर्ष ने स्वीकारा। संचालन हरीश बी. शर्मा ने किया।
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