संस्कारविहीन हो रही शिक्षा पर चिंता, आचार्य सम्मेलन में जुटे विद्वजन
बालकों को शिक्षा के उच्चतम स्तर के साथ साथ नैतिक रूप से संस्कारित करना लक्ष्य
शिक्षा के क्षेत्र में विद्या भारती की विशिष्ठ भूमिका अमोलकराम ज्याणी -
बीकानेर
गंगाशहर स्थित आदर्श विद्या मंदिर में 3 दिवसीय आचार्य सम्मेलन का उद्घाटन समारोह आयोजित हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ मंचस्थ अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर किया ।
जिला सचिव प्रवीण कुमार शारदा ने बताया कि इस प्रशिक्षण वर्ग में बीकानेर एवम् नागौर जिले के 392 आचार्य आचार्या, सेवा कर्मचारी, वाहन चालक इत्यादि उपस्थित रहेंगे।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता अमोलक राम ने बताया कि विद्या भारती विद्यालयों की स्थापना एक विशिष्ठ उद्देश्य को लेकर की गई है जिसमे बालकों को शिक्षा के उच्चतम स्तर के साथ साथ नैतिक रूप से इतना संस्कारित करना है जो नए भारत का निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।
उन्होंने बताया कि आज जिस प्रकार से शिक्षा को संस्कारविहीन बनाया जा रहा है जिसके कारण युवा पीढ़ी अपनी दिशा से भटक रही है ।
विद्या भारती अपने आधारभूत विषयों के माध्यम से इन सभी को प्रयासपूर्वक ठीक करने के कार्य में लगी है। उन्होंने कहा कि आचार्य अपने व्यवहार से बालक को सिखाता है अतरू आचार्य की भूमिका बालक के जीवन ने अत्यधिक महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि बालकों को भारत के गौरवमयी इतिहास, संस्कृति, धरोहर, परंपरा को बताना चाहिए जिससे बालकों को परिवार परंपरा और अपने धर्म संस्कृति के प्रति गौरव का अनुभव होगा। इस अवसर पर बीकानेर जिला सचिव प्रवीण कुमार जी शारदा ने अतिथियों का परिचय करवाया।
इस अवसर पर प्रबंध समिति अध्यक्ष श्री मेघराज बोथरा, अखिल भारतीय पर्यावरण संयोजक श्री देरामाराम जी नागौर जिला सचिव श्री रामसिंह जी, जिला संस्कार केंद्र प्रमुख श्री रामसुखलाल जी मूलचंद जी तावनिया, आशीष डागा, बीकानेर और नागौर जिले के प्रधानाचार्य, आचार्य, सेवा कर्मचारी, वाहन चालक इत्यादि उपस्थित रहे ।





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