प्रवर्तिनी साध्वीश्री शशि प्रभा के सान्निध्य में नवाचार - पर्युषण पर्व पर घर-घर जाकर बुजुर्ग श्रावक-श्राविकाओं को करवा रहे परमात्मा पूजन
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प्रवर्तिनी साध्वीश्री शशि प्रभा के सान्निध्य में नवाचार - पर्युषण पर्व पर घर-घर जाकर बुजुर्ग श्रावक-श्राविकाओं को करवा रहे परमात्मा पूजन
बीकानेर, 26 अगस्त। जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के गच्छाधिपति आचार्यश्री जिन मणिप्रभ सूरिश्वरजी म.सा. की आज्ञानुवर्ती प्रवर्तिनी वरिष्ठ साध्वीश्री शशि प्रभा म.सा.ने सोमवार को रांगड़ी चैक के प्राचीन सुगनजी महाराज के उपासरे में सभी तीर्थंकरों, अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, चारों दादा गुरुओं व क्षमाकल्याणजी महाराज व अपनी गुरुवर्या सज्जनश्रीजी म.सा की स्तुति वंदना से आठ दिवसीय पर्युषण पर्व के धार्मिक-आध्यात्मिक कार्यक्रमों की शुरूआत की।
साध्वीवृृंद के सान्निध्य में सोमवार से पांच स्थानों पर जप,तप, स्वाध्याय, सामयिक प्रतिक्रमण, देव दर्शन व वंदन, भगवान महावीर के जन्म कल्याणक वांचन व विशेष प्रवचन शुरू हुए। नाहटा चैक के भगवान आदि नाथ, सुगनजी महाराज के उपासरे के भगवान अजीत नाथ तथा ज्ञान वाटिका के बच्चों ने नाहटा चैक के भगवान शांतिनाथ की प्रतिमा पर भव्य अंगी रचना की । अंगी रचना, देव स्तुति, वंदना व भक्ति के कार्यक्रम आठ दिन चलेंगे। सोमवार को ही खरतरगच्छ युवा परिषद की स्थानीय इकाई के अध्यक्ष राजीव खजांची, सचिव मनीष नाहटा, पुनेश मुसरफ, अनिल सुराणाा व धर्मेन्द्र आदि पदाधिकारियों व सदस्यों ने हिन्दुस्तान में अपने आप में पयुषण पर्व में अपने आप में अनूठा नवाचार शुरू किया। नवाचार की अखिल भारतीय स्तर पर अनुमोदना हुई है। परिषद के सदस्य 2 सितम्बर तक मंदिर में नहीं जा सकने वाले बुर्जुग, लाचार व बीमार श्रावक-श्राविकाओं के निवास पर दोपहर साढ़े ग्यारह बजे से एक बजे तक जाकर भगवान की प्रतिमा को लेकर पूजन व दर्शन करवांगे। प्रथम दिन सोमवार को गोपेश्वर बस्ती व सहित विभिन्न स्थानों पर वरिष्ठ श्रावक-श्राविकाओं को पूजन व दर्शन का लाभ दिलाया।
सुगनजी महाराज के उपासरे व ढढ्ढा कोटड़ी मंे प्रवचन में साध्वीश्री शशि प्रभा ने कहा कि पर्युषण पर्व के दौरान परमात्मा की त्रिकाल पूजा करें तथा अधिकाधिक आत्म व परमात्मा की भक्ति करें। सभी तरह के जीव हर परिस्थिति में शांति व आनंद से जीना चाहते है, उनको अहिंसा परमोधर्म का पालन करते हुए अभयदान दें। किसी से आसक्ति नहीं रखे तथा कर्मबंधन नहीं बांधे। सांसारिक विषय वस्तुओं व भोगों में आसक्ति रखने व रस लेने से कर्म बंधन अधिक होता है। अपने पारिवारिक व सामाजिक कर्तव्यों को निभाते हुए सावधानी रखते हुए धार्मिक कार्य करना है। पर्युषण पर्व के दौरान इस तरह की साधना आराधना व भक्ति करें जिससे वर्षभर के आत्मा पर चढ़े कषायों का मेल स्वच्छ हो सकें।
उन्होंने कहा कि कल्पसूत्र में परमात्मा के चरित्र व आदर्श तथा साधुओं के कर्तव्यों का और अष्टानिका प्रवचन में श्रावकों के कर्तव्यों का वर्णन है। श्रावक अपने कर्तव्यों का सही निर्वहन करते हुए परमात्मा भक्ति व तपस्या करें तथा अपने बच्चों को भी तपस्या व धार्मिक संस्कारों से जोड़े। पर्युषण पर्व के दौरान नौरंगी, अट्ठाई,सात, पांच, चार, तेला, बेला व उपवास,आयम्बिल व बयासना आदि तपस्याएं और अधिकाधिक देवदर्शन, पूजन, स्वाध्याय, सामयिक प्रतिक्रमण व पौषध करें।
पर्युषण पर्व के दौरान आठ दिनों तक साध्वीश्री शशि प्रभाश्रीजी म.सा के सान्निध्य में उनकी शिष्याओं के नेतृृत्व में ढढ्ढा कोटड़ी, रांगड़ी चैक के सुगनजी महाराज का उपासरा, तपागच्छीय पौषधशाला, उदयरामसर के जैन मंदिर परिसर में सोमवार व दस्साणी चैक के नवंकार भवन में मंगलवार से पर्युषण पर्व के विशेष धार्मिक अनुष्ठान व प्रवचन होंगे।
प्रतिक्रमण-पर्युषण पर्व के दौरान नियमित ढढ्ढा कोटड़ी में श्रावकों का तथा सुगनजी महाराज के उपासरे व ढढ्ढा चैक के इंद्रलोक में शाम सात बजे प्रतिक्रमण होगा।










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