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मन की शान्ति का उपाय मौन: मुनिश्री सुमति कुमार
पर्युषण पर्व के चौथे दिन वाणी संयम दिवस मनाया
गंगाशहर। शब्दों का संसार बहुत अद्भुत है। शब्दों में एक चमत्कार है। यह हम पर निर्भर करता है कि हम उन शब्दों से स्वर्ग का निर्माण करते हैं या नरक जैसी स्थिति पैदा करते हैं। तलवार का घाव मिट जाता है किन्तु शब्दों से चला घाव सदियों तक नहीं मिटता। यह विचार मुनिश्री सुमतिकुमार जी ने तेरापंथ भवन में पर्युषण महापर्व के चौथे दिन वाणी संयम के (मौन दिवस) पर व्यक्त किये। मुनिश्री ने कहा कि विवेक ही धर्म है। हर क्रिया में विवेक हो-कैसे चलें, कैसे खाएं, कैसे बोलें-बोलने का भी विवेक होना चाहिए। बोलना एक कला है ज्यादा बोलने वाला किसी को अच्छा नहीं लगता। कोई उसके पास बैठना पसंद नहीं करता और कम बोलने वाला सबको प्रिय लगता है। उसके शब्दों का बड़ा मूल्य होता है। मुनिश्री ने कहा कि घर की लड़ाई-झगड़े का मुख्य कारण ही वाणी होता है। यह बिना हड्डी वाली जीभ दूसरों की हड्डियां तुड़वा देती है। अपनी वाणी से ही हम फूल बरसा सकते है। मुनिश्री ने कहा कि शरीर का घाव मिट जाता है लेकिन वचन का घाव मिटता नहीं है। हम मतलब से कम और बिना मतलब से ज्यादा बोलते हैं। आवश्यक हो तभी बोले, धीरे बोले, मीठा बोले, वाणी से अपनी पहचान बनाए। आज के दिन यह संकल्प करें कि बिना मतलब नहीं बोलंेगे। शब्दों का संयम करेंगे। मंत्री अमरचन्द सोनी ने बताया कि सम्पूर्ण श्रावक समाज में पुर्यषण पर्व को लेकर भारी उत्साह है। तेरापंथ भवन में ‘‘णमोकार मंत्र’’ का अखण्ड जप जारी है। दोपहर में शासनश्री साध्वीश्री अमितकुमारी जी एवं साध्वीश्री गुप्तिप्रभा जी के सान्निध्य में व्याख्यान तथा रात्रिकालीन कार्यक्रम चल रहे हैं; गुरुवार रात्रि को तेरापंथ युवक परिषद् ने ‘‘मेरी अभिव्यक्ति’’ कार्यक्रम आयोजित किया जिसमें अनेक नवोदित वक्ताओं ने अपनी अभिव्यक्ति भाषण, मुक्तक, कविताओं एवं गीत के माध्यम से प्रस्तुत की। सोनी ने बताया कि सांयकालीन प्रतिक्रमण में तेरापंथ भवन, शान्ति निकेतन एवं नैतिकता का शक्तिपीठ पर श्रद्धालुगण प्रतिक्रमण में शामिल होते हैं।



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