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बीकानेर 1 फरवरी, 2019
जितना बड़ा नाम उससे बड़े काम
आयुष्मान भारत महात्मा गांधी राजस्थान स्वास्थ्य बीमा योजना लाई बड़ी राहतें
बीकानेर में 5 माह में 28,656 मरीजों को 18 करोड़ रूपए से ज्यादा का कैशलेस इलाज लाभ
12 प्राइवेट हॉस्पिटलों में भी हो रहे फ्री ऑपरेशन
बीकानेर। आम आदमी को चिकित्सा पर लगने वाले महंगे खर्चों से मुक्त कर सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों में निशुल्क इण्डोर इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित आयुष्मान भारत महात्मा गांधी राजस्थान स्वास्थ्य बीमा योजना अपने बड़े नाम की तरह ही बड़े कमाल के काम कर रही है और हारी-बीमारी में आमजन के लिए राहत का सबब बनकर आई है। योजना में 1 हजार 401 बीमारीयों के पैकेज उपलब्ध कराकर योजना के लाभार्थियों को सामान्य तथा गंभीर बीमारीयों जैसे ह्रदय रोग से ग्रसित मरीजों को बायपास सर्जरी, हार्ट वाल्व रिपेयर, एंजियोप्लास्टी, जन्मजात हदय विकार, कैंसर, ब्रेन सर्जरी, स्पाइनल सर्जरी, डायलिसिस, किडनी एवं ब्लैंडर संबंधी रोगो जैसी गंभीर मामलों में कैशलैस इंडोर उपचार का लाभ मिल रहा है।
सीएमएचओ डॉ बी.एल. मीणा ने बताया कि योजनान्तर्गत जिले में सितम्बर 2019 से अब तक कुल 18 करोड़ 59 लाख रूपये की राशि से 28,656 मरीजों का निशुल्क उपचार किया जा चुका है। ये राशि उन गरीब, अभावग्रस्त और वंचित व्यक्तियांे के ऊपर खर्च हुई है, जिसे इसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी। योजना के अंतर्गत लाभार्थियो को जिले की 20 सरकारी और 12 प्राइवेट अस्पतालों में सामान्य बीमारी में तीस हजार और गंभीर बीमारी में तीन लाख तक का स्वास्थ्य बीमा कवर दिया जा रहा है।
योजना के जिला नोडल अधिकारी डॉ योगेन्द्र तनेजा ने बताया योजना के तहत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम और सामाजिक आर्थिक जातिगत जनगणना 2011 के अंतर्गत चयनित 1 करोड 10 लाख परिवारो के सदस्यों को योजना का लाभ मिल रहा है। लाभ लेने के लिए मरीज की आईडी के साथ आयुष्मान भारत कार्ड अथवा राशन कार्ड से जुड़ा जन आधार कार्ड या भामाशाह कार्ड होना आवश्यक है। बीकानेर के अस्पतालों में जिस वार्ड में जाओ योजना के लाभार्थी मिल ही जाते हैं।
केस 1
नोखा के मुकाम गांव में रहने वाली 23 साल की सुनीता को तेज सरदर्द की शिकायत पिछले दो महीने से हो रही थी। सुनीता के परिजन उसे पीबीएम अस्पताल में दिखाने लेकर आये। जब सुनीता के ब्रेन टयूमर होने का पता चला तो घरवालांे के पैरों तले जमीन खिसक गई। बीमारी का कष्ट तो था ही, साथ में इलाज में खर्च होने वाले पैसांे की व्यवस्था की भी चिंता हो रही थी। कष्ट और पीड़ा के इस समय में अस्पताल के स्वास्थ्य मार्गदर्शक कुलदीप सिंघल ने परिजनों को बताया कि सुनीता आयुष्मान भारत महात्मा गांधी राजस्थान स्वास्थ्य बीमा योजना की लाभार्थी है तो उसका इलाज योजना के अंतर्गत कैशलेस होगा और उसके इलाज पर एक पैसा भी परिवार से नहीं लिया जायेगा। ये सुनने के बाद घरवालो का थोड़ा आराम आया। सुनीता के भाई दिलीप विश्नोई के अनुसार योजना के कारण उसकी बहन का सारा का सारा इलाज निशुल्क हो गया। खेती बाड़ी पर निर्भर हमारा परिवार इलाज पर लगने वाले तीन-चार लाख रूपयांे की व्यवस्था नहीं कर पाता या फिर उन्हें किसी से कर्जा लेना पड़ता। केन्द्र और राज्य सरकार का धन्यवाद देते हुए दिलीप बताता है कि योजना उसकी बहन सुनीता के लिये नया जीवन लेकर आई है।
केस 2
