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3 फरवरी 2026 मंगलवार
खबरों में बीकानेर
✒️@Mohan Thanvi
भव्य समारोहों तले दब गए कष्टदायी गड्ढ़े !
"सुख के सब साथी, दुःख में न कोई"
कहावतों के आइने 11
भव्य समारोहों तले दब गए कष्टदायी गड्ढ़े !
"सुख के सब साथी, दुःख में न कोई"
कहावतों के आइने 11
- मोहन थानवी
बीते दिनों सार्थक एवं जनहित के समारोह आयोजित कर देश ने विश्वभर में और बीकानेर ने प्रदेशभर में सुर्खियां बटोरी। वहीं, देश मे UGC (अब प्रकरण अदालत में ), प्रदेश में खेजड़ी तथा स्थानीय मीडिया और सोशल मीडिया पर चर्चा में शहर की बदहाल सड़कें और जगह-जगह चॉक सीवरेज की समस्याएं छाईं रही। अब आमजन उन कथित नेताओं की "आपके लिए हर समय तैयार" जैसी बातें याद कर रहे हैं । यूं बड़े-बडेरे कह गए हैं - "दर्द को भूलना और मिठास को याद रखना।" पूरोधाओं की इसी बात को मानते हुए देशवासी गणतंत्र दिवस पर प्रदर्शित राष्ट्र की उपलब्धियां तथा शहरवासी दीर्घावधि तक जिला कलेक्टर के सराहनीय प्रयास बच्चों के लिए आजू-गूजा, केंद्रीय मंत्री बीकानेर सांसद के मार्गदर्शन में समाज हित में भावना मेघवाल मेमोरियल ट्रस्ट का बीसवां सामूहिक विवाह सम्मेलन एवं दिव्यांगजनों तथा वरिष्ठजनों के लिए बड़ी राहत देने वाले सामाजिक अधिकारिता शिविर जैसे सार्थक बड़े भव्य समारोहों को याद रखेंगे। वाकई इन समारोहों ने बीकानेर का मान बढ़ाया, गौरवान्वित किया । इन सब के बावजूद जब तक पर्यावरण, पानी-बिजली, सड़क-सीवरेज संबंधित समस्याएं बनी रहेंगी तब तक दर्द टीस मारेगा ही। कहा भी तो जाता है - "सुख के सब साथी, दुःख में न कोई"। यूं भी आयोजकों को इतने अच्छे कार्यक्रमों के लिए "बाग-बाग होना" ही चाहिए लेकिन उन्हें "बड़ी मछली के आगे छोटी मछली का कोई अस्तित्व नहीं" को झुठलाने के काम भी करने चाहिए । वे बड़ी खुशी के सामने किसी पीड़ा को छोटी न मानें। जिम्मेदार वक्त पर UGC, खेजड़ी आदि को लेकर मूक दर्शक बने रहे। ये व्यापक और दूर तक परिणाम लाने वाली समस्याएं हैं, इनका समाधान वरीयता से सबसे पहले सामने आ जाए, ऐसी प्रार्थना हर कोई कर रहा होगा। केंद्रीय मंत्री और जिला कलेक्टर से शहर की समस्याएं छुपी नहीं हैं। बावजूद इसके, शहर समाधान की राह ताक रहा है। हालात यहां तक कि तुलसी सर्किल से अंबेडकर सर्किल के बीच पॉश कालोनी में बीते कई दिनों से गहराई सीवरेज समस्या का समाधान निकालने में सफलता न मिलने पर संबंधित ठेकेदार ने मोहल्लावासियों को पल्ला झाड़ते हुए कह दिया - यह मेरे बस का नहीं, मैंने संबंधित कंपनी को लिख दिया है । अब लोग रोष जताएंगे, धरना प्रदर्शन आजमाएंगे, या फिर विवशता में कहेंगे - चांद निकलने दीजिए, हम सब मिलकर देखेंगे।





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