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जैनाचार्य जयानंद सूरिश्वरजी के जन्म दिन पर
दान पुण्य, जप तप और बधाई व भक्ति गीतों की प्रस्तुतियां
बीकानेर, 18 मार्च। जैन श्वेताम्बर तपागच्छ के गच्छाधिपति आचार्यश्री नित्यानंद सूरिश्वजी के अनुयायी व सांसारिक भाई आचार्य विजय जयानंद सूरिश्वरजी का 66 वां जन्म दिन बुधवार को रांगड़ी चैक की तपागच्छीय पौषधशाला में जप,तप, धर्म,ध्यान और दान-पुण्य और भक्ति एवं जन्मदिन बधाई गीतों के साथ मनाया गया।
शांति निवास वृृद्ध आश्रम के विकलांग को ट्राई साईकिल प्रदान की गई, टी.बी.सहित विभिन्न अस्पतालों, सेवा आश्रम में फल वितरित किए गए तथा लावारिस, घर परिवार से बेघर लोगों को भोजन करवाया गया। गौशालाओं में गायों को गुड़ व चारा खिलाया गया। समारोह में राजस्थान के विभिन्न जिलों के साथ लुधियाना आदि पंजाब के विभिन्न स्थानों से आए श्रावक-श्राविकाओं और विजयनगर के जैन धर्म के सिद्धान्तों को मानने वाले मुस्लिम इकबाल, ईसाई नन सिस्टर शांति ने आचार्यश्री के जन्म दिन पर शुभकामनाएं दी तथा मंगलमय-धर्ममय जीवन की कामना की ।
आचार्यश्री विजय जयानंद सूरिश्वरजी म.सा. ने अपने जन्म दिन पर भजन ’’जीवन खत्म हुआ तो, जीने का ढंग आया, जब शमां बुझ गई तो, महफिल में रंग आया’’ व ’’उम्र थोड़ी सी हम को मिली थी मगर वो भी घटने लगी देखते-देखते’’ और ’’वो बीते हुए दिन बहुत याद आए, जीवन की लाखों अनमोल घड़ियां जिन्हें यादकर आंसु बहाए’’ सुनाते हुए कहा कि मानव जीवन का समय बहुत कीमती है, इसको व्यर्थ नहीं गवाएं। अधिकाधिक समय धर्म-ध्यान, साधना, आराधना और भक्ति करें तथा जीवन को परोपकारी कार्यों में लगावें।
गणिवर्य जयकीर्ति विजय ने कहा कि आचार्यश्री ने अपने पिता-माता व तीन भाइयों के साथ दीक्षा लेकर एक आदर्श प्रस्तुत किया । इन्होंने अनेक जैनी-अजैनी लोगों को व्यसन मुक्त बनाया। बीकानेर में जर्दा, गुटका व ताश का प्रचलन अधिक है, आचार्यश्री के जन्म दिन पर दुव्यसनों व व्यर्थ समय व्यतीत करने की प्रवृृति का त्याग कर अच्छे व सच्चे जैन श्रावक-श्राविका बनें। उन्होंने एक शेर ’’ हसरतों से हम आपकी राह सजादें, सपनों की दौलत हम आप पर लुटा दें, न कोई फूल है हमारे दामन में, आपके जन्म पर व्यसनों से मुक्त होने के संकल्प से जीवन को संवारदें सुनाते हुए कहा कि अपने मन,इंद्रियों पर नियंत्रण रखते हुए जितेन्द्रीय बनें और जीवन में सच्चा जय आनंद प्राप्त करें। आचार्यश्री व गणिवर्य के जन्म दिन पर शांति निवास वृृद्ध आश्रम की सिस्टर के आग्रह पर श्रावक-श्राविकाओं ने वृृद्धजनों की मसाज के लिए दो लाख रुपए की मशीन देने का संकल्प दोहराया । कार्यक्रम में वरिष्ठ गायक मगन कोचर व उनके शिष्यों, नवरतन, रौनक कोचर, कंचन देवी कोचर, दिलीप कोचर व राजेन्द्र कोचर सहित अनेक श्रावक-श्राविकाओं ने भजनों, भावों और बधाई गीतों की प्रस्तुतियां दी। ज्ञान पाठ शाला के बच्चों ने लघु नाटिका के माध्यम से तथा जितेन्द्र कोचर ने भावों के माध्यम से आचार्यश्री जयानंद सूरिश्वरजी के जन्म आदर्शों का स्मरण दिलवाया । आचार्यश्री के जन्म दिन पर आए बड़ी संख्या में श्रावक श्राविकाओं को 66 रुपए की प्रभावना, फल, मोदक वितरण का लाभ शांति लाल सेठिया, लीलम सिपानी, माणक चंद निहाल चंद कोचर, सुश्रावक गुलाबचंद-चन्द्र कुमार कोचर और सुश्रावक भंवर लाल, सुन्दरलाल, शांति लाल व देवेन्द्र कुमार कोचर परिवार आदि श्रावकों ने लिया। वरिष्ठ श्रावक शांति लाल कोचर ने बताया आचार्यश्री गुरुवार को सुबह साढ़े छह बजे रांगड़ी चैक पौषधशाला से विहार कर गंगाशहर गोल मंदिर, तुलसी विहार से आगे प्रस्थान करेंगे।
📒 📰 📑 पढ़ना और पढ़ाना जीवन सफल बनाना 📚 📖 📓
