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सिंधी भाषा में तैयार होगी आयुर्विज्ञान की बृहत पारिभाषिक शब्दावली
डॉ.दीपा थदानी होंगी समन्वयक
सिंधी भाषा में तैयार होगी आयुर्विज्ञान की बृहत पारिभाषिक शब्दावली
डॉ.दीपा थदानी होंगी समन्वयक
अजमेर में होगा ऐतिहासिक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन
अजमेर, 29 अप्रैल
भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीन कार्यरत वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग (CSTT), नई दिल्ली द्वारा भारतीय भाषाओं में उच्च शिक्षा, चिकित्सा एवं तकनीकी ज्ञान को सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की जा रही है। इसी क्रम में 04 मई 2026 से 08 मई 2026 तक जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (JLN), अजमेर में बृहत पारिभाषिक शब्द संग्रह : आयुर्विज्ञान (अंग्रेजी–हिंदी–सिंधी) के निर्माण हेतु विशेषज्ञ सलाहकार समिति (EAC-1) की पांच दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला / बैठक आयोजित की जाएगी।
यह आयोजन राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उस संकल्प को साकार करेगा, जिसमें भारतीय भाषाओं में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया है। सिंधी भाषा में चिकित्सा शब्दावली का निर्माण देशभर के लाखों सिंधी भाषी विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।
देशभर के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ होंगे शामिल
बैठक में चिकित्सा विज्ञान एवं भाषा क्षेत्र के कई प्रतिष्ठित विशेषज्ञ भाग लेंगे। विषय विशेषज्ञों में डॉ. दीपा थदानी – वरिष्ठ प्रोफेसर, बायोकैमिस्ट्री, जेएलएन मेडिकल कॉलेज, अजमेर ,डॉ. कमलेश तनवानी – प्रोफेसर, बायोकैमिस्ट्री विभाग, जेएलएन मेडिकल कॉलेज, अजमेर डॉ. ज्योत्सना चांदवानी – सहायक प्रोफेसर, माइक्रोबायोलॉजी, जेएलएन मेडिकल कॉलेज, अजमेर ,डॉ. लाल थदानी – सेवानिवृत्त उपनिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, राजस्थान सरकार ,डॉ. महेंद्र खन्ना – सहायक प्रोफेसर, जेएलएन मेडिकल कॉलेज, अजमेर ,डॉ. जयराम रावतानी – वरिष्ठ प्रोफेसर, मारवाड़ मेडिकल यूनिवर्सिटी, जोधपुर ,डॉ. मनोहर गुरनानी – वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ, अजमेर ,डॉ. माया गुरनानी – स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, अजमेर डॉ. गुरुदास खिलनानी – पूर्व डीन, गुजरात अडानी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, भुज ,गुजरात
भाषा विशेषज्ञों में डॉ. चंदर प्रकाश दादलानी – विभागाध्यक्ष, सिंधी विभाग, एस.पी.सी. राजकीय पीजी कॉलेज, अजमेर ,डॉ. हासो दादलानी – सेवानिवृत्त प्रोफेसर, सिंधी विभाग, एस.पी.सी. राजकीय पीजी कॉलेज, अजमेर ,डॉ. परमेश्वरी पमनानी – सेवानिवृत्त एसोसिएट प्रोफेसर, सिंधी विभाग, एस.पी.सी. राजकीय पीजी कॉलेज, अजमेर तथा डॉ. जितेंद्र थदानी – एसोसिएट प्रोफेसर (संस्कृत), एस.पी.सी. राजकीय पीजी कॉलेज, अजमेर भाग लेंगें तथा सुरेश श्रीचंदानी – सिंधी (देवनागरी लिपि) डेटा विशेषज्ञ के रूप में भाग लेंगें
बैठक में राजस्थान, गुजरात सहित विभिन्न राज्यों से वरिष्ठ चिकित्सक, प्रोफेसर, आयुर्विज्ञान विशेषज्ञ, सिंधी भाषा विद्वान तथा डेटा विशेषज्ञ भाग लेंगे। इनमें बायोकैमिस्ट्री, माइक्रोबायोलॉजी, पीडियाट्रिक्स, गायनेकोलॉजी, फार्माकोलॉजी, मेडिसिन आदि क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल रहेंगे।
3000 तकनीकी अंग्रेजी -हिंदी शब्दों को मिलेगा सिंधी रूप
बैठक में आयुर्विज्ञान से संबंधित लगभग 40,700 शब्दों में से प्रथम चरण में लगभग 3,000 महत्वपूर्ण अंग्रेजी -हिंदी तकनीकी शब्दों के सिंधी पर्याय विकसित किए जाएंगे। इससे सिंधी भाषी विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों को अपनी मातृभाषा में गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री उपलब्ध हो सकेगी।
प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगा मंथन
विशेषज्ञ समिति प्रतिदिन सुबह 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक गहन विचार-विमर्श कर चिकित्सा विज्ञान के सिंधी मानक शब्द निर्धारित करेगी।
डॉ.दीपा थदानी होंगी समन्वयक
इस महत्वपूर्ण बैठक हेतु जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (JLN), अजमेर से डॉ. दीपा थदानी , वरिष्ठ प्रोफेसर (बायोकैमिस्ट्री), जेएलएन मेडिकल कॉलेज, अजमेर को बैठक समन्वयक नियुक्त किया गया है। वे कार्यशाला के पांचो दिवस में विषय विशेषज्ञ के साथ साथ कार्यशाला बैठक के सुचारू एवं सफल आयोजन हेतु समन्वयक(coordinator) का दायित्व का निर्वहन भी करेगी I
वहीं वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग, नई दिल्ली की ओर से आयुर्विज्ञान सिंधी शब्दावली निर्माण योजना के संपूर्ण देखरेख एवं संचालन के लिए श्री जय सिंह रावत, सहायक निदेशक को योजना प्रभारी अधिकारी (Officer-in-Charge) का दायित्व दिया गया है ,वे दिल्ली से भाग लेंगें I
भारतीय भाषाओं को मिलेगा नया आयाम/ भारतीय भाषाओं के विकास की दिशा में ऐतिहासिक कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रयास सिंधी भाषा के संरक्षण, संवर्धन और आधुनिक ज्ञान-विज्ञान से जोड़ने की दिशा में ऐतिहासिक सिद्ध होगा। इससे भारतीय भाषाओं में चिकित्सा शिक्षा को नई गति मिलेगी।
अजमेर के लिए गौरव का अवसर
राष्ट्रीय स्तर के इस आयोजन से अजमेर को शिक्षा, चिकित्सा एवं भाषा विकास के क्षेत्र में नई पहचान मिलेगी। यह कार्यशाला बैठक सिंधी भाषा के संरक्षण एवं आधुनिक ज्ञान-विज्ञान से जोड़ने की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। यह कार्यशाला न केवल सिंधी समाज बल्कि सम्पूर्ण देश के लिए गौरवपूर्ण पहल है।






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