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“जश्न−ए−निज़ाम” हर कलाम पर झूम उठे सामयिन
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“जश्न−ए−निज़ाम” हर कलाम पर झूम उठे सामयिन
उत्तर पश्चिम रेलवे बीकानेर मंडल साहित्य संस्कृति एवं ललित कला संस्थान की ओर से शनिवार शाम स्थानीय रेलवे प्रेक्षागृह में प्रसिद्ध शायर शीन काफ़ निज़ाम के सम्मान में एक “जश्न−ए−निज़ाम” मुशायरे का आयोजन किया गया.
इस अवसर पर मंडल रेल प्रबंधक संजय श्रीवास्तव ने शीन काफ़ निज़ाम को शाँल और श्रीफल देकर सम्मानित किया.
इस काव्य संध्या में शीन काफ़ निज़ाम ने अपने कलाम से सामईन के दिलों को छू लिया.
एक हर्फ़ मैं भी हूँ
एक हर्फ़ तुम भी हो
क्यों न लफ़्ज़ बन जाएँ
से शुरू करते हुए निज़ाम ने अपनी नज़्मों और ग़ज़लों से लगभग एक घंटे तक श्रोताओं को बाँधे रखा.
“निगाहों में निगहबानी बहुत है,नवाज़िश ज़िल्ले सुबहानी बहुत है”, “वीरान क्यूँ हैं बस्तियाँ, बाशिंदे क्या हुए” जैसी ग़ज़लें और “चॉद सा प्यार” जैसी नज़्में सीधे श्रोताओं के दिलों में उतर गईं.
“निगाहों में निगहबानी बहुत है,नवाज़िश ज़िल्ले सुबहानी बहुत है”, “वीरान क्यूँ हैं बस्तियाँ, बाशिंदे क्या हुए” जैसी ग़ज़लें और “चॉद सा प्यार” जैसी नज़्में सीधे श्रोताओं के दिलों में उतर गईं.
इरशाद अज़ीज़ , अमित गोस्वामी, रवि शुक्ल ने भी अपनी रचनाएं सुनाई ।
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“जश्न−ए−निज़ाम” हर कलाम पर झूम उठे सामयिन
उत्तर पश्चिम रेलवे बीकानेर मंडल साहित्य संस्कृति एवं ललित कला संस्थान की ओर से शनिवार शाम स्थानीय रेलवे प्रेक्षागृह में प्रसिद्ध शायर शीन काफ़ निज़ाम के सम्मान में एक “जश्न−ए−निज़ाम” मुशायरे का आयोजन किया गया.
इस अवसर पर मंडल रेल प्रबंधक संजय श्रीवास्तव ने शीन काफ़ निज़ाम को शाँल और श्रीफल देकर सम्मानित किया.
इस काव्य संध्या में शीन काफ़ निज़ाम ने अपने कलाम से सामईन के दिलों को छू लिया.
एक हर्फ़ मैं भी हूँ
एक हर्फ़ तुम भी हो
क्यों न लफ़्ज़ बन जाएँ
से शुरू करते हुए निज़ाम ने अपनी नज़्मों और ग़ज़लों से लगभग एक घंटे तक श्रोताओं को बाँधे रखा.
“निगाहों में निगहबानी बहुत है,नवाज़िश ज़िल्ले सुबहानी बहुत है”, “वीरान क्यूँ हैं बस्तियाँ, बाशिंदे क्या हुए” जैसी ग़ज़लें और “चॉद सा प्यार” जैसी नज़्में सीधे श्रोताओं के दिलों में उतर गईं.
“निगाहों में निगहबानी बहुत है,नवाज़िश ज़िल्ले सुबहानी बहुत है”, “वीरान क्यूँ हैं बस्तियाँ, बाशिंदे क्या हुए” जैसी ग़ज़लें और “चॉद सा प्यार” जैसी नज़्में सीधे श्रोताओं के दिलों में उतर गईं.
इरशाद अज़ीज़ , अमित गोस्वामी, रवि शुक्ल ने भी अपनी रचनाएं सुनाई ।
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