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दसवीं पास तीन हजार में मुर्गी पालन कोर्स करें और आमदनी बढ़ाएं
एस.के.आर.ए. यू: “मुर्गी पालन” त्रैमासिक पाठ्यक्रम विवरण एवं निर्देशिका का विमोचन
बीकानेर 30 जून। स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के मानव संसाधन विकास निदेशालय के दूरस्थ शिक्षा माध्यम द्वारा संचालित किए जाने वाले ” मुर्गी पालन” पाठ्यक्रम विवरण एवं निर्देशिका का विमोचन कुलपति प्रो. आर.पी. सिंह द्वारा किया गया। कुलपति प्रो. सिंह ने बताया की कुक्कुट पालन से बेरोजगार युवक युवतियां कम लागत में अपना रोजगार स्थापित कर आत्मनिर्भर बन सकते है तथा अपने परिवार का पालन पोषण कर सकते है । घर पर मुर्गी पालन में उसके रखरखाव एवं भोजन पर कोई व्यय नहीं करना पड़ता क्योंकि खरपतवार की पत्तियां, घर का बचा हुआ भोजन, शाक सब्जियों के बेकार पत्ते, और बिखरा हुआ अनाज आदि को मुर्गी पालन में काम में लिया जा सकता है। मुर्गी पालन पाठ्यक्रम से किसान ना केवल अच्छा लाभ प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित होंगे अपितु प्रति इकाई आय भी बढ़ा सकते हैं।
मानव संसाधन निदेशक डॉ एस एल गोदारा ने बताया कि मुर्गी पालन अधिकतर अंडे एवं मास उत्पादन के लिए किया जाता है। वर्तमान बाजार परिदृश्य में मुर्गी उत्पाद उच्च जैविकीय मूल्य के प्राणी प्रोटीन का सबसे सस्ता उत्पाद है। मुर्गी पालन के महत्व को ध्यान में रखते हुए त्रैमासिक प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम प्रारंभ करने की एक सकारात्मक पहल है। इस पाठ्यक्रम में मुर्गी पालन का महत्व, उनकी नस्लें ,मुर्गी का आहार, आवास की व्यवस्था, पक्षियों में संगम की विधियां, मुर्गियों के प्रमुख बीमारियां एवं उनका प्रबंधन आदि के बारे में जानकारी उपलब्ध कराई गई है। मुर्गी पालन पाठ्यक्रम सामग्री के लेखन संकलन एवं संपादन के लिए पशुपालन विभाग के सहायक आचार्य डॉ उपेंद्र कुमार मील, डॉ शंकर लाल खीचड़, विषय विशेषज्ञ डॉ रामनिवास ढाका एवं सहायक निदेशक डॉ आर.के. वर्मा का धन्यवाद देते हुए विश्वास प्रकट किया की इस पाठ्यक्रम को पढ़कर युवा वर्ग प्रगतिशील किसान एवं कृषि उद्यमी स्वरोजगार एवं स्वावलंबन की ओर अग्रसर हो सकेंगे। यह पाठ्यक्रम हिंदी भाषा में, 3 माह की अवधि का है। इसके लिए मान्यता प्राप्त बोर्ड से दसवीं पास होना अनिवार्य है एवं इस पाठ्यक्रम का शुल्क ₹3000 प्रति व्यक्ति है।
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