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विवाह : भवनों पर टैक्स की मार नहीं सहेगा बीकानेर - राठी
बीकानेर, 19 फरवरी। सामाजिक संस्थाओं द्वारा संचालित भवनों एवं विवाह स्थलों के उपयोग एवं उपभोग कर वसूली के संबंध में निगम आयुक्त से मिलें - जुगल राठी
राठी ने कहा नए नियमों में हो संशोधन
बीकानेर नगर निगम द्वारा नई उपविधियां - 2010 नियम लागू करने में सामाजिक संस्थाओं व दानदाताओं द्वारा निर्मित भवनों एवं विवाह स्थलों को नियमों की दरों में कटौती करने एवं इन भवनों को अलग श्रेणी में रखने की मांग को रखते हुए निगम आयुक्त को ज्ञापन सौंपा। इस अवसर पर बीकानेर व्यापार उद्योग मण्डल के अध्यक्ष जुगल राठी ने निगम आयुक्त को बताया कि यह सभी भवन एवं विवाह स्थल सामाजिक सरोकार व समरसता की दृष्टि संचलित होते है। इनका उद्देश्य समाज कल्याण है ना कि धनार्जन करना। निगम द्वारा नए नियमों के अन्तर्गत इन भवनों व वाणिज्यिक स्थलों को एक श्रेणी में रखा गया है जो कि सही नही है। सामाजिक भवनों में कई भवन ऐसे है जिन्हें कन्या विवाह एवं अन्य धार्मिक कार्यक्रमों के लिए निशुल्क उपयोग में लिया जाता है, तो दरें एक जैसी क्यों ? बिन्दुवार ज्ञापन में बताया कि:-
1. बीकानेर नगर निगम में फरवरी 2014 को तत्कालीन महापौर की अध्यक्षता में गठित कमेटी द्वारा उपयोग एवं उपभोग कर 4 रू. प्रति वर्ग मीटर निर्धारित किया गया था।
2. ऐसा ज्ञात होता है कि राजस्थान सरकार द्वारा वर्ष 2017 से इस कर को 20 रू प्रति वर्ग मीटर कर दिया गया है। बीकानेर नगर निगम द्वारा एक साथ इतना कर बढाना उचित प्रतीत नही होता है। यह भार मध्यमवर्गीय परिवार पर बढ़ेगा।
3. आज भी सर्वे कराया जावे तो 80 प्रतिशत लोगो द्वारा सरकार द्वारा निर्मित सामुदायिक भवन एवं ट्रस्ट द्वारा संचालित भवन में विवाह सम्पन्न किया जाता है।
4. नगर निगम द्वारा नगरीय विका कर कॉमर्शियल दर से वसूला जाता है। इसके अलावा उपभोग एवं उपयोग कर 20 रूपये प्रति वर्ग मीटर से वसूलने का प्रावधान है। दोनों कर एक साथ वसूल करना न्यायोचित नही लगता है। नगरीय विकास आवासीय दर से वसूल होना चाहिये। क्योंकि उपयोग एवं उपभोग कर अलग से वसूला जाता है।
5. विवाह स्थलों का उपयोग एक वर्ष में अधिक से अधिक 40 दिनों तक ही होता है।
6. विवाह स्थलों पर शादी होने पर यह एक मानव शक्ति के रोजगार का मुख्य केन्द्र बन गया है। रोजगार उपलब्ध करवाना सरकार का मुख्य दायित्व है लेकिन सरकार ने राजस्व वसूली का जरिया बना रखा है।
7. ये समस्त भवन एवं विवाह स्थल किसी न किसी समाज के भामाशाहों द्वारा संचालित है।
8. ये समस्त भवन एवं विवाह स्थल सामाजिक सरोकार के लिए है ना कि इनका उद्देश्य लाभ अर्जित करना है।
9. विवाह स्थलों एवं भवनों का उपयोग मुख्यतः मध्यमवर्गीय परिवार करता है। यदि उपयोग एवं उपभोग कर अधिक बढ़ाया जाएगा तो इसका भार मध्यमवर्गीय परिवार पर ही पड़ेगा।
10. ये समस्त भवन और विवाह स्थल काफी वर्षाें से चले आ रहे है फिर भी इनकी आर्थिक स्थिति में सुदृढ नही हुई है, क्योंकि सामाजिक सरोकार में ये अग्रणी पंक्ति में रहते है।
11. मुझे व्यक्तिगत रूप से ज्ञात है बीकानेर भवनों और विवाह स्थल में बहुत से भवन कन्या विवाह में निशुल्क या न्यूनतम शुल्क लेतेे हैं। लेकिन मुझे भय है कि कर का भार बढने यह सुविधा बन्द ना हो जाए।
इस अवसर पर शोभासर बदरासर इंडस्ट्रीज डवलपमेंट सोसाइटी के मघाराम गोदारा और विजय बाफना उपस्थित थे।
