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राष्ट्रीय कवि संगम का हुआ पुस्तक लोकार्पण व मिनी कवि सम्मेलन
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भीलवाड़ा,30 अक्टूबर। राष्ट्रीय कवि संगम की भीलवाड़ा शाखा द्वारा शुक्रवार को वरिष्ठ नागरिक भवन में डॉ महावीर प्रसाद जोशी की तीन पुस्तकों का लोकार्पण एवं मिनी कवि सम्मेलन हुआ। मुख्य अतिथि वरिष्ठ कवि राजेंद्रगोपाल व्यास थे,विशिष्ट अतिथि डॉ रविकांत सनाढ्य,बंशी पारस व सत्येंद्र मण्डेला थे एवं अध्यक्षता महेंद्र शर्मा ने की। सरस्वती वंदना लाजवंती शर्मा ने की व समारोह का खूबसूरत संचालन जयप्रकाश भाटिया सागर ने किया। उससे पूर्व सभी अतिथियों को माला,उपरणा पहनाकर व प्रतीक-चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
जिला प्रवक्ता व मीडिया प्रभारी डॉ एसके लोहानी बताया कि पहले सत्र में डॉ महावीर प्रसाद जोशी के तीन काव्यसंग्रहों 'श्वेत काव्य', 'किशोर प्राश' एवं 'बाल कलेवा' का लोकार्पण किया गया। डॉ जोशी ने इन कृतियों की भूमिका,महत्व एवं उपादेयता पर प्रकाश डाला। फिर सभी अतिथियों ने उनकी काव्यमय समीक्षा की और डॉ जोशी के साहित्य में योगदान को सराहा। डॉ उमेश बंसल ने भी सम्बोधित किया।
दूसरे सत्र में संस्था की तीसरी काव्यगोष्ठी मिनी कवि सम्मेलन के रूप में हुई। इसमें अध्यक्ष महेंद्र शर्मा,मुख्य अतिथि मुरलीधर व्यास,विशिष्ट अतिथि बालकृष्ण जोशी 'बीरा',डॉ महावीरप्रसाद जोशी व राधेश्याम शर्मा थे। सर्वप्रथम डॉ जोशी ने काव्यपाठ किया "भूलकर भी देखा भूल नहीं पाए,चांद तारों की महफ़िल में सूर्य पधारे हैं", फिर बंशी पारस ने "जो लोगों हिन्दू-मुस्लिम के नाम पर लडाते हैं,या रब उन सबको कोरोना हो जाए", ओम उज्जवल ने "जगमग दीप जलें रोज मने दीवाली", लाजवंती शर्मा ने "मुसीबत में भी जो मुस्कुराये सही इंसान वही होता है", श्यामसुन्दर तिवाडी ने "दीपमालिका के दीपोँ ने चहुंओर कर दिया उजाला", जयप्रकाश भाटिया ने "गीत और छंद हमारे लिए हैं,सारे प्रतिबंध हमारे लिए हैं", रंजनासिंह चाहर ने मान करे सम्मान करे और घर को स्वर्ग बनाती है बेटी", नरेन्द्र वर्मा ने "अँधियारे में राह खोज खुद दीप जलाना होगा", राधेश्याम शर्मा ने "देश रक्षा में पिपली रो फूल प्यारो अधखिल्यो मुरझा गयो", डॉ एसके लोहानी खालिस ने "ऑक्सीजन तुम्हारे प्यार की दिल पाता है दोस्तों,ये दिल तुम्हारे प्यार के बल जिंदा है दोस्तों", गुलाब मीरचंदानी ने "प्रेमचंद कालजयी कथाकार हैं,सादगी उनके चिंतन का आधार है", डॉ रविकांत सनाढ्य ने "ज्ञान की लौ तुम जला दो", अरुण अजीब ने मेरे मुरझाए कमल का दिल खिल गया", सत्येंद्र मण्डेला ने "आओगे तुम प्रिये घर मेरे तो कभी,बस यही एक सपन बाकी है", बालकृष्ण बीरा ने "शिद्दत से हर रिश्ता निभाउं,आपका अपना मैं कहलाउं", मुरलीधर व्यास ने "शब्द ब्रह्म है इस रहस्य को हिंदी से ही जाना", महेद्र शर्मा ने "माया के इस मोहजाल से निकल गई तो सुख जाएगी,बोल जिंदगी किधर जाएगी" और राजेंद्रगोपाल व्यास ने "सुरों के फूल तरन्नुम के हार लाए हैं,हम अपने साथ गज़ल की बहार लाए हैं" जैसी एक बढकर एक रचनाएँ पढकर इस मिनी कवि सम्मेलन को सार्थक सिद्ध किया। योगेन्द्र सक्सेना व ताराचंद खेतावत ने भी काव्यपाठ किया।
इस अवसर पर रजनीकांत आचार्य,डॉ कालूसिंह चुंडावत,रूपाली शर्मा,डॉ जोशी के सभी परिजन एवं कई प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित थे।
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