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सत्य, त्याग का पर्याय है गांधी दर्शन, गांधीजी के जीवन से सीखे भावी पीढ़ी-सालेह मोहम्मद,
तीन दिवसीय कार्यक्रमों का समापन समारोह आयोजित
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सत्य, त्याग का पर्याय है गांधी दर्शन, गांधीजी के जीवन से सीखे भावी पीढ़ी-सालेह मोहम्मद
तीन दिवसीय कार्यक्रमों का समापन समारोह आयोजित
प्रभारी मंत्री ने कहा कि गुड गवर्नेंस को हासिल करने के लिए शासन में पारदर्शिता सबसे जरूरी है। राज्य सरकार न केवल गांधीजी के सिद्धान्तों व आदर्शों के प्रति श्रद्धा रखती है बल्कि गांधीजी के सिद्धान्तों को अपने कार्य में अपनाती है। शिक्षा, भोजन, सूचना, सुनवाई तथा सेवा प्रदान करने की गारंटी जैसे कानून गांधी दर्शन की अनुपालना के सबसे बड़े उदाहरण है । जिस लोकतंत्र की कल्पना गांधीजी ने की थी उसे साकार करने में लोगों की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है, सरकार का यह प्रयास है कि आमजन हो या शासन में बैठे कर्मचारी-अधिकारी सभी गांधीजी के समर्पण और त्याग से भरे जीवन दर्शन से परिचित हो। उन्होंने कहा कि गांधीजी के जन्म के 150 वें वर्ष के उपलक्ष में हुए इन आयोजनों से भावी पीढ़ी को एक नई प्रेरणा मिलेगी और वे गांधी दर्शन को करीब से जान सकेंगे।
जिला कलक्टर कुमार पाल गौतम ने गांधीजी को याद करते हुए कहा कि गांधीजी के जीवन व दर्शन का लाभ समाज को मिले इसके लिए विभिन्न आयोजन किए गए। गांधीजी के सिद्धान्तों को हम अपने जीवन में अपनाए और आदर्श रामराज्य का निर्माण करने में अपना योगदान दें। उन्होंने कहा कि परिचर्चा से युवा पीढ़ी को गांधीजी के जीवन के महत्वपूर्ण प्रसंग और प्रासंगिकता गहराई से समझने का अवसर प्राप्त हुआ है। खाजूवाला विधायक गोविन्द मेघवाल ने कहा कि गांधी सदैव प्रासंगिक रहेंगे। प्रजातंत्र को मजबूत करने के लिए गांधी दर्शन से बड़ा कोई दर्शन नहीं है। उन्होंने कहा कि समाज में समानता की स्थापना के लिए धर्म, जाति से उपर उठकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास करें, गांधी को अपनाएं। इस अवसर पर जिला स्तरीय समिति के सयोजक संजय आचार्य ने सभी का आभार जताया।
गांधी दर्शन और शासन में पारदर्शिता -पर संगोष्ठी आयोजित
इससे पहले गांधी दर्शन और शासन में पारदर्शिता विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में वक्ताओं ने गांधीजी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उनके दर्शन की प्रासंगिकता और शासन में पारदर्शिता स्थापित करने में इस दर्शन की अहमियत पर विचार रखे। संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में राजीव गांधी स्टडी सर्किल के सतीश राय ने कहा कि शासन में पारदर्शिता तभी आएगी जब महात्मा गांधी द्वारा दिए गए लोकतंत्र के बुनियादी मूल्यों को स्वीकार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गांधी सबसे बड़े व्यावहारिक रणनीतिकार थे जिनके नेतृत्व में चंपारण सत्याग्रह से लेकर भारत छोड़ो आंदोलन तक की समस्त गतिविधियां आयोजित हुई। महात्मा गांधी ने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में भारत के किसान, मजदूर, व्यापारी, युवा, महिलाओं को जोड़कर पूरे देश में राजनीतिक लोक चेतना का सफल प्रयोग किया जिसकी परिणीति देश की आजादी के रूप में अगली पीढ़ी को मिली। गांधी ने चरखे और दांडी मार्च के जरिए गांधी ने दुनिया के सबसे बड़े साम्राज्यवादी ताकत को चुनौती दी। गांधी के जीवन का हर संघर्ष और दर्शन हमें अपने जीवन में हर मोर्चे पर अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कोई समझौता ना करते हुए सत्य का पक्ष लेते हुए डटे रहने का संदेश देता है। वर्तमान में हम जिस समतावादी समाज के निर्माण का सपना देखते हैं उसके रास्ते गांधी दर्शन से होकर ही गुजरते हैं। जन आमुखता और संवाद परकता शासन की दो अपरिहार्य जिम्मेदारियां है जिनसे शासन पारदर्शी बन सकता है तथा गांधी दर्शन से हम इन जिम्मेदारियों को अपनाने का ढंग सीख सकते हैं।
