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हजारो किसान डिग्गी निर्माण से वंचित किए गए - अनुदान वितरण में घपले का आरोप
बीकानेर। इन्दिरा गांधी नहर क्षेत्र में पानी की डिग्गी बनाने हेतु गत् 03 वर्षों से आवेदन कर रखा था। किसानों द्वारा 2019 से पानी की डिग्गियों के निर्माण हेतु अनुदान की राशि का इंतजार था। कृषि विभाग ने विभिन्न प्रकार के अनुदान जिससे नहरी क्षेत्र में कम पानी से खेती विकसित की जाए, देने की नीति बनाई थी और राज्य सरकार ने बहुत जोर-शोर से इसकी घोषणा की थी।
किसानों ने अपने आवेदन ई-मित्र सर्विसेज के माध्यम से ऑनलाईन किया था। आवेदन प्राप्त होने पर कृषि विभाग ने पहले आओ और पहले पाओ की नीति किसानों की नीति बताई थी। खाजूवाला, घड़साना, छतरगढ़, दान्तौर और कोलायत क्षेत्र में जिन किसानों ने कृषि विभाग के समक्ष ऑनलाईन आवेदन किए थे उन्होंने बताया कि एक आवेदन पर लगभग 500 रू खर्च होता है। सरकार की स्पष्ट नीति न होने के कारण कृषि विभाग के कर्मचारियों ने बताया कि हर वर्ष आवेदन करना पड़ा। इसलिए प्रत्येक किसान का लगभग 2-3 हजार रूपये खर्च हो गया था। कुछ किसानों ने कर्जा लेकर डिग्गियों का निर्माण किया। फलस्वरूप वे कर्जे और ब्याज के भार के नीचे दब गए। विकास और सिंचाई की बात तो दूर है लेकिन किसानों को कृषि विभाग ने बर्बादी के मुहाने पर खड़ा कर दिया।
हाल ही में कृषि विभाग ने पहले आओ-पहले पाओ की नीति को छोड़कर 2019, 2020 के वर्ष में जिन किसानों ने आवेदन किया था उनकी प्राथमिकता खत्म कर लॉटरी पद्धति से अनुदान देने की सूची बना दी।
विभिन्न किसान संगठनों ने राज्य सरकार से निवेदन किया है कि लॉटरी पद्धति में भ्रष्टाचार होने का अंदेशा है। दो किसान संगठनों ने यह भी आरोप लगाया है कि एक राजनेता को लाभ पहुंचाने के लिए कृषि विभाग ने उनके चेहतों को अनुदान देने का रास्ता लॉटरी पद्धति से निकाला है। लॉटरी पद्धति विभाग के कुछ कर्मचारियों ने भी बहती गंगा में हाथ धोये है। जिन किसानों ने पहले ऑनलाईन आवेदन किए थे उनको प्राथमिकता से अनुदान की राशि का भुगतान किया जाना चाहिए न की अपने चेहते लोगों को लॉटरी से लाभान्वित करने की कोशिश।
राष्ट्रीय किसान मोर्चे ने कृषि विभाग पर आरोप लगाया है कि उन्होंने आवेदकों को बदली हुई नीति और लॉटरी निकालने की सूचना भी नहीं दी, ना ही लॉटरी आवेदकों के समक्ष निकाली गई। किसान मोर्चे ने बताया कि कुछ लोगों ने एक दफ्तर में बैठकर अपने चेहते लोगों के बीच लॉटरी की प्रक्रिया पूरी कर ली। जो अवैधानिक है और किसानों को धोखा देने वाली है। तत्काल लॉटरी पद्धति से जारी किए जाने वाले अनुदान को रोका जाना चाहिए ताकि प्राथमिकता के आधार पर पुराने आवेदकों को अनुदान मिल सके।
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