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26 दिसंबर 2025 गुरुवार
खबरों में बीकानेर
✒️@Mohan Thanvi
बीकानेर में रिंग रोड... पानी में चांद का अक्स !!
कहावतों के आइने - 1
- मोहन थानवी
चांद निकलेगा तो दुनिया देखेगी
युगपक्ष और कंचन केसरी का धन्यवाद 🙏👇
अकस्मात कोई एक या बेशुमार घोषणाएं करना भी नेताओं की अजीब आदत है। नेता लोग जानते हैं कि आजकल जनता जागरूक हो गई है और गुजरे वक्त का हिसाब मांगने में देर नहीं लगाती। बावजूद इसके अक्सर नेताओं की तरफ से की जाने वाली मुनादियों में सुनाई दे जाता है, ये होगा, वो होगा। कुछ गैर नेताजन भी ऐसा करते हों तो बड़ी बात नहीं। अजीब बात तो यह भी है कि किसी काम के लिए नेता घोषणा करते हैं और उसके तुरंत बाद में सरकारी तंत्र के हवाले से भी ऐसा होगा, वैसा होगा की गूंज सुनाई देने लगती है। राजस्थानी अवाम को ऐसे बहुत से चांदों के अक्स बीते कुछ वर्षों में दिखाए गए जो फिलवक्त तक तो मरीचिका साबित हो रहे हैं। जैसे की इस 21वीं सदी के आरंभ से ही गूंज रहा राजस्थानी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने का मुद्दा। जैसे की बीकानेर में पानी निकासी, सफाई और सड़कों के नवीनीकरण के लिए 100 करोड़ का मुद्दा। बीते विधानसभा चुनाव से एक मुद्दा लगभग ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है और वह है राजस्थान में ₹500 में गैस सिलेंडर मिलने की घोषणा। इस मुद्दे में हमने शब्दों का जाल कई तरह से बुनते उधड़ते देखा। घोषणा के मुताबिक सीधे शब्दों में यह सिलेंडर सभी न्यून आय वर्ग के पात्र परिवारों को मिलना था। इसे उधेड़ कर फिर उज्ज्वला योजना से जोड़ा गया, इस वर्ग को तो पहले से अनुदान मिल रहा है । फिर यह भी सुनाई दिया कि जिन परिवारों को खाद्य सुरक्षा से जोड़ा गया है उन्हें यह लाभ मिलेगा लेकिन ऐसे अधिकांश परिवारों को आज तक तो ₹500 में गैस सिलेंडर नहीं मिला है । जबकि चालू वित्तीय वर्ष के आरंभ में अप्रैल तक उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से ऐसे परिवारों के राशन कार्ड अपडेट भी कर लिए गए थे, साथ ही गैस सिलेंडर संबंधित कागजात भी अपडेट हुए थे। इसी कड़ी में विधानसभा चुनाव से पहले तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने सामाजिक सुरक्षा से जुड़े पात्र व्यक्तियों को सहायता राशि ₹1000 कर 15% वार्षिक वृद्धि की दर से भुगतान की घोषणा की थी। जिसे उदारमना भाजपा ने अपनी सरकार बनने पर लागू भी कर दिया लेकिन दूसरी वार्षिक वृद्धि के पहले ही अब 15% के स्थान पर ₹100 की वृद्धि प्रस्तावित किए जाने की चर्चा सामने आ रही है। सिलसिला यहीं थमता है नहीं लगता। हाल ही में ठहरे हुए पानी में चांद का अक्स दिखाकर केंद्रीय मंत्री ने बीकानेर में रिंग रोड बनाने की प्रक्रिया शुरू करने संबंधित बात भी उछाल दी है। इसके अलावा इन दिनों में बीकानेर में पानी निकासी के लिए रिंग रोड की तर्ज पर रिंग नालों संबंधित प्रोजेक्ट की चर्चा भी तेजी से जोर पकड़ने लगी है। चर्चा है कि करोड़ों के इस प्रोजेक्ट से सूरसागर पुरानी गिनानी से लेकर प्रस्तावित नाले कवर होने वाले रिंग-नाला क्षेत्रों में बरसाती पानी के ठहराव की धीर-गंभीर समस्या से निजात मिल सकेगी। ऐसे कितने ही और चांद हैं जिन्हें बीकानेर की जनता निकलता हुआ देखना चाहती है। जैसे की बाजारों में महिलाओं की सुविधा के लिए पिंक वाहनों का उपलब्ध रहना। जैसे की रेल फाटकों की ज्वलंत समस्या का समाधान । जैसे की सूरसागर को विकसित पर्यटक स्थल के रूप में ख्याति मिलना। ईश्वर करे ऐसे चांद शीघ्र निकले और शहर को हम चांदनी में नहाता देखें। फिलहाल तो शहर वासी ठंडी सांस भरते हुए ऐसा कहते मिल जाते हैं कि चांद निकलेगा तो दुनिया देखेगी।






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