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लोक मान्यता राजस्थानी भाषा का प्राण तत्व है - मालवीय
रोटरी राज्य स्तरीय राजस्थानी भाषा पुरस्कार समारोह सम्पन्न, साहित्यकारों को किया पुरस्कृत
रोटरी क्लब बीकानेर का राज्य स्तरीय राजस्थानी भाषा पुरस्कार समारोह शनिवार को रोटरी भवन में सम्पन्न हुआ। समारोह में क्लब द्वारा प्रतिवर्ष दिये जाने वाले राजस्थानी भाषा साहित्य के वर्ष 2020-21 व 2021-22 के चयनित साहित्यकारों को पुरस्कारों से समादृत किया गया। कार्यक्रम अध्यक्ष प्रांतपाल रोटे. संजय मालवीय ने सम्बोधन करते हुए कहा कि जब किसी को आमजन स्वीकार कर लेता है तो फिर शासकीय स्वीकृति महज औपचारिकता रह जाती है। राजस्थानी भाषा का मामला भी ऐसा ही है। लोकमान्यता राजस्थानी का प्राण तत्व है और इसीके बलबुते पर यह देशकाल और समाज में अपनी समृद्धि बनाये हुए है।
विशिष्ट अतिथि जनप्रिय कवि सरल विशारद ने राजस्थानी साहित्य की समृद्ध परंपरा को रेखांकित करते हुए कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की रोटरी जैसी संस्था जब किसी भाषा व उसमें रचित साहित्य का मान व सम्मान करती है तो यह एक प्रकार से राजस्थानी भाषा को अन्तर्राष्ट्रीय स्वीकृति व मान्यता ही है। विशारद ने अनेक उद्धरणों व प्रसंगों का जिक्र करते हुए भाषा की लोक स्वीकृति को कालजीवी माना।
पूर्व प्रांतपाल व समारोह संयोजक रोटे. अरुण प्रकाश गुप्ता ने स्वागत भाषण करते हुए आयोजन की रूपरेखा साझा की और कहा कि मातृ भाषा का कोई विकल्प नहीं है। व्यक्ति की संस्कृति व संस्कार की समग्र दृष्टि अपनी मातृ भाषा से ही पुष्पित व पल्लवित होती है। इसी आधार सत्य को स्वीकारते हुए रोटरी क्लब बीकानेर विगत 6 वर्षों से राजस्थानी साहित्य पुरस्कार, वाद-विवाद प्रतियोगिताएं, कवि सम्मेलन और लोक कलाआंे का प्रदर्शन आदि करवाती रही है। गत वर्ष कोरोना महामारी के कारण आयोजन संभव नहीं हो पाया था इसलिए इस वर्ष दो वर्षों के पुरस्कार एक साथ अर्पित किये जा रहे हैं।
रोटरी क्लब सचिव रोटे प्रवीण गुुप्ता ने बताया कि श्री लक्ष्मणदान कविया, खैण और श्री देवकिशन राजपुरोहित, चम्पाखेड़ी को उनके समग्र राजस्थानी साहित्यिक अवदान के लिए 51000/- रुपये का ‘कला-डूंगर कल्याणी राजस्थानी शिखर पुरस्कार, श्री मदनगोपाल लढा, महाजन और श्रीमती किरण राजपुरोहित ‘नितिला’, जोधपुर को 21000/- रुपये का ‘खींवराज-मुन्नीलाल सोनी राजस्थानी गद्य पुरस्कार’, तथा मोनिका गौड, बीकानेर व सत्यदेव संवितेन्द्र, जोधपुर को 11000/- रुपये का ‘बृज-उर्मी अग्रवाल राजस्थानी पद्य पुरस्कार अर्पित किये गये।
पुरस्कृत साहित्यकार लक्ष्मणदान कविया ने रोटरी के इस भाषायी विकास प्रयास को स्तुत्य व अनुकरणी बताया। साहित्यकार देवकिशन राजपुरोहित ने इस तरह उपक्रमों को राजस्थानी भाषा, संस्कृति, संस्कार और साहित्य के लिए एक अभिनव और बेहद जरुरी प्रयास बताया।
इससे पूर्व मनीषा आर्य सोनी, रवि पुरोहित, राजुराम बिजारणिया, सुधा सारस्वत, शंकरसिंह राजपुरोहित व बुलाकी शर्मा ने पुरस्कृत साहित्यकारों का परिचय साझा किया। रोटेरियन किशोरसिंह राजपुरोहित के संचालन में हुए समारोह में रोटे राजेश चुरा, रोटे. विजय हर्ष, रोटे. सुनील गुप्ता, एसजी सोनी, मनमोहन कल्याणी, पृथ्वीराज रतनू, डॉ. गौरी शंकर प्रजापत, नमामि शंकर आचार्य, नीरज दईया, कमल रंगा, अजय जोशी, नीलम कल्याणी, नयनतारा छलाली, शुक्ला बाला पुरोहित, मंजु सारस्वत, डॉ. कृष्णलाल बिश्नोई, रोटे शशि मोहन मुंधड़ा, सत्यनारायण राजपुरोहित ‘राजस्थानी’ सहित अनेक साहित्यकार एवं समाजसेवी उपस्थित रहे।
आभार ज्ञापन रोटरी क्लब बीकानेर के अध्यक्ष रोटे दिनेश आचार्य ने किया।



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