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पढ़ना और पढ़ाना जीवन सफल बनाना 📚
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|| पूर्व काबीना मंत्री अहमद बख़्श सिन्धी को सांकेतिक श्रद्धांजलि ||
काँग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं राजस्थान सरकार में पूर्व विधि व न्याय, वक़्फ़ मंत्री तथा विधानसभा डिप्टी स्पीकर श्री हाजी अहमद बख़्श सिन्धी को उनकी इक्कीसवीं बरसी पर काँग्रेस सदस्य ऐनुल अहमद के मोहल्ला चूनगरान स्थित निवास पर समस्त काँग्रेस पार्टी, मोहल्लेवासियों व परिवार की तरफ़ से लॉकडाउन व सोशल डिस्टेन्सिंग के मद्देनज़र दूरस्थ तौर पर सांकेतिक श्रद्धांजलि अर्पित की गई। ऐनुल अहमद ने बताया कि कोविड गाइडलाइंस के मद्देनज़र प्रत्येक वर्ष शहर ज़िला काँग्रेस कार्यालय में आयोजित किया जाने वाला श्रद्धांजलि कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया। दूरभाष व सोशल मीडिया वग़ैरा के जरिए बीकानेर शहर के विभिन्न वरिष्ठ काँग्रेसजनों, कार्यकर्ताओं व प्रबुद्धजनों ने स्व. सिन्धी को श्रद्धांजलि देते हुए उनकी विभिन्न शैक्षणिक व राजनीतिक उपलब्धियों का स्मरण किया तथा उनकी चारित्रिक विशेषताओं और आदर्शों की मौजूदा राजनीतिक परिवेश में महत्ता और प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। ऐनुल अहमद ने बताया कि पेशे से राजस्थान हाई कोर्ट के वरिष्ठ वकील मरहूम अहमद बख़्श सिन्धी साहब ही ने 1952-57 में बीकानेर में बतौर विधानसभा प्रत्याशी काँग्रेस की चुनावी राजनीति की नींव रखी थी। पंडित जवाहरलाल नेहरू, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद, इंदिरा गांधी जैसे नेताओं के बेहद क़रीबी मरहूम सिन्धी को हर वर्ग और समुदाय के हितैषी और एक निडर मददगार के तौर पर याद किया जाता है। स्व. सिन्धी राजनीति में उच्च नैतिक सिद्धांतों, पक्षपात-विहीन नीति के प्रबल पक्षधर थे। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में एक विद्यार्थी के तौर पर उन्होंने मौलाना आज़ाद के हाथों काँग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी। स्व. अहमद बख़्श सिन्धी धर्म के आधार पर भारत के विभाजन के सख़्त ख़िलाफ़ थे और इसी मुद्दे पर उनकी मुखरता और दलीलों ने मौलाना आज़ाद ततपश्चात पंडित नेहरू को अत्यधिक प्रभावित कर उनके क़रीब किया। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से गोल्ड मैडल हासिल करके उन्होंने न केवल बीकानेर बल्कि समस्त राजस्थान का नाम रौशन किया। स्व. सिन्धी की शैक्षणिक उपलब्धियों और विद्वत्ता ने बीकानेर के तत्कालीन महाराजा सादुल सिंह जी का ध्यान आकृष्ट किया जिन्होंने उन्हें अपनी रियासत का शिक्षा मंत्री बनाया। स्व. सिन्धी जीवनपर्यंत पूरी निष्ठा से जनसेवा के अपने सिद्धांत पर अटल रहे। राजीव गाँधी की मृत्यु के कुछ ही समय बाद सक्रिय राजनीति से सन्यास लेकर स्व. सिन्धी परिवार सहित स्थाई तौर पर अमेरिका जा बसे और आख़िरकर गुर्दे की लंबी बीमारी के बाद मिशिगन राज्य के डैट्रॉएट शहर में 28 अप्रैल, 2000 को हृदयाघात से उनका देहांत हो गया और वहीं उन्हें सुपुर्दे ख़ाक किया गया। स्व. सिन्धी को राजनीति और समाज के विभिन्न हलक़ों में आज भी बहुत सम्मान से याद किया जाता है।
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