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बीकानेर 24 फरवरी, महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के विभागाध्यक्ष एवं संकायाध्यक्ष (कला संकाय) प्रो0 सुरेश कुमार अग्रवाल मेलबोर्न के मोनास विश्वविद्यालय में मानव संसाधन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोज्य लीप (लीडर सिप फार अकेडेमिसियन्स प्रोग्राम) के एक सप्ताह के प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफलतापूर्वक सम्पन्न कर सोमवार को स्वदेश लौटे। प्रो0 अग्रवाल का बीकानेर स्टेशन पहँुचने पर उनके शोधार्थियों द्वारा भव्य स्वागत किया गया। इसके पश्चात् विश्वविद्यालय पहँुचने पर संकाय सदस्यों द्वारा प्रो0 अग्रवाल को पुष्पगुच्छ भेंट किया गया और महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय का नाम शिखर तक पहुँचाने के लिये के लिये बधाई दी।
प्रो0 अग्रवाल ने बताया कि उनके प्रस्तुतिकरण को भारतीय प्रतिभागियों एवं मोनास विश्वविद्यालय के संकाय सदस्यों के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए चुना गया। प्रो0 अग्रवाल ने कहा कि राजस्थान के विश्वविद्यालय जिस अनुपात में इनको फण्ड उपलब्ध करवाये जाते है, उस तुलना में कई गुणा बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे है। उन्होंने बताया कि पश्चिम के उच्च लागत के बिजनेस माॅडल को भारतीय विश्वविद्यालयों पर लागू करना संभव नहीं है। किन्तु यह भी सत्य है कि भारत में भी विश्वविद्यालयों को आत्मनिर्भरता लानी होगी। इस आत्मनिर्भरता के लिये राजस्थान के विश्वविद्यालयों को विश्व के प्रथम 100 विश्वविद्यालयों में सम्मिलित करने के लिए विभागीय स्वायत्तता के प्रावधानों को सुनिश्चित करते हुए कम लागत के बिजनेस माॅडल पर ध्यान केन्द्रित करना होगा। सभी तरह की “सबसिडी” को योजना बनाकर उनका विकल्प ढूढ़ना होगा। प्रत्येक विश्वविद्यालय शैक्षणिक /अशैक्षणिक कर्मी को विभिन्न प्रकार के प्रोजेक्ट के साथ जोडकर “आउटपुट” आधारित व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।
प्रो0 अग्रवाल ने बताया कि मानव संसाधन मंत्रालय के इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश द्वितीय पंक्ति के प्रशासनिक एवं शोध कौशल रखने वाले आचार्यो का चयन कर उन्हें भविष्य में उच्च शिक्षण संस्थानों के प्रधान के रूप में तैयार करने हेतु प्रशिक्षण देना है।
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“लीप” का उद्देश भविष्य के उच्च शिक्षण संस्थानों के लीडर को तैयार करना
प्रो0 अग्रवाल ने बताया कि उनके प्रस्तुतिकरण को भारतीय प्रतिभागियों एवं मोनास विश्वविद्यालय के संकाय सदस्यों के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए चुना गया। प्रो0 अग्रवाल ने कहा कि राजस्थान के विश्वविद्यालय जिस अनुपात में इनको फण्ड उपलब्ध करवाये जाते है, उस तुलना में कई गुणा बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे है। उन्होंने बताया कि पश्चिम के उच्च लागत के बिजनेस माॅडल को भारतीय विश्वविद्यालयों पर लागू करना संभव नहीं है। किन्तु यह भी सत्य है कि भारत में भी विश्वविद्यालयों को आत्मनिर्भरता लानी होगी। इस आत्मनिर्भरता के लिये राजस्थान के विश्वविद्यालयों को विश्व के प्रथम 100 विश्वविद्यालयों में सम्मिलित करने के लिए विभागीय स्वायत्तता के प्रावधानों को सुनिश्चित करते हुए कम लागत के बिजनेस माॅडल पर ध्यान केन्द्रित करना होगा। सभी तरह की “सबसिडी” को योजना बनाकर उनका विकल्प ढूढ़ना होगा। प्रत्येक विश्वविद्यालय शैक्षणिक /अशैक्षणिक कर्मी को विभिन्न प्रकार के प्रोजेक्ट के साथ जोडकर “आउटपुट” आधारित व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।
प्रो0 अग्रवाल ने बताया कि मानव संसाधन मंत्रालय के इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश द्वितीय पंक्ति के प्रशासनिक एवं शोध कौशल रखने वाले आचार्यो का चयन कर उन्हें भविष्य में उच्च शिक्षण संस्थानों के प्रधान के रूप में तैयार करने हेतु प्रशिक्षण देना है।
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