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108 बार पीपल वृक्ष की परिक्रमा से होगी मनोकामना पूरी
भगवान शिवजी, श्रीविष्णु जी तथा पीपल वृक्ष की पूजा से मिलेगी खुशहाली, कटेंगे कष्टï
श्राद्ध की अमावस्या : 27 अ-
टूबर को
■ ज्योतिर्विद् श्री विमल जैन
भारतीय संस्कृति के सनातन धर्म
में हिन्दू धर्मशास्त्रों के अनुसार प्रत्येक
माह के तिथि-पर्व कीविशेष महिमा है।
प्र यात ज्योतिषविद् श्री विमल जैन जी
ने बताया कि सोमवार को पडऩे वाली
अमावस्या तिथि सोमवती अमावस्या के
नाम से जानी जाती है। सोमवार का दिन
देवाधिदेव महादेव शिवजी का माना गया
है। आज के दिन शिवपूजा भी
कल्याणकारी होती है। शिवजी का
रुद्राभिषेक भी आज के दिन करवाना
लाभकारी माना गया है। इस बार सोमवार
के दिन अमावस्या पडऩे से और अधिक
शुभ फलकारी हो गई है।
ज्योतिषविद् श्री विमल जैन जी ने
बताया कि काॢतक कृष्ण पक्ष की
अमावस्या तिथि रविवार, 27 अ टूबर
को दिन में 12 बजकर 23 मिनट पर
लगेगी जो कि अगले दिन सोमवार, 28
अ टूबर को प्रात: 9 बजकर 09 मिनट
तक रहेगी। इस तिथि पर स्नान-दान-व्रत
एवं श्राद्ध करने का विशेष महत्व है।
ऐसे करें पूजा-अर्चना—सोमवती
अमावस्या पर पीपल वृक्ष की पूजा-
अर्चना से सुख-समृद्धि, खुशहाली
मिलती है। श्राद्ध की अमावस्या रविवार,
27 अक्टूबर को है। अमावस्या तिथि पर
विधि-विधान पूर्वक पितरों की भी पूजा-
अर्चना की जाती है। पितरों के आशीर्वाद
से जीवन में भौतिक सुख-समृद्धि,
खुशहाली का आगमन होता है। इस दिन
पीपल के वृक्ष व भगवान् विष्णु जी की
पूजा-अर्चना के साथ पीपल वृक्ष की
परिक्रमा करने पर आरोग्य व सौभाग्य की
प्राप्ति होती है।
पीपल वृक्ष की विशेष महिमा—
पीपल वृक्ष में समस्त देवताओं का वास
माना गया है। पीपल के वृक्ष को जल से
ङ्क्षसचन करके विधि-विधान पूर्वक पूजा
के पश्चात् 108 बार परिक्रमा करने पर
सौभाग्य में वृद्धि होती है। इस दिन व्रत
उपवास रखकर इष्ट-देवी देवता एवं
आराध्य देवी देवता की पूजा अर्चना
अवश्य करनी चाहिए। ब्राह्मण को घर पर
निमन्त्रित करके उन्हें भोजन करवाकर
सफेद रंग की वस्तुओं का दान जैसे—
चावल, दूध, मिश्री, चीनी, खोवे से बने
सफेद मिष्ठान्न, सफेद वस्त्र, चाँदी एवं
अन्य सफेद रंग की वस्तुएं दक्षिणा के
साथ देकर, उनका चरण स्पर्श कर
आशीर्वाद लेना चाहिए। किसी कारणवश
यदि ब्राह्मïण को भोजन न करवा सकें तो
इस स्थिति में उन्हें भोजन सामग्री
(सिद्धा) के साथ नकद द्रव्य देकर
पुण्यलाभ प्राप्ïत करना चाहिए। समस्त
धाॢमक अनुष्ठान करने पर उ ाम फल
की प्राप्ति होती है। पीपल के वृक्ष की
पूजा का आज विशेष महत्व है। पीपल
वृक्ष पूजा के मन्त्र—ú मूलतो ब्रह्मरूपाय
मध्ये विष्णुरूपिणे अग्रतो शिवरूपाय
पीपलाय नमो नम:। आज के दिन
व्रतकर्ता को अपनी दिनचर्या नियमित व
संयमित रखते हुए यथास-
भव गरीबों,
असहायों और जरूरतमन्दों की सेवा व
सहायता तथा परोपकार के कृत्य अवश्य
करने चाहिए। जिससे जीवन में सुख-
समृद्धि, खुशहाली का मार्ग प्रशस्त हो।
( साभार - दैनिक युगपक्ष, बीकानेर )
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