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जैनाचार्य जयानंद सूरिश्वरजी के जन्म दिन पर
दान पुण्य, जप तप और बधाई व भक्ति गीतों की प्रस्तुतियां
बीकानेर, 18 मार्च। जैन श्वेताम्बर तपागच्छ के गच्छाधिपति आचार्यश्री नित्यानंद सूरिश्वजी के अनुयायी व सांसारिक भाई आचार्य विजय जयानंद सूरिश्वरजी का 66 वां जन्म दिन बुधवार को रांगड़ी चैक की तपागच्छीय पौषधशाला में जप,तप, धर्म,ध्यान और दान-पुण्य और भक्ति एवं जन्मदिन बधाई गीतों के साथ मनाया गया।
शांति निवास वृृद्ध आश्रम के विकलांग को ट्राई साईकिल प्रदान की गई, टी.बी.सहित विभिन्न अस्पतालों, सेवा आश्रम में फल वितरित किए गए तथा लावारिस, घर परिवार से बेघर लोगों को भोजन करवाया गया। गौशालाओं में गायों को गुड़ व चारा खिलाया गया। समारोह में राजस्थान के विभिन्न जिलों के साथ लुधियाना आदि पंजाब के विभिन्न स्थानों से आए श्रावक-श्राविकाओं और विजयनगर के जैन धर्म के सिद्धान्तों को मानने वाले मुस्लिम इकबाल, ईसाई नन सिस्टर शांति ने आचार्यश्री के जन्म दिन पर शुभकामनाएं दी तथा मंगलमय-धर्ममय जीवन की कामना की ।
आचार्यश्री विजय जयानंद सूरिश्वरजी म.सा. ने अपने जन्म दिन पर भजन ’’जीवन खत्म हुआ तो, जीने का ढंग आया, जब शमां बुझ गई तो, महफिल में रंग आया’’ व ’’उम्र थोड़ी सी हम को मिली थी मगर वो भी घटने लगी देखते-देखते’’ और ’’वो बीते हुए दिन बहुत याद आए, जीवन की लाखों अनमोल घड़ियां जिन्हें यादकर आंसु बहाए’’ सुनाते हुए कहा कि मानव जीवन का समय बहुत कीमती है, इसको व्यर्थ नहीं गवाएं। अधिकाधिक समय धर्म-ध्यान, साधना, आराधना और भक्ति करें तथा जीवन को परोपकारी कार्यों में लगावें।
गणिवर्य जयकीर्ति विजय ने कहा कि आचार्यश्री ने अपने पिता-माता व तीन भाइयों के साथ दीक्षा लेकर एक आदर्श प्रस्तुत किया । इन्होंने अनेक जैनी-अजैनी लोगों को व्यसन मुक्त बनाया। बीकानेर में जर्दा, गुटका व ताश का प्रचलन अधिक है, आचार्यश्री के जन्म दिन पर दुव्यसनों व व्यर्थ समय व्यतीत करने की प्रवृृति का त्याग कर अच्छे व सच्चे जैन श्रावक-श्राविका बनें। उन्होंने एक शेर ’’ हसरतों से हम आपकी राह सजादें, सपनों की दौलत हम आप पर लुटा दें, न कोई फूल है हमारे दामन में, आपके जन्म पर व्यसनों से मुक्त होने के संकल्प से जीवन को संवारदें सुनाते हुए कहा कि अपने मन,इंद्रियों पर नियंत्रण रखते हुए जितेन्द्रीय बनें और जीवन में सच्चा जय आनंद प्राप्त करें। आचार्यश्री व गणिवर्य के जन्म दिन पर शांति निवास वृृद्ध आश्रम की सिस्टर के आग्रह पर श्रावक-श्राविकाओं ने वृृद्धजनों की मसाज के लिए दो लाख रुपए की मशीन देने का संकल्प दोहराया । कार्यक्रम में वरिष्ठ गायक मगन कोचर व उनके शिष्यों, नवरतन, रौनक कोचर, कंचन देवी कोचर, दिलीप कोचर व राजेन्द्र कोचर सहित अनेक श्रावक-श्राविकाओं ने भजनों, भावों और बधाई गीतों की प्रस्तुतियां दी। ज्ञान पाठ शाला के बच्चों ने लघु नाटिका के माध्यम से तथा जितेन्द्र कोचर ने भावों के माध्यम से आचार्यश्री जयानंद सूरिश्वरजी के जन्म आदर्शों का स्मरण दिलवाया । आचार्यश्री के जन्म दिन पर आए बड़ी संख्या में श्रावक श्राविकाओं को 66 रुपए की प्रभावना, फल, मोदक वितरण का लाभ शांति लाल सेठिया, लीलम सिपानी, माणक चंद निहाल चंद कोचर, सुश्रावक गुलाबचंद-चन्द्र कुमार कोचर और सुश्रावक भंवर लाल, सुन्दरलाल, शांति लाल व देवेन्द्र कुमार कोचर परिवार आदि श्रावकों ने लिया। वरिष्ठ श्रावक शांति लाल कोचर ने बताया आचार्यश्री गुरुवार को सुबह साढ़े छह बजे रांगड़ी चैक पौषधशाला से विहार कर गंगाशहर गोल मंदिर, तुलसी विहार से आगे प्रस्थान करेंगे।
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