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नवीन शिक्षा नीति में शोध गहनता वाले विश्वविद्यालयों तथा शिक्षण गहनता वाले विश्वविद्यालयों को प्राथमिकता पर रखा गया है - प्रो शुक्ल
नवीन शिक्षा नीति पर वेबिनार आयोजित
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🙏 मोहन थानवी 🙏
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नवीन शिक्षा नीति में शोध गहनता वाले विश्वविद्यालयों तथा शिक्षण गहनता वाले विश्वविद्यालयों को प्राथमिकता पर रखा गया है - प्रो शुक्ल
नवीन शिक्षा नीति पर वेबिनार आयोजित
महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर के आन्तरिक गुणवत्ता सुनश्चयन प्रकोष्ठ (आई.क्यू.ए.सी.) द्वारा आज दिनांक 04 अगस्त, 2020 को ‘नवीन राष्ट्रीय शिक्षा नीतिः एक परिचर्चा ’’ विषय पर ऑनलाईन वेबिनार आयोजित की गई। कार्यक्रम के आरम्भ में आई.क्यू.ए.सी. निदेशक प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता महात्मा गाँधी अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा महाराष्ट्र के कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल ने अपने उद्बोधन में उच्च शिक्षा.....
पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान शिक्षा नीति स्वतंत्र भारत की पहली शिक्षा नीति है जो भविष्योन्मुखी है। यह शिक्षा नीति शिक्षा को सेवा के बजाय प्रक्रिया के रूप में देखती है जो मानव का सम्पूर्ण निर्माण करेगी। इस शिक्षा में तर्कशीलता, रचनात्मक कल्पनाशीलता, नैतिक मूल्यों का निर्माण मूल भाव में केन्द्रित है। यह मानव की क्षमताओं एवं.....
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कल्पना शक्ति को विकसित करेगी। प्रो. शुक्ल ने कहा कि नवीन शिक्षा नीति में शोध गहनता वाले विश्वविद्यालयों तथा शिक्षण गहनता वाले विश्वविद्यालयों को प्राथमिकता पर रखा गया है। साथ ही इसमें एक नियमक प्राधिकरण का प्रावधान किया गया है जिससे शिक्षा परस्पर जोडने का कार्य करेगी। प्रो. शुक्ल ने नवीन शिक्षा नीति की विशेषताओं को रेखाकिंत करते हुए यह नीति पहली बार उच्च शिक्षा की समस्याओं को केन्द्र में रखकर चर्चा करती है। साथ ही शिक्षा के बाजारीकरण की प्रक्रिया को सीमित करने का प्रयास करती है।
कार्यक्रम के विशिष्ट वक्ता एवं निदेशक, आई.क्यू.ए.सी. प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने विद्यालय शिक्षा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बच्चा जिस प्रकार के गुण व अवगुण को बच्चपन में प्राप्त करता है उसी के आधार पर उसके भविष्य की निर्मिति होती है। यह नीति शिक्षा को संस्कृति से जोडने की संकल्पना से प्रेरित है तथा विद्यालय स्तर पर 5+3+3+4 पद्वति द्वारा स्कूली शिक्षा का प्रावधान पारम्परिक व वैज्ञानिक दृष्टिकोण को ध्यान में रखकर किया गया है। प्रो. अग्रवाल ने स्कूली शिक्षा के व्यवहारिक पक्ष को मजबूत करने के लिए नेशनल मिशन ऑफ न्यूमेरेसी एण्ड लिटरेसी की स्थापना को सराहनीय कदम बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर के कुलपति प्रो. विनोद कुमार सिंह अपने उद्बोधन में प्राचीन शिक्षा पद्वति में शिक्षक की महत्ता को उद्घाटित करते हुए कहा कि एक शिक्षक अनेक विधाओं में निपुण होता था तथा शिक्षार्थी के लिए एक रोल मॉडल का कार्य करता था। कुलपति प्रो. सिंह ने नवीन शिक्षा नीति में पारदर्शी मानकों द्वारा चयन प्रक्रिया तथा शिक्षकों की गरिमा की पुनःस्थापना को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि नियामक प्रणाली में चार संस्थाओं के निर्माण से सुसुत्रीकरण करना स्वागत योग्य कदम है। केवल कृषि विश्वविद्यालय, तकनीकी विश्वविद्यालय अनेक क्षेत्रों में स्टेण्ड अलोन संस्थानों को बहु-विषयक शिक्षा प्रदान करने वाले बहु-विषयक संस्थान बनाना होगा।
कार्यक्रम के अन्त में कुलसचिव श्री भंवर सिंह चारण ने धन्यवाद ज्ञापित किया। वेबिनार का संचालन आई.क्यू.ए.सी. की सदस्या डॉ. अम्बिका ढाका ने किया।
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