बीकानेर में प्रथम व्योम केंद्र का उद्घाटन डूंगर कॉलेज में हुआ
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25 जुलाई 2025 शुक्रवार
खबरों में बीकानेर
✒️@Mohan Thanvi
बीकानेर में प्रथम व्योम केंद्र का उद्घाटन डूंगर कॉलेज में हुआ
बीकानेर, 25 जुलाई 2025 शुक्रवार
राजकीय डूंगर महाविद्यालय, बीकानेर में प्रथम व्योम [विवेकानंद युवा अभिमुखीकरण एवं (राष्ट्रीय) जागृति हेतु प्रेरणा केंद्र] का उद्घाटन नव पुनर्निर्मित व्योम हॉल में प्रो. आर.के. पुरोहित, प्राचार्य राजकीय डूंगर महाविद्यालय, मुख्य अतिथि प्रो. मनोज दीक्षित, कुलपति, एमजीएसयू, बीकानेर, विशिष्ट अतिथि स्वामी विमर्शानंद गिरि महाराज, अधिष्ठाता शिवबाड़ी मठ लालेश्वर महादेव मंदिर शिवबाड़ी, बीकानेर और विशिष्ट अतिथि टेकचंद बरडिया बीकानेर विभाग संघचालक बीकानेर द्वारा किया गया।
प्रो. दिव्या जोशी, समन्वयक व्योम ने अपने संकल्पना पत्र में केंद्र के महत्व को समझाया। उन्होंने व्योम के चार उद्देश्यों का वर्णन इस प्रकार किया - प्रेरित युवाओं की एक पीढ़ी का निर्माण, सामाजिक-सांस्कृतिक उन्नति को बढ़ावा देना, पारंपरिक विरासत को पुनर्जीवित और संरक्षित करना और स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं का प्रसार करना।
प्राचार्य प्रो. आर.के. पुरोहित ने स्वागत भाषण दिया और व्योम की संरचना के बारे में बताया। उन्होंने यह भी बताया कि छात्रों और संकाय सदस्यों की निरंतर माँग के कारण इस केंद्र की स्थापना की गई थी। आज संस्थागत विकास के लिए व्योम हॉल, लोगो और विवेकानंद की प्रतिमा का विमोचन किया गया। उन्होंने आगे कहा कि इस केंद्र में छात्रों के समग्र विकास के लिए बुनियादी ढाँचा और उन्नत शिक्षण उपकरण उपलब्ध हैं।
मुख्य अतिथि प्रो. मनोज दीक्षित, कुलपति, एमजीएसयू ने स्वामी विवेकानंदजी द्वारा विश्व भर में प्रदान की गई शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने रोचक उदाहरणों के साथ स्वामीजी द्वारा प्रदान किए गए शैक्षिक विचारों पर ज़ोर दिया और इन सभी को वर्तमान शिक्षा प्रणाली से भी जोड़ा। उन्होंने अमेरिका में दिए गए स्वामी विवेकानंदजी के महान भाषण के शैक्षिक और सांस्कृतिक अर्थ को भी समझाया।
स्वामी विमर्शानंद गिरि महाराज ने स्वामी विवेकानंद के विचारों से आध्यात्मिकता के अनुमोदन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने वर्तमान जीवन के सहज दृष्टिकोण के लिए धार्मिक सशक्तिकरण की उपयुक्तता पर बल दिया।
टेकचंद बरडिया, बीकानेर विभाग संघचालक, बीकानेर ने स्वामी विवेकानंदजी के विचारों से सांस्कृतिक विकास की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने अपने विचार-विमर्श में कहा कि भारतीय संस्कृति विश्व में सबसे समृद्ध है और इससे प्रेरित हमारे विचार ही भारत एकीकरण का एकमात्र मार्ग हैं। उन्होंने स्वामी विवेकानंदजी द्वारा दी गई भाई-बहन की अवधारणा पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में अतिथियों का अभिनंदन प्रोफेसर विक्रमजीत, प्रोफेसर देवेश खंडेलवाल, प्रोफेसर अनिला पुरोहित, प्रोफेसर अन्नाराम और प्रोफेसर स्मिता जैन, प्रोफेसर सुमित्रा चरण, प्रोफेसर साधना भंडारी ने किया।
उद्घाटन कार्यक्रम में पूर्व प्राचार्य डॉ. कृष्णा राठौड़ तोमर और डॉ. पंकज जैन (प्राचार्य बीजेएस रामपुरिया कॉलेज) सहित कार्यक्रम में 100 से अधिक विद्यार्थी और संकाय सदस्य उपस्थित थे। तकनीकी सहयोग प्रो. संदीप यादव और डॉ. रामनिवास ने प्रदान किया। लॉजिस्टिक सहयोग डॉ. अर्चना पुरोहित और डॉ. सुनीता मंडा ने प्रदान किया। हॉल का प्रबंधन प्रो. सुखाराम, डॉ. केसरमल और डॉ. संपतलाल भादू ने किया।
प्रो. नरेंद्र भोजक ने मंच से कार्यक्रम का संचालन किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. निर्मल रांकावत ने किया।






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