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कृषि विश्वविद्यालय समाचार :
“जैविक कृषि” त्रैमासिक पाठ्यक्रम विवरण एवं निर्देशिका का विमोचन
एस.के.आर.ए. यू: वर्चुअल जल प्रबंधन संवाद- 2021
बीकानेर 29 जून। स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के कृषि अनुसंधान केंद्र श्रीगंगानगर द्वारा वर्चुअल जल प्रबंधन संवाद-2021 आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रोफेसर आर.पी. सिंह ने बताया कि फसल उत्पादन के लिए जल के नियोजित ढंग से उपयोग करने की कला को जल प्रबंधन कहते हैं। जल प्रबंधन के अंतर्गत सिंचाई तथा जल निकास दोनों क्रियाएँ आती है जिससे कि जल की कमी अथवा अधिकता ना रहे। राजस्थान देश के सबसे अधिक शुष्क प्रदेशों में से एक है ऐसी स्थिति में वर्षा जल का समुचित संरक्षण, भंडारण तथा दक्षतापूर्ण उपयोग करके इस चुनौती का मुकाबला किया जा सकता है। उपलब्ध जल से अधिक उत्पादन लेने हेतु जल बचत तकनीक विकसित की गई है। किसानों को बागवानी फसलों, सब्जी वाली फसलों, नरमा कपास तथा गन्ने के लिए बूंद बूंद सिंचाई पद्धति तथा पूर्व सिंचन की तकनीक उपलब्ध कराई गई है। रबि की ऋतु में सर्दी से बचाव तथा बेमौसमी सब्जी से अधिक आमदनी प्राप्त करने हेतु लो टनल तकनीक दी गई है। पॉलिथीन पलवार तथा मेढ पर खेती द्वारा जल उपयोग दक्षता बढ़ाने की तकनीक देकर किसानों की आय में वृद्धि की गई है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उक्त तकनीकों को किसानों में लोकप्रिय करने हेतु किसानों के खेतों पर इनका प्रदर्शन किया गया है। राज्य सरकार के वित्तीय सहयोग से नरमा में बूंद बूंद सिंचाई के प्रदर्शन पूरे प्रदेश के कपास उत्पादन क्षेत्र में लगाए गए तथा गन्ने में बूंद बूंद सिंचाई के प्रदर्शन श्रीगंगानगर जिले में लगाए गए। डॉ. पी.एस. शेखावत निदेशक अनुसंधान एवं विशिष्ट अतिथि डॉ प्रभाकर नंदा (भुवनेश्वर) के अतिरिक्त वर्चुअल कार्यक्रम में डॉ बी.एस. मीणा आचार्य ने जल प्रबंधन,डॉ बी.एस. यादव ने जल बचत खेती आवश्यकता एवं तकनीकी, डॉ संजीव संदल ने बूंद बूंद सिंचाई में उर्वरक सिंचन, फर्टिगेशन तकनीक, श्री फूलचंद वर्मा वरिष्ठ विशेषज्ञ ने बूंद बूंद सिंचाई पद्धति की स्थापना एवं रखरखाव डॉ ए. के. सिंह जल प्रबंधन विशेषज्ञ ने अधिक आय जल उत्पादकता के लिए सटीक खेती, डॉ आर पी एस चौहान ने सब्जियों में अधिक उत्पादन के लिए लो टनल तकनीक, डॉ जी.आर. मटोरिया ने सिंचाई जल के लिए कृषि विभाग की योजनाओं पर संबोधित किया।
एस.के.आर.ए. यू: “जैविक कृषि” त्रैमासिक पाठ्यक्रम विवरण एवं निर्देशिका का विमोचन
बीकानेर 29 जून। स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के मानव संसाधन विकास निदेशालय के दूरस्थ शिक्षा माध्यम द्वारा संचालित किए जाने वाले ”जैविक कृषि” पाठ्यक्रम विवरण एवं निर्देशिका का विमोचन कुलपति प्रो. आर.पी. सिंह द्वारा किया गया। कुलपति प्रो. सिंह ने बताया की कृषि रसायनों की अत्यधिक उपयोग के कारण हमने अनेक असाध्य बीमारियों को न्योता दिया है। आने वाली पीढ़ियों के लिए हालात और अधिक दुष्कर हो जाएंगे इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं है। जैविक कृषि दूरस्थ शिक्षा पाठ्यक्रम युवाओं एवं प्रगतिशील किसानों के लिए लाभदायक सिद्ध होगा।
मानव संसाधन निदेशक डॉ एस एल गोदारा ने बताया कि यह पाठ्यक्रम जैविक कृषि विषयवस्तु का सरलीकरण करके वैश्विक बाजार मांग एवं मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है। पाठ्यक्रम को चार इकाइयों में विभक्त किया गया है। इसके अंतर्गत विद्यार्थियों को जैविक प्रमाणीकरण प्रक्रिया, जैविक कृषि एवं संसाधन प्रबंधन, जैविक कृषि कार्य योजना, उद्यमिता विपणन प्रबंधन, जैविक कृषि की कार्य प्रौद्योगिकी के बारे में जानने का अवसर मिलेगा। यह पाठ्यक्रम हिंदी भाषा में, 3 माह की अवधि का है। इसके लिए मान्यता प्राप्त बोर्ड से दसवीं पास होना अनिवार्य है एवं इस पाठ्यक्रम का शुल्क ₹3000 प्रति व्यक्ति है। डॉ गोदारा ने पाठ्यक्रम संकलन एवं संपादन एवं लेखन के लिए आचार्य डॉ. एस एम कुमावत, आचार्य डॉ. ए आर नकवी, सहायक आचार्य डॉ राजेंद्र कुमार जाखड़, डॉ अशोक कुमार मीणा एवं छात्रा तनुजा पूनिया एवं प्रकाशन हेतु सहायक निदेशक डॉ आर.के. वर्मा का धन्यवाद देकर कुशल संचालन की कामना की और कहा की इस पाठ्यक्रम का लाभ प्रशिक्षणार्थियों, विद्यार्थियों, प्रगतिशील किसानों, कृषि प्रसार कार्यकर्ताओं, कृषि व्यवसाय से जुड़े उद्यमियों को मिलेगा और वे स्वावलंबन एवं स्व-रोजगार की ओर अग्रसर हो सकेंगे ।
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