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मशरूम ने बढ़ाई इन किसानों की आमदनी
March 05, 2021
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📝 ✍️ मशरूम ने बढ़ाई इन किसानों की आमदनी
‘उद्यमिता विकास के लिए मशरूम उत्पादन तकनीक’ विषयक प्रशिक्षण प्रारम्भ बीकानेर, 4 मार्च। स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के पादप रोग विज्ञान विभाग द्वारा ‘उद्यमिता विकास के लिए मशरूम उत्पादन तकनीक’ विषयक तीन दिवसीय प्रशिक्षण गुरुवार को प्रारम्भ हुआ। राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना के तहत आयोजित प्रशिक्षण के उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. आर. पी. सिंह थे। उन्होंने कहा कि भारत की जलवायु मशरूम उत्पादन के लिए अनुकूल है। इसमें अनेक औषधीय गुण हैं, जिनका उपयोग दवाइयां बनाने में भी किया जाता है। छोटे किसानों और के लिए यह उपयुक्त उद्यम है। अनेक नवाचारी किसानों ने इस तकनीक को अपनाया है। इससे उनकी आय में अच्छा इजाफा हुआ है। युवा कृषक और कृषि विद्यार्थी, इस तकनीक को अपनाएं और मशरूम उत्पादन के माध्यम से एंतरप्रेन्योर के रूप में आगे आएं। कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डाॅ. आई. पी. सिंह ने कहा कि घर अथवा झोपड़े में भी मशरूम उत्पादन किया जा सकता है। विश्वविद्यालय द्वारा मशरूम उत्पादन इकाई स्थापित की गई है। जहां मशरूम के स्पान (बीज) तैयार किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना के समन्वयक डाॅ. एन. के. शर्मा ने कहा कि कि परियोजना के तहत स्किल डवलपमेंट से संबंधित प्रशिक्षण प्रदान किए जाते हैं। मशरूम उत्पादन, ऐसा उद्यम है जिसे छोटी लागत के साथ शुरू किया जा सकता है तथा इससे अच्छा मुनाफा होता है। प्रशिक्षण समन्वयक तथा पादप रोग विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. दाता राम ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान मशरूम उत्पादन, इसके औषधीय महत्त्व, उत्पादन के दौरान रखी जाने वाली सावधानियां, मशरूम के लिए कम्पोस्ट तैयार करना, मशरूम बीज उत्पादन तकनीक, रख रखाव, मशरूम की तुड़ाई, पैकेजिंग एवं विपणन से संबंधित जानकारी दी जाएगी। मशरूम किंग के नाम से प्रसिद्ध मशरूम उत्पादक प्रगतिशील किसान मोटाराम शर्मा ने कहा कि जिस छत के नीचे मशरूम उगाया जाता है, उसी छत से आने वाला पानी इसके लिए पर्याप्त है। यह कैंसर, डायबिटीज, हृदय संबंधित रोग तथा हेपेटाइटिस जैसे रोगों के निदान में उपयोगी है। उन्होंने कहा कि चीन में विश्व का 70 प्रतिशत मशरूम उत्पादन होता है। भारत में भी इसकी मांग बढ़ रही है। डाॅ. अर्जुन लाल यादव ने आभार जताया। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. अशोक मीणा ने किया। ✍🏻
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