खबरों में बीकानेर
*औरों से हटकर सबसे मिलकर*
*बीकानेर डेली न्यूज*
*बीकानेर डेली न्यूज*
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पीढ़ी दर पीढ़ी एक बात कॉमन आउट ऑफ द वे जाकर सोचो
बड़ी अजीब सी दुनिया है सीधे साधे रहो तो भी दिक्कत और अगर एक कदम आगे चल कर चलो तो भी दिक्कत
मगर हर पीढ़ी की एक सोच कॉमन देखी है
मैने देखी है तो सबने देखी ही होगी
पीढ़ी दर पीढ़ी सबने अपनी आने वाले पीढ़ी को एक कदम आगे चलने का दुनिया से कुछ अलग सोचने का जज्बा दिया है गरीब से गरीब परिवार ने भी अपने बच्चों को कुछ कर गुजरने का हौंसला दिया है
पर पीढ़ी दर पीढ़ी ये रीत निभ कितनी रही है??
आज भी जाने कितने समाज के लोग ऐसे है जो बाहर से कुछ और अंदर से कुछ और है...
वो देखने में तो बहुत मॉडर्न लगते है मगर उनकी सोच किसी गरीब की रोटी से भी छोटी होती है..
सपना की सगाई की बातें चल रही थी लड़का पड़ा लिखा अच्छे परिवार से था जिसके परिवार में सब पढ़े लिखे थे
पर सपना ऐसे परिवार से थी जहां सब कम पढ़े लिखे थेयागर सपना ने कुछ हट कर किया
उसने बहुत पढ़ाई की और एक प्राइवेट कंपनी में अच्छे पद पर नौकरी कर रही थी
सगाई के कुछ समय पूर्व जब लड़के और लड़की का कुंडली मिलान हुआ तब दहेज की बात और कुछ और शर्तो पर बातचीत तय हुई
बातचीत के दौरान लड़के ने लड़की से कुछ सवाल किए तभी लड़की ने भी लड़के से सवाल किया कि क्या वो शादी के बाद भी अपनी नौकरी बरकरार रख सकती है
घर में सभी ने हामी भर दी और साथ ही साथ अपने आप को बहुत ज्यादा मॉर्डन बताते हुए कहने लगे हमारे घर में किसी बात की पाबंदी नही है लड़की नौकरी करे वेस्टर्न कपड़े पहने कहीं आए जाए कोई रोक टोक नही होगी ये सब बात होने के बाद फैसला लिया गया कि अगले दिन एक छोटी सी रस्म करके इस सगाई का कच्चा दस्तूर कर लिया जाए बाकी सभी फंक्शन बाद में किया जायेंगे ।
तय समय पर दोनो परिवार आपस में मिले और लेन देन और शादी के खर्च पर सारी जरूरी बाते खत्म हुई और एक दूजे का मुंह मीठा करे कर शगुन कर दिया गया और आपसी सहमति से तय किया गया की दो दिन बाद दोनो की सगाई की जायेगी
अचानक अगले ही दिन लड़के के परिवार से एक फोन आता है और वो कहते है कि हमे ये सगाई नहीं करनी
वजह पूछने पर बताया जाता है कि उन्हें एक ऐसी बहु चाहिए जो घर पर उनकी रसोई संभाले और परिवार जन का ख्याल रखे
लड़की ने कहा कि नौकरी के साथ साथ ये सब भी होगा ही सही उसमें नौकरी छोड़ने की बात करने की कोई वजह नहीं है
मगर लड़के वाले टस से मस न हुए और लड़की की कच्ची सगाई टूट गई
समाज मे आज भी ऐसे कई रूढ़िवादी लोग है जो बाते तो बड़ी बड़ी करते हैं मगर जब उनको मुकाम देने का वक्त आता है तो पीछे हो जाते है आज आउट ऑफ द वे जाकर सोचने वालो को दुनिया में बहुत सी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है उनके अपने ही सब से पहले उनके लिए अपनी एक राय बना लेते है
जब तक इंसान अपने तरीको से कुछ दुनिया को कर के नही दिखा देता तब तक उसके बारे में जाने कितने टेढ़े मेढे लफ्जों से उसका बहिष्कार किया जाता है
कुछ इन सबसे हट कर सबकी बातो को इग्नोर करके मंजिल तक पंहुच जाते है मगर आज भी लाखों लोग आउट ऑफ द वे जाकर सोचने का तजुर्बा तो रखते है मगर दुनियां के शब्दों के तीर बाण से वो अपनी माजिल को अधूरा ही छोड़ देते है
भाव :- यदि आपके सामने कोई ऐसा इंसान है जो आउट ऑफ द वे जाकर कुछ करने का हुनर रखता है तो उसे सपोर्ट करिए।
©®अर्चना चावला
उदयपुर राजस्थान
C P MEDIA





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