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बीकानेर में घूमता आईना - 4 : शटर खड़का दिल धड़का, आवाज आई गुटखा मिलेगा क्या, दवा वाले दिलदार को मिला धन्यवाद
- मोहन थानवी
बीकानेर। दूसरे वीकेंड कर्फ्यू के दूसरे दिन दोपहर से पहले ही सड़कें सूनी हो गई। जब तक अनुमत दुकानें खुली थी तब तक लोग अपनी जरूरत का सामान लेने निकले। मगर सप्ताह के अन्य दिनों की अपेक्षा आज आवाजाही ना के बराबर थी सड़कों पर पुलिस जाब्ता भी पहले से ज्यादा दिखाई दिया। हम मोबाइल कैमरा लिए इस ताक में रहे की कुछ दृश्य आप तक पहुंचाने को मिल जाएं। एक जगह बंद दुकानों की कतार के आगे रूक कर हमने देखा एक दुकान के आगे दो बाइक खड़ी थी और उस बंद दुकान के डाऊन शटर के एक ओर ताला नहीं लगा हुआ था। उस शटर को खड़काता हुआ एक युवक बार-बार इधर उधर देख भी रहा था। दो-तीन बार शटर खड़काने पर भी कोई जवाब न मिला तो वह जरा ऊंची आवाज में बोला - गुटका मिलेगा क्या...? हम से रहा ना गया तो हमने उसे टोका - अरे भाई इस कर्फ्यू में निकलकर गुटखा ढूंढना जरूरी है क्या। और देख नहीं रहे शटर के एक ओर ताला लगा हुआ है, अंदर कोई नहीं है। वह युवक हमें घूरता हुआ चला गया। तभी वहां से निकल रहे एक पुलिसकर्मी ने हमें भी टोका, बोला - भाई साहब क्या बंद बाजार में खबर ढूंढ रहे हो। जाओ स्टेशन पर या अस्पताल की ओर जाकर फोटो खींचो। ऑफिस में बैठो या घर में आराम करो। कोरोना वारियर्स पुलिसकर्मी की बात में दम था। पीबीएम अस्पताल मार्ग की ओर जाने वाली सड़कों पर जरूर कुछ लोग आवाजाही करते मिले। मगर यहां दवाइयों की दुकानों के अलावा बाकी शटर नीचे नजर आ रहे थे। आसमान से मानो लपटें लपलपा कर झुलसाने को आतुर थी ऐसी गर्मी में भी बाइक पर सवार दो लोग अस्पताल के सामने एक्स-रे गली से दो-तीन बार आते जाते दिखे। परेशानी उनके हाव-भाव से टपक रही थी। हम एक दवाई की दुकान के पास खड़े माहौल देख आप तक पहुंचाने की तैयारी में थे। तभी वह बाइक वाले दोनों युवक उसी दवा की दुकान के काउंटर तक पहुंचे और पूछा आज होलसेल दवा की दुकानें बंद है क्या वहां 15% छूट पर दवाइयां मिल जाती है। दुकानदार ने उन्हें मीठा सा जवाब दिया ,भैया संडे है। चले गए होंगे। आप टेंशन क्यों करते हो। दवा ले लो छूट हम दे देंगे। युवकों ने दवाइयां ले ली और दुकानदार को धन्यवाद देते हुए चले गए। मतलब कि कोरोना काल की इस विकट घड़ी में वीकेंड कर्फ्यू के दूसरे दिन रविवार को थोक दवाईयों की दुकानें भी जल्दी बंद हो गई। गर्म दिन में सूनी सड़कों पर अपनी ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को सैल्यूट करते हुए हम भी अपने ऑफिस पहुंच गए।
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