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गोचर : सरकारें और प्रशासन की सार्वजनिक सम्पदा को लेकर मुंदी आंखें खोलने रामसुखदास जी के धोरे पर होगा विमर्श
चार जुलाई को अभिनव पहल, बनेगा इतिहास
गोचर विकास के मुद्दे पर बैठक 4 जुलाई को
- बीकानेर सरेह नथानिया, भीनासर, गंगाशहर और सटे इलाके गढ़वाला, सिथल, नापासर, देशनोक आदि क्षेत्रों में 45 हजार बीघा से ज्यादा गोचर है। गोचर गायों के चारागाह और वनस्पति, वन्य जीव जन्तुओं की संरक्षण स्थली भी होती है। गोचर हमारी गो संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति संवर्द्धन का एकमात्र यही स्थल बचा हुआ है। सरकारें और प्रशासन ने इन सार्वजनिक सम्पदा को लेकर आंखें मूंद रखी है। जहां समाज इसकी देखभाल में लगा है वहां गोचर सुरक्षित है। अभी गोचर के प्रति लोगों में फिर से चेतना जगी है। समाज के स्तर पर ही गोचर की चाहर दिवारी, पौधरोपण और चारागाह विकास किया जा रहा है। ये काम समाज के स्तर पर होते आए हैं। नई पहल के साथ गोचर से जुड़ी सभी संस्थाओं को एक मंच पर लाकर परस्पर सहयोग से गोचर विकास के कार्यों को गति देने के लिए 4 जुलाई को सुबह 10.30 बजे रामसुखदास जी के धोरे पर प्रतिनिधि लोगों की बैठक रखी है। बैठक में मात्र एक ही बिंदु विचारार्थ रखा है - गोचर में चारागाह विकास और पेड़ कैसे लगें।
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