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29 जनवरी 2026 गुरुवार
खबरों में बीकानेर
✒️@Mohan Thanvi
समस्याओं से दूरी क्यों बनाते हैं जिम्मेदार !
जाके पैर न फटी बिवाई, सो क्या जाने पीर पराई
समस्याओं से दूरी क्यों बनाते हैं जिम्मेदार !
जाके पैर न फटी बिवाई, सो क्या जाने पीर पराई
आम के आम, गुठलियों के भी दाम वसूलो भाई
- मोहन थानवी
कहावतों के आइने 10
विकसित होती जा रही टैक्नोलॉजी की देन AI के दुरुपयोग अब सामने आने लगे हैं। नुकसान की सूची भी जल्द लंबाई लेने न लग जाए इसलिए एआई के दुरूपयोग पर कड़ी कार्रवाई अपेक्षित है। संसाधनों का उपयोग आम के आम, गुठलियों के दाम की तर्ज पर होना सभी को लाभ पहुंचा सकता है, जबकि इसका दुरुपयोग करने वाले को भी अंततः परिणाम भुगतने पड़ते हैं। ऐसे लोगों को उस समय याद आता ही होगा - अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत। कतिपय अति उत्साही लोग अनजाने में ही तो चंद लोग एआई का दुरुपयोग सोशल मीडिया पर भ्रांतियां फैलाने में करने लगे हैं। ऐसा करना समय और संसाधनों का दुरुपयोग तो है ही, समाज के साथ विश्वासघात भी है। जिम्मेदारों को ऐसे लोगों पर कानून सम्मत कड़ी कार्रवाई के निर्देशों पर शीघ्रतातिशीघ्र कदम उठाने की अनिवार्यता सामने आ खड़ी हुई है।
निर्देश की बात चली है तो सोशल मीडिया पर समय गुजारने वाले जानते हैं कि इन दिनों सीएम की आवाज में भी निर्देश दिए जाने की कुछ पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। फेसबुक पर वायरल हो रही कुछ पोस्टों में कोई एक व्यक्ति एक मुख्यमंत्री की आवाज में फिल्मी स्टाइल से कभी शिक्षक से तो कभी डॉक्टर से उनकी अनियमितताओं का हवाला देते हुए चेतावनी देता है कि वह गलत काम ना करें। ऐसी पोस्ट का निश्चित रूप से ध्येय तो अच्छा है लेकिन इसके दूरगामी गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। इस तरह माननीयों की आवाज की नकल करके निर्देश देने की प्रवृति पनपना अच्छी बात कतई नहीं मानी जा सकती। इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी की आवाज में आधार कार्ड लाने पर सोना दिए जाने संबंधित पोस्ट भी वायरल हुई है। ऐसी भ्राति फैलाने वाली पोस्टों पर सरकार को, संबंधित विभाग को, जिम्मेदारों को संज्ञान लेते हुए शीघ्र कार्रवाई करनी चाहिए ।
इधर, उल्लेखनीय विकास तो शहरों का भी हो रहा है। हमारे विकसित होते जा रहे जिले और शहर में कुछ फाटक बंद होने पर चंद रास्तों को आंशिक बाधित करते रहते हैं। वहीं अमुक-अमुक रास्ते संकरे भी महसूस हो रहे हैं। ऐसी समस्या कमोबेश लगभग हर शहर में है। लेकिन शहरवासी इन समस्याओं के समाधान के प्रयासों में रत्ती भर भी कमी आने नहीं देते। जब तक सांस तब तक आस । उम्मीदों की छांव में जहाँ चाह वहाँ राह निकलेगी ही। इसके अलावा पहली बात, हम इन परेशानी भरे रास्तों से गुजरना बखूबी जानते हैं। क्योंकि हम समझते हैं - जब तक जीना तब तक सीना। दूसरी बात, संभवतया शहरवासियों की पीड़ा जानने-समझने वाले जिम्मेदारों, उनके अधीनस्थों और उनके परिवारों का अभी तक इन रास्तों से गुजरना हुआ ही नहीं। जाके पैर न फटी बिवाई, सो क्या जाने पीर पराई। तीसरी बात, फाटकों के दोनों तरफ दुकानों के बाहर तक सामान और खड़े वाहन कुछ जगह घेर लेते हैं । इस मसले पर स्थानीय स्तर पर दुकानदारों से समझाइश की गई है। लेकिन इससे फाटक-समस्या में कोई राहत मिलेगी, इस पर लोगों को संशय है । हां, अच्छी बात यह है कि एक दिन पूर्व ही संभागीय आयुक्त ने इस समस्या के समाधान के लिए कार्य प्रगति संबंधी निर्देश जरूर दिए हैं।
कंचन केसरी जयपुर 26 जनवरी 2026





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