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पृथ्वी को सुरक्षित रखने के लिए जैविक खेती की ओर बढ़ें किसान - पद्मश्री पारीक
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एसकेआरएयूः दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमीनार प्रारम्भ
पृथ्वी को सुरक्षित रखने के लिए जैविक खेती की ओर बढ़ें किसान-पद्मश्री पारीक
बीकानेर, 12 मार्च। स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय में ‘किसानों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तीकरण के लिए कृषि में उद्यमशीलता और नवाचार’ विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमीनार मंगलवार को प्रारम्भ हुई।
राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना के तहत आयोजित सेमीनार के उद्घाटन सत्र के मुख्यअतिथि पद्मश्री पुरस्कार विजेता प्रगतिशील किसान जगदीश प्रसाद पारीक थे। उन्होंने पृथ्वी को सुरक्षित रखने के लिए शत-प्रतिशत जैविक खेती की ओर अग्रसर होने का आह्वान किया। खेती के साथ पशुपालन करने तथा फलदार पौधे और मौसम आधारित सब्जियों का उत्पादन करते हुए किसानों की आय बढ़ाने की बात कही। उन्होंने कहा कि कृषि वैज्ञानिक किसानों को जैविक उत्पादन के लिए प्रेरित करें तथा इसके लिए आवश्यक मार्गदर्शन दें। उन्होंने बूंद-बूंद पानी की कीमत समझने और अत्याधुनिक तकनीक अपनाने का सुझाव दिया।
अध्यक्षता करते हुए स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विष्णु शर्मा ने कहा कि जिस गति से उत्पादन बढ़ा है,उसी गति से किसानों की आय बढ़े, इस दिशा में चिंतन करना चाहिए। कृषि वैज्ञानिक एवं विद्यार्थी अपनी ऊर्जा का समुचित उपयोग कृषि एवं कृषक कल्याण की दिशा में करें। खेती की नई तकनीकें इजाद करें तथा इन्हें किसानों तक पहुंचाएं।
राजुवास के पूर्व कुलपति प्रो. ए. के. गहलोत ने कहा कि वर्ष 2050 तक विश्व की जनसंख्या दस अरब के लगभग हो जाएगी। उस समय तक खेती योग्य भूमि तथा पानी की उपलब्धता बहुत कम रह जाएगी। ऐसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए खेती की योजना तैयार करने तथा इसका क्रियान्वयन करने की जरूरत है।
आयोजन सचिव तथा आइएबीएम निदेशक डाॅ. एन. के. शर्मा ने किसानों की आय में वृद्धि के प्रयास आज की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए उत्पादन के साथ ‘पोस्ट प्रोडक्शन आस्पेक्ट्स’ की ओर भी ध्यान देना होगा। उन्होंने दो दिवसीय सेमीनार की रूपरेखा पर प्रकाश डाला।
कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डाॅ. आई. पी. सिंह ने राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना के बारे में बताया। उन्होंने उत्पादों के मूल्य संवर्धन की जरूरत पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कृषि विद्यार्थी ‘जाॅब सीकर नहीं, जाॅव प्रोवाइडर’ बनें।
इससे पहले अतिथियों ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरूआत की। इस दौरान विश्वविद्यालय का कुलगीत प्रस्तुत किया गया। अतिथियों ने सेमीनार के ‘सोवेनियर एंड एबस्ट्रेक्ट’ का विमोचन किया। इस दौरान विश्वविद्यालय के कुलसचिव ताज मोहम्मद राठौड़, अटारी जोधपुर के निदेशक डाॅ. एस. के. सिंह, केन्द्रीय शुष्क बागवानी संस्थान के निदेशक डाॅ. पी. एल. सरोज, जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. एल. एन. हर्ष, प्रसार शिक्षा निदेशक डाॅ. एस. के. शर्मा, मिशन फार्मर साइंटिस्ट के महेन्द्र मधुप सहित विश्वविद्यालय के डीन-डायरेक्टर, कृषि वैज्ञानिक, विद्यार्थी तथा प्रगतिशील किसान मौजूद रहे। डाॅ. अदिति माथुर ने आभार जताया।
अतिथियों ने किया प्रदर्शनी का उद्घाटन
इस दौरान अतिथियों ने आइएबीएम परिसर में आयोजित प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। प्रदर्शनी में गृह विज्ञान महाविद्यालय द्वारा जैतून और बाजरे के उत्पादों की अतिथियों ने सराहना की। प्रसार शिक्षा निदेशालय द्वारा कृषि विज्ञान केन्द्रों की गतिविधियों के बारे में बताया गया। आइएबीएम द्वारा कृषि प्रबंधन से संबंधित तीन स्टाल लगाई गईं। वहीं मशरूम, जिंजर आदि के मूल्य संवर्धित उत्पादों की स्टाल आकर्षण का केन्द्र रहीं।
पृथ्वी को सुरक्षित रखने के लिए जैविक खेती की ओर बढ़ें किसान - पद्मश्री पारीक
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एसकेआरएयूः दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमीनार प्रारम्भ