कोलायत तहसील के गांव मढ में रहने वाली 52 साल की चम्पादेवी को चक्कर, तेज सिरदर्द और लगातार उल्टी होने की समस्या होने के कारण उनके बेटे मुरलीधर बीकानेर के एक प्राइवेट अस्पताल में दिखाने लेकर आये। एमआरआई से पता चला कि चम्पादेवी को ब्रेन टयूमर है। इलाज करवाना जरूरी था पर इलाज पर खर्च होने वाले तीन-चार लाख रूपयें की व्यवस्था उसके दोनो बेटे कहां से करते। एक बेटा सिलाई का काम करता था तो दूसरा बेटा मजदूरी का। दुख की इस घड़ी में आयुष्मान भारत महात्मा गांधी राजस्थान स्वास्थ्य बीमा योजना वरदान बनकर आई। योजना के लाभार्थी होने के कारण पीबीएम अस्पताल के विशेषज्ञ डा. दिनेष सोढी और उनकी टीम ने ब्रेन टूयमर का इलाज किया और आज चम्पा देवी की तबीयत बेहतर है। बेटे मुरलीधर ने बताया कि योजना के कारण हमारे जैसे जरूरतमंदों को भी स्वास्थ्य का अधिकार मिला है वर्ना माताजी के इलाज के लिये बहूओं के पास जो थोड़े-बहुत गहने थे, उनके पेटे कर्जा लेना पड़ता जिसे चुकाने में पूरी उम्र निकल जाती। केन्द्र और राज्य सरकार की संवेदनशीलता से दुख की इस घड़ी में संबल और सराहा मिला।
प्राइवेट अस्पतालों में भी फ्री इलाज
जिला आई.ई.सी. समन्वयक मालकोश आचार्य ने बताया कि पीबीएम अस्पताल, जिला अस्पताल व समस्त सीएचसी के अलावा योजनान्तर्गत बीकानेर के 12 बड़े निजी अस्पतालों में भी फ्री इंडोर व ऑपरेशन सेवाएं उपलब्ध करवाई गई हैं। इनमे कोठारी हॉस्पिटल, एमएन, फोर्टिस डीटीएम, श्रीराम, जीवन रक्षा, आरोग्यम, आस्था, जैन मेडिसिटी, फ्लोरल, आर्या, एएसजी और श्रीकृष्णा न्यूरो स्पाइन हॉस्पिटल शामिल हैं। सभी अस्पतालों में उनकी विशेषज्ञता अनुसार अलग-अलग उपचार पैकेज उपलब्ध हैं। इन निजी अस्पतालों में 5 माह में लगभग 5 हजार मरीज 6 करोड़ रूपए के बराबर का कैशलेस इलाज लाभ ले चुके हैं।
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बीकानेर 1 फरवरी, 2019
जितना बड़ा नाम उससे बड़े काम
आयुष्मान भारत महात्मा गांधी राजस्थान स्वास्थ्य बीमा योजना लाई बड़ी राहतें
बीकानेर में 5 माह में 28,656 मरीजों को 18 करोड़ रूपए से ज्यादा का कैशलेस इलाज लाभ
12 प्राइवेट हॉस्पिटलों में भी हो रहे फ्री ऑपरेशन
बीकानेर। आम आदमी को चिकित्सा पर लगने वाले महंगे खर्चों से मुक्त कर सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों में निशुल्क इण्डोर इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित आयुष्मान भारत महात्मा गांधी राजस्थान स्वास्थ्य बीमा योजना अपने बड़े नाम की तरह ही बड़े कमाल के काम कर रही है और हारी-बीमारी में आमजन के लिए राहत का सबब बनकर आई है। योजना में 1 हजार 401 बीमारीयों के पैकेज उपलब्ध कराकर योजना के लाभार्थियों को सामान्य तथा गंभीर बीमारीयों जैसे ह्रदय रोग से ग्रसित मरीजों को बायपास सर्जरी, हार्ट वाल्व रिपेयर, एंजियोप्लास्टी, जन्मजात हदय विकार, कैंसर, ब्रेन सर्जरी, स्पाइनल सर्जरी, डायलिसिस, किडनी एवं ब्लैंडर संबंधी रोगो जैसी गंभीर मामलों में कैशलैस इंडोर उपचार का लाभ मिल रहा है।
सीएमएचओ डॉ बी.एल. मीणा ने बताया कि योजनान्तर्गत जिले में सितम्बर 2019 से अब तक कुल 18 करोड़ 59 लाख रूपये की राशि से 28,656 मरीजों का निशुल्क उपचार किया जा चुका है। ये राशि उन गरीब, अभावग्रस्त और वंचित व्यक्तियांे के ऊपर खर्च हुई है, जिसे इसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी। योजना के अंतर्गत लाभार्थियो को जिले की 20 सरकारी और 12 प्राइवेट अस्पतालों में सामान्य बीमारी में तीस हजार और गंभीर बीमारी में तीन लाख तक का स्वास्थ्य बीमा कवर दिया जा रहा है।
