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खबरों में बीकानेर 🎤 🌐
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रविवार दिनांक 27 अक्टूबर 2019 को
अमावस्या तिथि दोपहर 12.17 बजे से
आरम्भ होकर सम्पूर्ण रात्रि व्याप्त रहेगी।
लोक प्रसिद्धि में कार्तिक अमावस्या को
लक्ष्मी पूजन के समय प्रज्वलित दीपकों
की पंक्ति बना देने से दीपावली और
स्थान-स्थान पर मंडल बना देने से
दीपमालिका कहलाती हैं। ब्रह्म पुराण में
लिखा है कि कार्तिक अमावस्या को
अद्र्धरात्रि के समय महारानी लक्ष्मी
सद्गृहस्थों के घर में विचरण करती है।
अत: अपने निवास स्थान को सब प्रकार
से स्वच्छ, शुद्ध और सुशोभित करके
दीपावली और दीपमालिका बनाने से
लक्ष्मी जी प्रसन्न होती है और स्थायी रूप
से निवास करती है। देवराज इन्द्र को एक
बार श्री लक्ष्मी जी ने बताया कि सत्य,
दान, व्रत, तपस्या, पराक्रम व धर्म जहां भी
वास करते हैं वहां पर मेरा निवास रहता है।
रविवार 27 अक्टूबर 2019 को
स्थिर लग्न के मुहूर्त
● कुंभ लग्न - 2.10 दिन से 3.38
दिन तक
● वृष लग्न - 6.39 शाम से 8.35
रात्रि तक
● सिंह लग्न - 1.08 रात्रि से 3.25
रात्रि तक
शुभ, अमृत व चर की चौघडिय़ां -
5.39 शाम से 8.53 रात्रि तक।
प्रदोष काल - दीपावली का मुख्य पर्व
प्रदोष व्यापिनी अमावस्या है। दीपावली के
दिन प्रदोषकाल 5 बजकर 32 मिनट शाम
से 7 बजकर 56 मिनट रात्रि तक है। इस
प्रदोषकाल में श्रद्धालुजन सुविधानुसार श्री
लक्ष्मी जी का पूजन कर लाभ उठावें।
निशीथ काल - रात्रि 12 बजकर 5
मिनट से 12 बजकर 54 मिनट रात्रि तक
है। निशीधे लक्ष्यादि पूजनम् कृतम शुभम्
इस वचनानुसार श्री गणपति, लक्ष्मी, इन्द्र,
कुबेर आदि देवताओं का पूजन एवं खाता
बही का पूजन करना शुभ है। निशीथकाल
में श्री लक्ष्मी जी का पूजन तंत्र विधान से
करना परम सिद्धिदायक होगा। श्रद्धालुजन
सुविधानुसार लाभ उठावें।
भगवती लक्ष्मी का आगमन काल
रात्रि ठीक 2 बजकर 29 मिनट पर है।
लेकिन इस समय से 10 मिनट पहले
और 10 मिनट के बाद तक अर्थात् रात्रि
2 बजकर 19 मिनट से 2 बजकर 39
मिनट तक श्री लक्ष्मी जी हेतु धृत का
दीपक जलाकर भगवती के गुणगान करते
हुए श्री सूक्त जी का पाठ करते हुए
जागरण करें। इस समय जो सोता है
वह खोता है, जो जागता है वह पाता है।
भगवती लक्ष्मी, महाकाली, महात्रिपुर
सुन्दरी आप सभी परिवार जनों पर
प्रसन्न हों।
(युगपक्ष)
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