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बीकानेर 18 फरवरी 2020
स्वामी रामकृष्ण कीआध्यात्मिक रचनायें देश को सच्चे राष्ट्रवाद की सीख देती है-कामिनी भोजक
मानवीय मूल्यों के सच्चे पोषक स्वामी रामकृष्ण-नितिन वत्सस
बीकानेर18 फरवरी-सामाजिक सरोकारों की अग्रणी संस्था कल्याण फाउंडेशन ऑफ इंडिया द्वारा आज महान दार्शनिक आध्यात्मिक गुरु स्वामी रामकृष्ण परमहंस की 185 वी जयंती पर आज आध्यत्मिक गोश्ठी का आयोजन किया गया|
फाउंडेशन की निदेशक कामिनी भोजक ने स्वामी रामकृष्ण परमहंस की जीवनी पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वामी जी की आध्यत्मिक रचनाये इस देश को सच्चे राष्ट्रवाद की सीख देती है| 18 फरवरी 1836 को बंगाल के कामारपुरकर में जन्मे स्वामी रामकृष्ण ने बचपन से ही यह बात जतानी शुरू कर दी थी कि ईश्वर का दर्शन हो सकता है और उसी समय से वे ईश साधना और कठोर तपस्या में इतने लीन हुए की वे ईश कृपा से एक महान संत की ख्याति को प्राप्त हुए और जैसे जैसे समय व्यतीत होता गया कठोर आध्यत्मिक अभ्यासों और सिद्धियों से वे भगवान स्वरूप ही नजर आने लगे| भोजक ने कहा कि स्वामी जी ने अपनी साधना पूर्ण कर यह संदेश दिया कि दुनिया के सभी धर्म सच्चे है और उनमें कोई भिन्नता नही है बस ईश प्राप्ति केलिए उनके साधन भिन्न भिन्न है| भोजक ने कहा कि स्वामी जी के जन्म से पहले ही उनके पिता खुदीराम और माता चंद्रा देवी को यह आभास हो चुका था कि उनकी अगली संतान के रूप में भगवान गदाधर प्रकट होंगे जो कि विष्णु के अवतार थे और ऐसा उनको एक स्वप्न से ज्ञात हुआ और आगे जाकर जब रामकृष्ण द्वारा अलौकिक घटनाओं का चित्रण कियागया तब इस साबित भी हो गया कि स्वामी रामकृष्ण भगवान के हि अवतार है| काली माता के दर्शन ब्रह्मांड की माता के रूप में करने के बाद स्वामी रामकृष्ण ने उनको अपनी माता के रूप में पूजने लगे|
आध्यात्मिक गोश्ठी में विचार रखते हुए प्रवक्ता नितिन वत्सस ने कहा कि स्वामी रामकृष्ण परमहंस मानवीय मूल्यों के सच्चे पोषक थे उनकी बाल सुलभ सरलता और मंत्रमुग्ध मुस्कान सभी को अपनी और समोहहित कर लेती थी|
रानी बाजार मंडल अध्यक्ष नरसिंह सेवग ने कहा कि स्वामी रामकृष्ण परमहंस स्वामी विवेकानंद के गुरु थे और इनके शिष्य इन्हें ठाकुर नाम से पुकारते थे स्वामी जी का मानना था कि संसार माया है और जो व्यक्ति काम क्रोध लालच क्रूरता स्वार्थ पर विजय पा लेता है वो सच्चा मानुष्य जीवन जी जाता है|
आध्यात्मिक गोश्ठी की अध्यक्षता करते हुए पंडित सत्यदेव शर्मा ने कहा कि स्वामी जी के जीवन का मूल मंत्र था दरिद्र नारायण की सेवा करना और अज्ञानियों के ज्ञान तंत्र को जाग्रत करना| स्वामी जी के जीवन दर्शन की एक घटना का जिक्र करते हुए सत्यदेव शर्मा ने कहा कि रामकृष्ण परमहंस के परमप्रिय शिष्य स्वामी विवेकानंद जब हिमालय एकांत वास आज्ञा लेने गए तब रामकृष्ण बोले कि आसपास के क्षेत्र भूख से तड़प रहे है और तुम एकांतवास जाकर क्या आंनद में रह पाओगे यही रहो और दरिद्र लोगो की सेवा करो इस से बड़ा कोई साधना नही
स्वामी रामकृष्ण परमहंस महान योगी, उच्चकोटि के विचारक थे|
आध्यात्मिक गोश्ठी में श्रीमती प्रियंका तवर,सुश्री जयश्री कुंडलिया,सुश्री प्रिया सांखी, अनिल सिंह भाटी,सुनील सोनी, विक्रम सिंह राठौड़,आकिब खान, राहुल चायल,प्रशांत भाटी, विमल भोजक, खुश, कन्हैयालाल सेवग, ने विचार व्यक्त किये|
आध्यात्मिक गोश्ठी का संचालन जितेंद्र भोजक ने किया|
इस अवसर पर जैनेन्द्र,संतीश, श्रीमती सरोज, गोपाल भैया, राहुल, निशा, स्वेता सहित गणमान्य जन मौजूद थे|
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