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अस्तित्व को बचाने के लिए वन क्षेत्र बढ़ाना होगा - कुमार पाल
उन्होंने कहा कि वृक्ष कार्बन आक्साईड लेकर हमें जीवनदायी आक्सीजन देता है। स्वयं जहरीली गैस लेकर हमें प्राणवायु देता है। एक पेड़ अपने आयुकाल में लाखों रूपये की आक्सीजन बनाता है। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति जीवन में जितनी आक्सीजन लेता है, उसे उसकी तुलना में ज्यादा पेड़ लगाने चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें अपने वजूद को बचाए रखने के लिए पेड़ तो लगाने ही होंगे अन्यथा इस धरा से जीव-जन्तुओं का अस्तित्व खतरे में पड़ जायेगा। उन्होंने आमजन को आगाह किया कि अगर हमारा पर्यावरण सुरक्षित नहीं होगा तो हमारा जीवन भी सुरक्षित नहीं होगा। जिस क्षेत्र का पर्यावरण दूषित होगा, वहां विभिन्न तरह की बीमारियां फैलेगी।
गौतम ने कहा कि वन महोत्सव के दौरान गांव-शहर व मौहल्लों में पौधरोपण करवाया जायेगा। उन्हांेने कहा कि पौध लगाने के साथ ही उसे पडे़ बनाना होगा। उसकी सारसंभाल अपने बच्चों की तरह करनी होगी, तभी यह पौध वृक्ष बन सकेंगे। वनों को विनाश से बचाने एवं वृक्षारोपण योजना को वन-महोत्सव का नाम देकर अधिक-से-अधिक लोगों को इससे जोड़कर भू-आवरण को वनों से आच्छादित करना एक अच्छा नया प्रयास है। यद्यपि यह कार्य एवं नाम दोनों ही नए नहीं है। हमारे पवित्र वेदों में भी इसका उल्लेख है।
बीकानेर पंचायत समिति की प्रधान राधा देवी ने जल, जंगल, जर, जमीन व जन (जनता) के महत्व पर प्रकाश डाला और कहा कि वनोपज भी हमारे दैनिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हम स्वयं को वनों से अलग नहीं कर सकते। विकास की दौड़ में हम आज कंक्रीट के जंगल तक आ पहुंचे हैं।
इस अवसर पर मुख्य वन संरक्षक एम. के. अग्रवाल ने कहा कि पर्यावरण असंतुलन की वजह से धरती पर घटता-बढ़ता तापमान, आंधी, तूफान, बाढ़, सूखा, भूमिक्षरण, जैसी विभिषिकाओं से जूझता मानव कदाचित अब वनों के महत्व को समझने लगा है। तभी वनों के संरक्षण की दिशा में सोच आगे बढ़ी है। व्यावहारिक रूप से यह उचित भी है और समय की मांग भी यही है। उन्होंने देश में वन महोत्सव के इतिहास और देश-प्रदेश और संभाग में वन क्षेत्रफल की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिले में वन विभाग ने इस वर्ष 5 लाख से अधिक पौधे वितरित किए हैं।
समारोह में हरीश चंद्र लोक प्रशासन प्रशिक्षण संस्थान के अतिरिक्त निदेशक (प्रशासन) विजय पाल भुल्लर, अतिरिक्त निदेशक (लेखा) योगिता गोयल, अतिरिक्त निदेशक (बीमा) शिशिर चतुर्वेदी, वन सरंक्षक जय प्रकाश, मण्डल वन अधिकारी अनिता, कौशल सक्सेना, वीरेन्द्र जोरा ने भी विचार व्यक्त किए। सेवाश्रम के मूक बधिर बच्चों ने अंहिसा, शान्ति, सौहार्द के संदेश पर आधारित नृृत्य की प्रस्तुति दी। संचालन विनोद जोशी ने किया। मोहम्मद इकबाल ने सांप को पकड़ने की प्रक्रिया के बारे में बताया और सांपों व अन्य जहरीले वन्य जीवों के संरक्षण पर बल दिया।
वन महोत्सव में कर्मचारी महासंघ के गोविन्द शर्मा,कर्मचारी संगठन आई.जी.एन.पी,राजस्थान एकाउंट ऐसोशियेशन,सेवाश्रम, मरूधर काॅलोनी पर्यावरण समिति, पवनपुरी दक्षिण विस्तार काॅलोनी की विकास समिति ने सहयोग किया। इससे पहले अतिथियों ने संस्थान परिसर में नीम,गुलमोहर, सेरेश,रोहिड़ा, खेजड़ी,अमलताश की पौध का रोपण किया।
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अस्तित्व को बचाने के लिए वन क्षेत्र बढ़ाना होगा - कुमार पाल