योजना के जिला नोडल अधिकारी डॉ योगेन्द्र तनेजा ने बताया योजना के तहत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम और सामाजिक आर्थिक जातिगत जनगणना 2011 के अंतर्गत चयनित 1 करोड 10 लाख परिवारो के सदस्यों को योजना का लाभ मिल रहा है। लाभ लेने के लिए मरीज की आईडी के साथ आयुष्मान भारत कार्ड अथवा राशन कार्ड से जुड़ा जन आधार कार्ड या भामाशाह कार्ड होना आवश्यक है। बीकानेर के अस्पतालों में जिस वार्ड में जाओ योजना के लाभार्थी मिल ही जाते हैं।
केस 1
नोखा के मुकाम गांव में रहने वाली 23 साल की सुनीता को तेज सरदर्द की शिकायत पिछले दो महीने से हो रही थी। सुनीता के परिजन उसे पीबीएम अस्पताल में दिखाने लेकर आये। जब सुनीता के ब्रेन टयूमर होने का पता चला तो घरवालांे के पैरों तले जमीन खिसक गई। बीमारी का कष्ट तो था ही, साथ में इलाज में खर्च होने वाले पैसांे की व्यवस्था की भी चिंता हो रही थी। कष्ट और पीड़ा के इस समय में अस्पताल के स्वास्थ्य मार्गदर्शक कुलदीप सिंघल ने परिजनों को बताया कि सुनीता आयुष्मान भारत महात्मा गांधी राजस्थान स्वास्थ्य बीमा योजना की लाभार्थी है तो उसका इलाज योजना के अंतर्गत कैशलेस होगा और उसके इलाज पर एक पैसा भी परिवार से नहीं लिया जायेगा। ये सुनने के बाद घरवालो का थोड़ा आराम आया। सुनीता के भाई दिलीप विश्नोई के अनुसार योजना के कारण उसकी बहन का सारा का सारा इलाज निशुल्क हो गया। खेती बाड़ी पर निर्भर हमारा परिवार इलाज पर लगने वाले तीन-चार लाख रूपयांे की व्यवस्था नहीं कर पाता या फिर उन्हें किसी से कर्जा लेना पड़ता। केन्द्र और राज्य सरकार का धन्यवाद देते हुए दिलीप बताता है कि योजना उसकी बहन सुनीता के लिये नया जीवन लेकर आई है।
केस 2
कोलायत तहसील के गांव मढ में रहने वाली 52 साल की चम्पादेवी को चक्कर, तेज सिरदर्द और लगातार उल्टी होने की समस्या होने के कारण उनके बेटे मुरलीधर बीकानेर के एक प्राइवेट अस्पताल में दिखाने लेकर आये। एमआरआई से पता चला कि चम्पादेवी को ब्रेन टयूमर है। इलाज करवाना जरूरी था पर इलाज पर खर्च होने वाले तीन-चार लाख रूपयें की व्यवस्था उसके दोनो बेटे कहां से करते। एक बेटा सिलाई का काम करता था तो दूसरा बेटा मजदूरी का। दुख की इस घड़ी में आयुष्मान भारत महात्मा गांधी राजस्थान स्वास्थ्य बीमा योजना वरदान बनकर आई। योजना के लाभार्थी होने के कारण पीबीएम अस्पताल के विशेषज्ञ डा. दिनेष सोढी और उनकी टीम ने ब्रेन टूयमर का इलाज किया और आज चम्पा देवी की तबीयत बेहतर है। बेटे मुरलीधर ने बताया कि योजना के कारण हमारे जैसे जरूरतमंदों को भी स्वास्थ्य का अधिकार मिला है वर्ना माताजी के इलाज के लिये बहूओं के पास जो थोड़े-बहुत गहने थे, उनके पेटे कर्जा लेना पड़ता जिसे चुकाने में पूरी उम्र निकल जाती। केन्द्र और राज्य सरकार की संवेदनशीलता से दुख की इस घड़ी में संबल और सराहा मिला।
प्राइवेट अस्पतालों में भी फ्री इलाज
जिला आई.ई.सी. समन्वयक मालकोश आचार्य ने बताया कि पीबीएम अस्पताल, जिला अस्पताल व समस्त सीएचसी के अलावा योजनान्तर्गत बीकानेर के 12 बड़े निजी अस्पतालों में भी फ्री इंडोर व ऑपरेशन सेवाएं उपलब्ध करवाई गई हैं। इनमे कोठारी हॉस्पिटल, एमएन, फोर्टिस डीटीएम, श्रीराम, जीवन रक्षा, आरोग्यम, आस्था, जैन मेडिसिटी, फ्लोरल, आर्या, एएसजी और श्रीकृष्णा न्यूरो स्पाइन हॉस्पिटल शामिल हैं। सभी अस्पतालों में उनकी विशेषज्ञता अनुसार अलग-अलग उपचार पैकेज उपलब्ध हैं। इन निजी अस्पतालों में 5 माह में लगभग 5 हजार मरीज 6 करोड़ रूपए के बराबर का कैशलेस इलाज लाभ ले चुके हैं।
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