खबरों में बीकानेर
🚰जल बचाओ
🌹पर्यावरण संरक्षण जरूरी
हाईलाइट्स :
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*औरों से हटकर सबसे मिलकर*
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फलों और सब्ज़ियों की पौध बनाने के लिए एक शेड-नेट का निर्माण जरूरी
वैज्ञानिक सलाहकार समिति बैठक का आयोजन
कृषि विज्ञान केंद्र लूणकरनसर पर आज वार्षिक वैज्ञानिक सलाहकार समिति बैठक का आयोजन किया गया। कृषि विज्ञान केंद्र की कार्ययोजना को और अधिक प्रभावशाली और विज्ञान-संगत बनाने के उद्देश्य से इस बैठक का आयोजन किया गया। बैठक के अध्यक्ष निदेशक प्रसार शिक्षा स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय बीकानेर डॉ. सुभाष चंद्र तथा मुख्य अतिथि संयुक्त निदेशक (कृषि) बीकानेर डॉ. उदय भान जी रहे। कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग संस्थान (अटारी) जोधपुर के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. मोहर सिंह मीणा जी ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े और अपने अमूल्य सुझाव दिए। साथ ही बैठक में क्षेत्रीय अनुसन्धान केंद्र काजरी बीकानेर के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एम एल सोनी, नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक डॉ. रमेश ताम्बिया, सहायक निदेशक (उद्यानिकी) डॉ. जयदीप दोगने जी, कृषि अनुसन्धान केंद्र के डॉ. नरेंद्र सिंह जी, केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान बीकानेर के डॉ. रमेश कुमार, परियोजना निदेशालय (आत्मा) के डॉ. राजूराम जी, पशु विज्ञान केंद्र लूणकरनसर के डॉ. प्रमोद मोहता, शस्य ग्राह्य परिक्षण केंद्र (ATC) लूणकरनसर के डॉ. गिरिराज उपस्थित थे। केंद्र के प्रगतिशील काश्तकार श्री जसविंदर सिंह जी और श्री श्रवण राम जी और महिला काश्तकार श्रीमती सुमित्रा देवी और अमनदीप कौर भी इस बैठक में सम्मिलित हुए। केंद्र प्रभारी डॉ. मदन लाल रैगर ने केंद्र की गतिविधियों की जानकारी देते हुए गत वर्ष आयोजित की गयी सलाहकार समिति बैठक की कार्यवाही रिपोर्ट प्रस्तुत की। केंद्र के मृदा वैज्ञानिक श्री भगवत सिंह खेरावत ने वार्षिक प्रगति विवरण एवं आगामी वार्षिक कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी दी। अध्यक्ष महोदय डॉ. सुभाष चंद्र ने कृषि विज्ञान केंद्र पर किये जा रही गतिविधियों की प्रशंसा करते हुए अपनी आगामी कार्ययोजना को और अधिक व्यावहारिक और आवश्यकतानुरूप बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र पर फलों और सब्ज़ियों की पौध बनाने हेतु एक शेड-नेट का निर्माण शीघ्र करना चाहिए। मुख्य अतिथि डॉ. उदय भान जी ने कृषि विज्ञान केंद्र को किसानों और वैज्ञानिकों के बीच की कड़ी बताते हुए कहा कि अधिक से अधिक नए किसानों से जुड़ने का प्रयास करें। साथ ही उन्होंने केंद्र के वैज्ञानिकों को समय-समय पर किसानों के लिए आवश्यक सलाह और एडवाइजरी को समाचार पत्रों के माध्यम से प्रकाशित करने का भी सुझाव दिया। अटारी जोधपुर के डॉ. मीणा जी ने भी कृषि विज्ञान केंद्र पर लगायी जा रही फसल कैफेटेरिया की सराहना की जिसमें रबी मौसम में 85किस्में और खरीफ मौसम में 59 फसलें प्रदर्शित की जाती हैं। सहायक निदेशक (उद्यानिकी) डॉ.. जयदीप दोगने जी ने इस क्षेत्र के लिए अनुकूल अनार और खजूर की खेती पर बल देने का सुझाव दिया। नाबार्ड के डॉ रमेश ताम्बिया जी ने कृषक उत्पादनक समूह बनाने पर ज़ोर दिया, साथ ही लघु और सीमान्त किसानों को भी गतिविधियों में शामिल करने का सुझाव दिया। कार्यक्रम में सम्मानित मंच ने कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों द्वारा प्रकाशित 02 फोल्डर और 02 पुस्तिकाओं का विमोचन भी किया गया। अंत में सभी उपस्थित सदस्यों को श्रीमान निदेशक महोदय ने प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन केंद्र कि खाद्य एवं पोषण विशेषज्ञ डॉ. ऋचा पंत ने किया तथा बागवानी विशेषज्ञ डॉ. नवल किशोर ने सभी सदस्यों को धन्यवाद ज्ञापित कर कार्यक्रम का समापन किया।
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C P MEDIA
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