पृथ्वी को सुरक्षित रखने के लिए जैविक खेती की ओर बढ़ें किसान-पद्मश्री पारीक
बीकानेर, 12 मार्च। स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय में ‘किसानों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तीकरण के लिए कृषि में उद्यमशीलता और नवाचार’ विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमीनार मंगलवार को प्रारम्भ हुई।
राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना के तहत आयोजित सेमीनार के उद्घाटन सत्र के मुख्यअतिथि पद्मश्री पुरस्कार विजेता प्रगतिशील किसान जगदीश प्रसाद पारीक थे। उन्होंने पृथ्वी को सुरक्षित रखने के लिए शत-प्रतिशत जैविक खेती की ओर अग्रसर होने का आह्वान किया। खेती के साथ पशुपालन करने तथा फलदार पौधे और मौसम आधारित सब्जियों का उत्पादन करते हुए किसानों की आय बढ़ाने की बात कही। उन्होंने कहा कि कृषि वैज्ञानिक किसानों को जैविक उत्पादन के लिए प्रेरित करें तथा इसके लिए आवश्यक मार्गदर्शन दें। उन्होंने बूंद-बूंद पानी की कीमत समझने और अत्याधुनिक तकनीक अपनाने का सुझाव दिया।
अध्यक्षता करते हुए स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विष्णु शर्मा ने कहा कि जिस गति से उत्पादन बढ़ा है,उसी गति से किसानों की आय बढ़े, इस दिशा में चिंतन करना चाहिए। कृषि वैज्ञानिक एवं विद्यार्थी अपनी ऊर्जा का समुचित उपयोग कृषि एवं कृषक कल्याण की दिशा में करें। खेती की नई तकनीकें इजाद करें तथा इन्हें किसानों तक पहुंचाएं।
राजुवास के पूर्व कुलपति प्रो. ए. के. गहलोत ने कहा कि वर्ष 2050 तक विश्व की जनसंख्या दस अरब के लगभग हो जाएगी। उस समय तक खेती योग्य भूमि तथा पानी की उपलब्धता बहुत कम रह जाएगी। ऐसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए खेती की योजना तैयार करने तथा इसका क्रियान्वयन करने की जरूरत है।
आयोजन सचिव तथा आइएबीएम निदेशक डाॅ. एन. के. शर्मा ने किसानों की आय में वृद्धि के प्रयास आज की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए उत्पादन के साथ ‘पोस्ट प्रोडक्शन आस्पेक्ट्स’ की ओर भी ध्यान देना होगा। उन्होंने दो दिवसीय सेमीनार की रूपरेखा पर प्रकाश डाला।
कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डाॅ. आई. पी. सिंह ने राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना के बारे में बताया। उन्होंने उत्पादों के मूल्य संवर्धन की जरूरत पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कृषि विद्यार्थी ‘जाॅब सीकर नहीं, जाॅव प्रोवाइडर’ बनें।
इससे पहले अतिथियों ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरूआत की। इस दौरान विश्वविद्यालय का कुलगीत प्रस्तुत किया गया। अतिथियों ने सेमीनार के ‘सोवेनियर एंड एबस्ट्रेक्ट’ का विमोचन किया। इस दौरान विश्वविद्यालय के कुलसचिव ताज मोहम्मद राठौड़, अटारी जोधपुर के निदेशक डाॅ. एस. के. सिंह, केन्द्रीय शुष्क बागवानी संस्थान के निदेशक डाॅ. पी. एल. सरोज, जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. एल. एन. हर्ष, प्रसार शिक्षा निदेशक डाॅ. एस. के. शर्मा, मिशन फार्मर साइंटिस्ट के महेन्द्र मधुप सहित विश्वविद्यालय के डीन-डायरेक्टर, कृषि वैज्ञानिक, विद्यार्थी तथा प्रगतिशील किसान मौजूद रहे। डाॅ. अदिति माथुर ने आभार जताया।
अतिथियों ने किया प्रदर्शनी का उद्घाटन
इस दौरान अतिथियों ने आइएबीएम परिसर में आयोजित प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। प्रदर्शनी में गृह विज्ञान महाविद्यालय द्वारा जैतून और बाजरे के उत्पादों की अतिथियों ने सराहना की। प्रसार शिक्षा निदेशालय द्वारा कृषि विज्ञान केन्द्रों की गतिविधियों के बारे में बताया गया। आइएबीएम द्वारा कृषि प्रबंधन से संबंधित तीन स्टाल लगाई गईं। वहीं मशरूम, जिंजर आदि के मूल्य संवर्धित उत्पादों की स्टाल आकर्षण का केन्द्र रहीं।






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ReplyDeleteI'm trying to find out if its a problem on my end or if it's the
blog. Any feed-back would be greatly appreciated.
Write more, thats all I have to say. Literally,
ReplyDeleteit seems as though you relied on the video to make your
point. You clearly know what youre talking about, why throw away your
intelligence on just posting videos to your blog when you could be giving us
something enlightening to read?