*खबरों में बीकानेर*
चुनाव : पर्दे के पीछे - गांवों में मेला, शहर में झमेला..., पति-पत्नी में ठनी और... एक परिवार में घूमता टिकट !!
-मोहन थानवी
चुनाव के इस मौसम में राजस्थान के गांवों में मेला लगा है। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ही दलों के कार्यकर्ताओं की उमंग मेले को जीवंत दिखा जाती है। तो कहीं-कहीं से तीसरे मोर्चे के रूप में जुदा-जुदा पार्टियों के प्रत्याशियों का समर्थन भी करते हुए ग्रामीण बाकायदा मेला लगा हुआ दर्शा रहे हैं।
चुनावी लोक पर्व के ऐसे भरेपूरे मेलों के रंग सोशल मीडिया पर राजनीतिक दलों के समर्थकों की ओर से वायरल किए जा रहे वीडियो के रूप में भी देखे जा रहे हैं।
इस तरह चुनावी लोकपर्व के इंद्रधनुषी रंगों के बादलों के बीच कतिपय शहरों की ओर से कड़कती बिजली के-से झमेले के स्वर भी सुनाई पड़ जाते हैं।
जैसे कि सीकर जिले की दांतारामगढ़ सीट पर मौजूदा विधायक वीरेन्द्र सिंह और उनकी पत्नी रीटा सिंह आमने-सामने हो गए हैं। विधायक वीरेन्द्र सिंह ने जहां कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी के तौर पर नामांकन दाखिल किया है। वहीं, उनकी पत्नी जेजेपी से नामाकंन भरा है। और, बीकानेर की तो बात ही निराली है यहां श्री कॉल आए तो सीट पर भारतीय जनता पार्टी की ओर से पूर्व मंत्री देवी सिंह भाटी के पुत्रवधू को प्रत्याशी बनाया गया था और डमी के तौर पर स्वयं देवी सिंह भाटी ने भी पर्चा भर रखा है लेकिन भाजपा ने रविवार दोपहर में कुछ नाम की एक और सूची जाहिर की जिसमें कोलायत से प्रत्याशी बदलते हुए भाटी परिवार के ही अंशुमान सिंह भाटी को प्रत्याशी बना दिया गया।
उधर, दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों के असंतुष्ट टिकट दावेदारों की ओर से ऐसे झमेले के स्वर शनैःशनै धीमे भी पड़ते जा रहे हैं। लेकिन अंदर की बात अंदर के लोग यह बता रहे हैं की टिकट न मिलने की नाराजगी से ऐसे दावेदार पर्चा दाखिल करने के अंतिम दिन अपने आप को एक से दूसरी पार्टी की ओर ले जाते दिखाई दे सकते हैं। कुछ एक अपने दम पर निर्दलीय के रूप में पर्चा भरकर अपना मेला लगाते हुए भी मिल सकते हैं। और कतिपय ऐसे भी सामने आ जाएंगे जो दबी-घुटी आवाज में अपने समर्थकों को नसीहत देते मिलेंगे की इसको नहीं उसको जिताना है।
अभी नामांकन पत्र भरने का सोमवार को आखिरी दिन है। जबकि अब तक लगभग सीटों पर भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस पार्टी और अन्य पार्टियों ने अपने-अपने प्रत्याशियों के नाम तकरीबन फाइनल कर दिए। उन फाइनल नाम में से भी अधिकांश ने पर्चे दाखिल कर दिए हैं। फिर भी कुछ एक सीटें ऐसी जरूर शेष हैं जहां राजनीतिक दलों की कशमकश प्रत्याशी तय करने में लगी है। गांव में मेले की बात करें तो दोनों ही पार्टियों के प्रत्याशियों के लिए विभिन्न गांव में जुदा-जुदा जगह पर समर्थकों का उत्साह मेले का एहसास करवा जाता है। आचार संहिता के चलते चुनावी लोक पर्व के यह रंग मतदान के 48 घंटे पहले तक देखे जा सकेंगे।
कार्टून कोना : जसवंत सिंह राजपुरोहित






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