https://mail.google.com/mail/u/0/h/1xhqvuf5l8b6d/?view=att&th=133ad62010182460&attid=0.1&disp=inline&realattid=f_gv2l5vcc... Mohan Thanvi - August 29, 2012
नाटक - कितना-सा द्वंद्व :: Pressnote.in नाटक - कितना-सा द्वंद्व :: Pressnote.in Mohan Thanvi - August 28, 2012
वाणी प्रकाशन: 'मैं एक हरफ़नमौला' वाणी प्रकाशन: 'मैं एक हरफ़नमौला' : 'मैं एक हरफ़नमौला - ए .के. हंगल 'सब कुछ वैसे ही हुआ जैसी कि उम्मीद थी । मैंने अधिकार... Mohan Thanvi - August 27, 2012
साझा मंच: वीर शिरोमणी महाराजा दाहिर साझा मंच: वीर शिरोमणी महाराजा दाहिर : महाराजा दाहिर की जयंती पर 25 अगस्त को विशेष पुण्य सलिला सिंध भूमि वैदिक काल से ही वीरों की भूमि रही... Mohan Thanvi - August 26, 2012
गर्जना होती मचता द्वन्द्व चारों ओर रेत ही रेत कभी छाते बादल बरसते और... थमती रेत बिजली चमकती मसले बनते गर्जना होती द्वन्द्व मचता बिखरे स्वप्न इकट्ठा ... Mohan Thanvi - August 21, 2012
‘‘गुलामी की जंज़ीर’’ से निकले…. ‘‘गुलामी की जंज़ीर’’ से निकले…. ‘‘गुलामी की जंज़ीर’’ से निकले.... ( अजमेर से सिंधी में प्रकाशित हिंदू दैनिक के 15 अगस्त 2011 के संस्कर... Mohan Thanvi - August 20, 2012
ईद है मेरी रहमत है तेरी खुश है जमाना आज ईद है मेरी ईद है मेरी रहमत है तेरी खुश है जमाना आज ईद है मेरी दिल है दीवाना आज ईद है मेरी रामनगर में जलसा आज ईद है मेरी रघुनाथ के घर दावत आ... Mohan Thanvi - August 20, 2012
बादळ सागै उड़'र बिजली सागै नाचणो / बादल संग उड़कर दामिनी संग नृत्य करना होंठ माथै पड़ी बिरखा री बूंद भीतर उतार लेवां / बादळ सागै उड़'र बिजली सागै नाचणो / पंछियाँ स्यूं पंख उधारी ले'र हवावाँ रौ कर्जो चुका... Mohan Thanvi - August 16, 2012
खामोशी गाती : कविता खामोशी गाती हर रोज रूप बदल कर आता कोलाहल कहता कुछ नहीँ खुद किसी से पर हर किसी से बस अपने बारे मेँ कहलाता ... ध्वनि से श्रव्य और दृश्य से अनुभूत काव्य श्रृँगार का प्रादुर्भाव निश्चय ही किसी काल मेँ 21 मार्च को ही हुआ होगा यह दिवस प्रकृति का प्रिय जो है हरी चुनरी से सजी इठलाती धरा पर नवपल्लव, अधखिली कलियाँ, कुलाँचे भरते मृग-शावक, मँडराते भँवरे, पहाड़ोँ पर बर्फ का पिघलना और धूप की बजाय छाँव मेँ सुस्ताते वन्यजीवोँ के गुँजन से जो अनुभूति हुई उसे आदि कवि खामोशी का गीत = "कविता" की सँज्ञा न देता तो "अहसास" प्राण विहीन हो पाषाण युग से आगे का यात्री नहीँ बन पाता सँवेदनाएँ पाषाण रह जाती प्रकृति कविता न गाती तो मानवता कैसे मुस्काती ! Mohan Thanvi - August 13, 2012
कुछ बहुत कुछ ... बहुत कुछ न कुछ ! कुछ बहुत कुछ कहते हैं... बहुत कुछ कुछ नहीं कहते...!!!...कुछ लोग कुछ विशेष कार्य न करके भी कुछ न कुछ खासियत जोड़ कर कुछ न कुछ अपने ही बारे म... Mohan Thanvi - August 12, 2012
बेड़ियां टूटी या प्रतीक बनाए कृष्ण तेरी लीला में रहस्य समाए बेड़ियां टूटी या प्रतीक बनाए कृष्ण तेरी लीला में रहस्य समाए इतिहास है या दंतकथा हे कृष्ण तू ही बता बेड़ियां टूटी या प्रतीक बनाए कृष्ण तेरी ली... Mohan Thanvi - August 10, 2012
फिर से बचपन पा जाना... होंठों पर टपकी बरसात की बूंदों को अपने में समेट लेना / बादल संग उड़कर दामिनी संग नृत्य करना / पंछियों के पंख उधर मांग कर हवाओं का ऋण चुकाना... Mohan Thanvi - August 08, 2012
क्रिकेट डे --- मैच रोमांचक क्षणों में था... ये भी खूब रही --- क्रिकेट डे --- मैच रोमांचक क्षणों में पहुँच चुका था ! जीत के लिए २ रन की दरकार और आखिरी बॉल ... ! बॉलर दौड़ रहा था...... Mohan Thanvi - August 08, 2012
राग दरबारी गूंजता रहा है... गूंजता रहेगा राग दरबारी गूंजता रहा है... गूंजता रहेगा इस गूंज में सुनाई देते स्वरों को श्रोताओं पाठकों तक पहुंचाने का जिम्मा संजय का है। ( काला ... Mohan Thanvi - August 07, 2012
करतार सिंह / सिन्ध ही नहीं पूरे हिन्दुस्तान के बाल-गोपालों के बचपन के दिन अभी खत्म भी नहीं हुए थे कि उन पर जिन्दगी की जिम्मेवारियों का पहाड़ लाद दिया गया करतार सिंह / सिंधी से अनूदित उपन्यास का अंश करतार सिंह : हां यह सच है यार। मेरे जन्म से भी 10-12 साल पहले जन्मा षहीद हेमू कालाणी सन् 1942 ... Mohan Thanvi - August 04, 2012
नींद में जागा-जागा- सा... चांद मुस्कराता रहा... आधी रात को जैसे ही रंगों से घिरे मुस्कराते चांद को देखा, कलर रिंग से घिरे चांद को... देखने के मुबारक मौके पर इ... Mohan Thanvi - August 03, 2012
रवींद्र रंगमंच के लिए एक आंदोलन ऐसा भी... र वीं द्र रं ग मं च के लिए एक आंदोलन ऐसा भी... रंगकर्मियांे की भावनाएं और करोड़ों का मंच उपेक्षित कला-साधकों की पीड़ा भरोसे में हरेभ... Mohan Thanvi - August 01, 2012