इस अवसर पर वक्ता के रूप में मधु आचार्य आशावादी ने कहा कि जब किसी व्यक्ति का जीवन दर्शन बन जाता है तो वह इतिहास से अधिक व्यापक हो जाता है। गांधीजी ने जो जीवन जिया और आज उनके जो सिद्धान्त हमारे सामने है उसके अनुसार गांधी अब वोट मांगने का साधन नहीं है। यह बात शासन करने वाले तथा राजनेताओं को समझ लेनी चाहिए। आचार्य ने कहा कि शासन में ऐसी व्यवस्था हो कि निर्णय लेने की शक्ति ग्राम सभा को हो। ऐसा हो जाने से सता का चरित्र हमेशा जनहित के निर्णय लेना का होगा। आशावादी ने कहा कि गांधी दर्शन यह है कि योजना गांव से चलकर ऊपर की ओर जाए, विशेषकर शिक्षा और चिकित्सा के निर्णय ग्राम सभा से होकर ऊपर जाने चाहिए। चाहे किसी भी दल से जुड़े गांधी दर्शन हर परिस्थिति में प्रासंगिक रहेगा।
संगोष्ठी में विजय एरी ने कहा कि गांधीजी ने अपने जीवन में पारदर्शिता रखी, वर्तमान में गांधी दर्शन को मानते हुए लोकतंत्र में भी पारदर्शिता उन मानदण्डों पर ही रहनी चाहिए। गांधीजी ने अपनी जीवनी में अपने जीवन के हर सत्य को आमजन के सामने रखा। एरी ने कहा कि शासन निरकुंश नहीं हो इसके लिए शासन में गरीब की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए। गांधी हमारे देश की आत्मा है।
संगोष्ठी में डाॅ श्रीलाल मोहता ने कहा कि हिन्द स्वराज के माध्यम से गांधी ने भारत की संस्कृति की प्रतिष्ठा की और भौतिकवाद की आलोचना की। वे बुनियादी शिक्षा के माध्यम से मातृभाषा में शिक्षा देने के पैरोकार थे। वे साधन व साध्य दोनों की पवित्रता में विश्वास करते थे, इस सिद्धान्त को आज शासन में अपनाने की सर्वाधिक आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि गांधीजी के ट्रस्टीशिप का सिद्धान्त वर्तमान में सर्वाधिक प्रासंगिक है। शासन में सत्य, अंिहसा, अपरिग्रह जैसे सिंद्धातों की आवश्यकता है। गांधी के जीवन को दर्शन और उनके द्वारा जीवन में सत्य के साथ किए प्रयोग के माध्यम से समझा जा सकता है। गांधी को समझने के लिए नेहरू को पढ़ना होगा। मोहता ने कहा कि शासन को जिन भी तरीकों से जनता के नजदीक लाया जा सकता है उनके लिए गांधी दर्शन को पढ़ने व अपनाने की आवश्यकता है।
ये रहे जिलास्तरीय विजेता
इस अवसर पर अतिथियों ने निबंध, चित्रकला तथा भाषण प्रतियोगिताओं के जिला स्तरीय विजेताओं को पुरस्कृत किया। महाविद्यालय स्तर की निबंध प्रतियोगिता में बिन्नाणी कन्या महाविद्यालय की शिल्पा सुथार प्रथम, एमएलबी काॅलेज नोखा की संगीता कंवर द्वितीय तथा बेसिक पीजी महाविद्यालय के मयंक शर्मा तृतीय स्थान पर रहने के लिए पुरस्कृत किया गया। इसी प्रकार भाषण प्रतियोगिता में बीजेएस रामपुरिया विधि महाविद्यालय की वंदना सारस्वत को प्रथम, राजकीय महाविद्यालय लूणकरनसर की पूजा गोस्वामी को द्वितीय तथा डूंगर काॅलेज के देवेन्द्र सिंह शेखावत को तीसरे स्थान के लिए सम्मानित किया गया। इसी प्रकार चित्रकला प्रतियोगिता में बीजेएस रामपुरिया जैन काॅलेज की खुशबू रघुवंशी ने प्रथम, बिन्नाणी कन्या महाविद्याालय की दिव्या सोनी द्वितीय और बोथरा काॅलेज की सुरभि आंचलिया तीसरे स्थान पर रही।
स्कूल स्तर पर भाषण प्रतियोगिता में शहीद ओम प्रकाश बिश्नोइ राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय खाजूवाला के अंशु को प्रथम, राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय कोलायत के कमल जाजड़ा को द्वितीय तथा राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय जयसिंह देसर मगरा के पवन चाहर को तीसरे स्थान के लिए पुरस्कृत किया गया। चित्रकला प्रतियोगिता में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय उदयरामसर की कोमल साद प्रथम, राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय दयानंद मार्ग की नंदिनी सोनी द्वितीय, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बामनवाली की माया सुथार तृृतीय रही। इसी प्रकार निबंध प्रतियोगिता में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बरसिंहसर के श्रीराम सियाग प्रथम, सेठ भैरूंदान चैपड़ा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के ऋषि कोली द्वितीय तथा राजकीय बालिका माध्यमिक विद्यालय गजनेर की गंगा कुमावत को तृतीय स्थान पर रहने के लिए सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में अतिरिक्त जिला कलक्टर (प्रशासन), उपायुक्त नगर निगम अभिषेक सुराणा, महेन्द्र गहलोत, मदन मेघवाल, डाॅ. बिठ्ठल बिस्सा, यशपाल गहलोत, राजकुमार किराडू सहित बड़ी संख्या में राजकीय कर्मचारी, पंचायती राज के जनप्रतिनिधि तथा आमजन व विद्यार्थी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन ज्योति प्रकाश रंगा ने किया।
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