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हाईलाइट्स :
बंदर के डर से घर में बंद है जगदीश...!
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बंदर के डर से घर में बंद है जगदीश...!
नईदिल्ली। बदला एक ऐसी भावना है
जो जब पनपती है तो एक इंसान कुछ भी
करने को तैयार हो जाता है। इंसान तो छोडि़ए,
जानवर भी इससे बचे नहीं रहे हैं। एक बंदर
इन दिनों चर्चा में इसलिए है क्योंकि वो बदला
लेने के लिए कई किलोमीटर का सफर तय
कर गया।
क्या है पूरा मामला?
खबरों के अनुसार, कर्नाटक के चिकमगलूर
जिले के कोट्टिघेरा गांव में एक बोनेट प्रजाति
का एक बंदर लोगों में खौफ का विषय बना
हुआ है। इस बंदर की उम्र 5 वर्ष के करीब है।
वो लोगों से फल और खाने की चीजें छीन
लेता था। स्कूल खुलने के बाद यह बंदर
मोरारजी देसाई स्कूल के आस-पास घूमने-
फिरने लगा। बच्चे बंदर से बहुत डर गए थे।
लिहाजा, किसी ने वन विभाग को खबर दे दी
और शरारती बंदर को पकडऩे के लिए एक
टीम पहुंची।
लोगों की कर दी बुरी हालत
लेकिन विभाग वालों के लिए भी इसे पकडऩा
आसान नहीं था। अधिकारियों ने ऑटोरिक्शा
वालों और अन्य लोगों से मदद मांगी और
काफी मशक्कत के बाद बंदर को पकड़ा गया।
ऑटोरिक्शा चालक जगदीश भी मदद के लिए
पहुंचे थे।
इसी दौरान परेशान बंदर ने जगदीश पर
हमला कर दिया था। वो वहां से भाग गए,
लेकिन बंदर उनके पीछे भागा। वो अपने ऑटो
में छिप गए। बंदर वहां भी आ गया और उनके
ऑटो के शीट्स फाड़ दिए।
बहुत डर गए थे वो
जगदीश ने कहा, 'मै उससे बहुत डर गया था।
मैं जहां भी जाऊं, वो पागल बंदर मेरे पीछे पड़
जाए। उसने मुझे बड़ी जोर से काटा। डॉटर्स
ने जख्म देखकर कहा कि ठीक होने में एक
महीना लगेगा। मैं अपना ऑटोरिक्शा भी नहीं
चला सकता। उस दिन मैं घर नहीं गया,
योंकि मुझे डर था कि वो घर तक पीछा
करेगा। घर पर छोटे बच्चे हैं। मैं अभी भी डरा
हुआ हूं।
22 किलोमीटर दूर छोड़ दिया गया
30 लोगों ने लगभग 3 घंटों तक मशक्कत की।
इसके बाद बंदर को पकड़ा गया। वन विभाग
ने गांव से 22 किलोमीटर दूर बालुर जंगल में
बंदर को छोड़ दिया। लेकिन सबकुछ अभी
ठीक नहीं हुआ। जहां कोट्टिघेरा के लोगों ने
राहत की सांस ली। सबने सोचा कि बंदर अब
तंग नहीं करेगा।
ट्रक पर चढ़ गया
आपको इस बात पर यकीन नहीं होगा कि वो
बंदर बालुर जंगल के पास से जा रहे ट्रक पर
चढ़ा। इसके बाद वो सीधे कोट्टिघेरा गांव तक
पहुंचा। जब जगदीश को बंदर की वापसी के
बारे में पता चला तो वो डर गए। वो कहते हैं,
'जब मैंने सुना कि बंदर वापस आ गया है, तो
डर के मारे मेरे रौंगटे खड़े हो गए। मैंने खुद
वन विभाग को फोन किया और उन्हें जल्द से
जल्द आने को कहा। मैं अपने घर से बाहर
नहीं गया हूं। मुझे पता है ये वही बंदर है क्योंकि
पिछली बार हमने उसके कान के पीछे निशान
देखा था और मेरे दोस्त ने बताया कि
गांववालों ने बंदर के कान पर निशान देखा
है।
नहीं पता चल रही वजह
मोहन कुमार, जोकि रेंज फॉरेस्ट अफसर हैं,
उन्होंने बताया कि बंदर जगदीश पर ही हमला
यों कर रहा है इसकी वजह पता नहीं है। वो
कहते हैं कि पहली बार किसी बंदर को इस
तरह की हरकत करते देखा गया है। हालांकि
फिर से वन विभाग ने दूसरी बार बंदर को 22
सितंबर को पकड़ा और जंगल में छोड़ आए।
अब उम्मीद है कि बंदर वापस नहीं आएगा।
जगदीश ने कुछ दिन घर के अंदर रहने का ही
फैसला किया है।







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