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बीकानेर, 06 अगस्त। हशिचंद्र लोक प्रशासन प्रशिक्षण संस्थान परिसर मंे 70 वां जिला स्तरीय वन महोत्सव मंगलवार को जिला कलक्टर कुमार पाल गौतम की अध्यक्षता में समारोह पूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर विभिन्न प्रजातियों के 201 पौधे रोपित किए। साथ इन पौधों की सारसंभाल की शपथ ली गई।
जिला कलक्टर गौतम ने कहा कि जंगल हमारे जीवन में कितनी अहम भूमिका निभाते हैं, इससे हमें भलीभांति परिचित होना ही होगा, अन्यथा बहुत देर हो जाएगी।
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अस्तित्व को बचाने के लिए वन क्षेत्र बढ़ाना होगा - कुमार पाल
बीकानेर, 06 अगस्त। हशिचंद्र लोक प्रशासन प्रशिक्षण संस्थान परिसर मंे 70 वां जिला स्तरीय वन महोत्सव मंगलवार को जिला कलक्टर कुमार पाल गौतम की अध्यक्षता में समारोह पूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर विभिन्न प्रजातियों के 201 पौधे रोपित किए। साथ इन पौधों की सारसंभाल की शपथ ली गई।
जिला कलक्टर गौतम ने कहा कि जंगल हमारे जीवन में कितनी अहम भूमिका निभाते हैं, इससे हमें भलीभांति परिचित होना ही होगा, अन्यथा बहुत देर हो जाएगी।
गौतम ने कहा कि वन महोत्सव के दौरान गांव-शहर व मौहल्लों में पौधरोपण करवाया जायेगा। उन्हांेने कहा कि पौध लगाने के साथ ही उसे पडे़ बनाना होगा। उसकी सारसंभाल अपने बच्चों की तरह करनी होगी, तभी यह पौध वृक्ष बन सकेंगे। वनों को विनाश से बचाने एवं वृक्षारोपण योजना को वन-महोत्सव का नाम देकर अधिक-से-अधिक लोगों को इससे जोड़कर भू-आवरण को वनों से आच्छादित करना एक अच्छा नया प्रयास है। यद्यपि यह कार्य एवं नाम दोनों ही नए नहीं है। हमारे पवित्र वेदों में भी इसका उल्लेख है।
बीकानेर पंचायत समिति की प्रधान राधा देवी ने जल, जंगल, जर, जमीन व जन (जनता) के महत्व पर प्रकाश डाला और कहा कि वनोपज भी हमारे दैनिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हम स्वयं को वनों से अलग नहीं कर सकते। विकास की दौड़ में हम आज कंक्रीट के जंगल तक आ पहुंचे हैं।
इस अवसर पर मुख्य वन संरक्षक एम. के. अग्रवाल ने कहा कि पर्यावरण असंतुलन की वजह से धरती पर घटता-बढ़ता तापमान, आंधी, तूफान, बाढ़, सूखा, भूमिक्षरण, जैसी विभिषिकाओं से जूझता मानव कदाचित अब वनों के महत्व को समझने लगा है। तभी वनों के संरक्षण की दिशा में सोच आगे बढ़ी है। व्यावहारिक रूप से यह उचित भी है और समय की मांग भी यही है। उन्होंने देश में वन महोत्सव के इतिहास और देश-प्रदेश और संभाग में वन क्षेत्रफल की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिले में वन विभाग ने इस वर्ष 5 लाख से अधिक पौधे वितरित किए हैं।
समारोह में हरीश चंद्र लोक प्रशासन प्रशिक्षण संस्थान के अतिरिक्त निदेशक (प्रशासन) विजय पाल भुल्लर, अतिरिक्त निदेशक (लेखा) योगिता गोयल, अतिरिक्त निदेशक (बीमा) शिशिर चतुर्वेदी, वन सरंक्षक जय प्रकाश, मण्डल वन अधिकारी अनिता, कौशल सक्सेना, वीरेन्द्र जोरा ने भी विचार व्यक्त किए। सेवाश्रम के मूक बधिर बच्चों ने अंहिसा, शान्ति, सौहार्द के संदेश पर आधारित नृृत्य की प्रस्तुति दी। संचालन विनोद जोशी ने किया। मोहम्मद इकबाल ने सांप को पकड़ने की प्रक्रिया के बारे में बताया और सांपों व अन्य जहरीले वन्य जीवों के संरक्षण पर बल दिया।
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