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कोरोनाकाल की 25वीं काव्यसंध्या हुई,3 कवि सम्मानित
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भीलवाड़ा,25 अक्टूबर। नवमानव सृजनशील चेतना समिति की ओर से कोरोनाकाल की 25वीं एवं 2021 की 10वीं काव्यसंध्या रविवार को भदादा बाग के पीछे स्थित ओशो सुरधाम ध्यान केंद्र में विश्व रक्तदान/शाकाहार/अहिंसा/शिक्षक/विद्यार्थी/खाद्य/संकल्प दिवस,नवरात्र/दुर्गापूजा/ विजयादशमी,महर्षि वाल्मीकि/गुरु रामदास/गाँधी/शास्त्री/सरदार पटेल जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित की गई। काव्यसंध्या की अध्यक्षता व संचालन डॉ एसके लोहानी खालिस ने की,मुख्य अतिथि राधेश्याम गर्ग अभिनव थे जिन्होंने मधुर सरस्वती वंदना भी की एवं विशिष्ट अतिथि लाजवंती शर्मा थीं।
महासचिव कविता लोहानी ने बताया कि काव्यसंध्या का शुभारंभ डॉ एसके लोहानी खालिस ने "मनुज तन प्रभु का भव्य मंदिर है,अखण्ड दीया जलता अंदर है,दिल है वो दीया बुझता नहीं,दिल तन का अंग सबसे सुंदर है", "मानवता के विरुद्ध मानव ने घोर अपराध किया,लाखों लोगों को मृत्यु का दण्ड निरपराध दिया" एवं "भले हम योगदान ना करें शांति स्थापना में,बस अशांति ना फैलाएं सब शांत रह पायेंगे" जैसी कविताओं से उत्साहपूर्ण वातावरण बनाया। फिर बंशी पारस ने "है अंधेरे की बुरी नजर रौशनी की लाज पर,इसलिए जरूरी है दोस्त आज दीवाली मनाना", ताराचंद खेतावत ने "मुक्तसर मेरे इश्क की कहानी है,मेरा तो सूफियाना तेरा तालिबानी है", डॉ महावीर प्रसाद जोशी ने "चांद चांद को पूज रही,जमीं आसमां की दूरी है,धवल चाँदनी छनकर आए,एक छलनी बहुत जरूरी है", नरेन्द्र वर्मा ने "जीवन करवा चौथ सा बीता निर्जल निराहार,ना क्षितिज पर उदिता ना शेष रहा पूजा आधार", गुलाब मीरचंदानी ने "करवा चौथ,देखो चाँद उतरा,थाली में आज" जैसी कई हाईकू व गीत "बात कोई मेरी सुनना चाहे तो मैं कहूँ,दिल में वेदना है जो खुलकर कहूँ", लाजवंती शर्मा ने "भूल हुई तो माफ कराइजो,हिय सूं म्हारे मति जाइजो,हाथ जोड़ अरदास करां,थोडो म्हारो मान रखाइजो", रंजनासिंह चाहर ने "तुम मेरे सूरज तुम चांद मेरे,तुम मेरे जीवन की हर खुशी हो", श्यामसुन्दर तिवाडी मधुप ने दोहे "रक्तदान महादान है खुलकर दिजीये आप,तनिक मिले सहयोग से धुल जाते हैं पाप", ओम उज्जवल ने "जन्म दिया है माँ ने मुझको पिता ने मुझको पाला,काली-काली-सी मिट्टी में इक सुन्दर सांचा ढाला", नारायण भदाला ने "झूम-झूम झपाक लाड़ू खाओ लपाक,यो देसी घी को चूरमो जो खा लेवे सो सूरमो", सतीश व्यास आस ने "अना की धुंध में रिश्ते सारे खो गए,सियासत में जो आए बीज नफरतों के बो गए", अरुण अजीब ने "सौ-सौ आंसू पिए खून के संग गुड़िया दफन बेटियां,ओढ़कर नींद में सो गईं ख्वाहिशों का कफन बेटियां", दीपक पारीक ने "कुछ लोग अधर में झूल गए,हम दूध जलेबी भूल गए,नमकीन बड़ी मजबूर हुई,हाँ चाट-पकौड़ी दूर हुई", महेंद्र शर्मा ने "नारी रही समर्पित फिर भी पुरुषों का पुरुषार्थ कलंकित,दाग चंद्रमा में है पर तू पावन और पुनीत चाँदनी" एवं राधेश्याम गर्ग अभिनव ने "पुनीत पर्व राम का त्यौहार है दीपावली,तन-मन-धन से मना कह रही है दीपावली" सरीखी एक से बढ़कर एक रचनाएँ सुनाकर त्यौहारों के मौसम में खुशियों का विस्तार कर दिया।
काव्यसंध्या के श्रेष्ठ रचनाकार के रूप में इस बार दो कवियों राधेश्याम गर्ग अभिनव एवं श्यामसुन्दर तिवाडी को संस्था की ओर से उपरणा,मोतीमाला पहनाकर एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। 'समरस साहित्य संस्थान' के मुकेश कुमार व्यास स्नेहिल द्वारा डॉ एसके लोहानी खालिस को फेसबुक लाइव पर 23 अक्टूबर को शानदार एकल काव्यपाठ के लिए "समरस श्री सम्मान" एवं 'संकल्प' साहित्य संस्थान द्वारा भी प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया। साथ ही लाजवंती शर्मा के नवप्रकाशित काव्यसंग्रह 'प्रिय प्रवाल' का विमोचन भी किया गया। कविता लोहानी ने पहली बार सुंदर गीत प्रस्तुत किया।
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C P MEDIA
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