बीकानेर, 19 फरवरी। सामाजिक संस्थाओं द्वारा संचालित भवनों एवं विवाह स्थलों के उपयोग एवं उपभोग कर वसूली के संबंध में निगम आयुक्त से मिलें - जुगल राठी
राठी ने कहा नए नियमों में हो संशोधन
बीकानेर नगर निगम द्वारा नई उपविधियां - 2010 नियम लागू करने में सामाजिक संस्थाओं व दानदाताओं द्वारा निर्मित भवनों एवं विवाह स्थलों को नियमों की दरों में कटौती करने एवं इन भवनों को अलग श्रेणी में रखने की मांग को रखते हुए निगम आयुक्त को ज्ञापन सौंपा। इस अवसर पर बीकानेर व्यापार उद्योग मण्डल के अध्यक्ष जुगल राठी ने निगम आयुक्त को बताया कि यह सभी भवन एवं विवाह स्थल सामाजिक सरोकार व समरसता की दृष्टि संचलित होते है। इनका उद्देश्य समाज कल्याण है ना कि धनार्जन करना। निगम द्वारा नए नियमों के अन्तर्गत इन भवनों व वाणिज्यिक स्थलों को एक श्रेणी में रखा गया है जो कि सही नही है। सामाजिक भवनों में कई भवन ऐसे है जिन्हें कन्या विवाह एवं अन्य धार्मिक कार्यक्रमों के लिए निशुल्क उपयोग में लिया जाता है, तो दरें एक जैसी क्यों ? बिन्दुवार ज्ञापन में बताया कि:-
1. बीकानेर नगर निगम में फरवरी 2014 को तत्कालीन महापौर की अध्यक्षता में गठित कमेटी द्वारा उपयोग एवं उपभोग कर 4 रू. प्रति वर्ग मीटर निर्धारित किया गया था।
2. ऐसा ज्ञात होता है कि राजस्थान सरकार द्वारा वर्ष 2017 से इस कर को 20 रू प्रति वर्ग मीटर कर दिया गया है। बीकानेर नगर निगम द्वारा एक साथ इतना कर बढाना उचित प्रतीत नही होता है। यह भार मध्यमवर्गीय परिवार पर बढ़ेगा।
3. आज भी सर्वे कराया जावे तो 80 प्रतिशत लोगो द्वारा सरकार द्वारा निर्मित सामुदायिक भवन एवं ट्रस्ट द्वारा संचालित भवन में विवाह सम्पन्न किया जाता है।
4. नगर निगम द्वारा नगरीय विका कर कॉमर्शियल दर से वसूला जाता है। इसके अलावा उपभोग एवं उपयोग कर 20 रूपये प्रति वर्ग मीटर से वसूलने का प्रावधान है। दोनों कर एक साथ वसूल करना न्यायोचित नही लगता है। नगरीय विकास आवासीय दर से वसूल होना चाहिये। क्योंकि उपयोग एवं उपभोग कर अलग से वसूला जाता है।
5. विवाह स्थलों का उपयोग एक वर्ष में अधिक से अधिक 40 दिनों तक ही होता है।
6. विवाह स्थलों पर शादी होने पर यह एक मानव शक्ति के रोजगार का मुख्य केन्द्र बन गया है। रोजगार उपलब्ध करवाना सरकार का मुख्य दायित्व है लेकिन सरकार ने राजस्व वसूली का जरिया बना रखा है।
7. ये समस्त भवन एवं विवाह स्थल किसी न किसी समाज के भामाशाहों द्वारा संचालित है।
8. ये समस्त भवन एवं विवाह स्थल सामाजिक सरोकार के लिए है ना कि इनका उद्देश्य लाभ अर्जित करना है।
9. विवाह स्थलों एवं भवनों का उपयोग मुख्यतः मध्यमवर्गीय परिवार करता है। यदि उपयोग एवं उपभोग कर अधिक बढ़ाया जाएगा तो इसका भार मध्यमवर्गीय परिवार पर ही पड़ेगा।
10. ये समस्त भवन और विवाह स्थल काफी वर्षाें से चले आ रहे है फिर भी इनकी आर्थिक स्थिति में सुदृढ नही हुई है, क्योंकि सामाजिक सरोकार में ये अग्रणी पंक्ति में रहते है।
11. मुझे व्यक्तिगत रूप से ज्ञात है बीकानेर भवनों और विवाह स्थल में बहुत से भवन कन्या विवाह में निशुल्क या न्यूनतम शुल्क लेतेे हैं। लेकिन मुझे भय है कि कर का भार बढने यह सुविधा बन्द ना हो जाए।
इस अवसर पर शोभासर बदरासर इंडस्ट्रीज डवलपमेंट सोसाइटी के मघाराम गोदारा और विजय बाफना उपस्थित थे।






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