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दुनिया के जितने भी धार्मिक और महान लोग हैं उन सब का सम्मान किया जाना चाहिए - जमीअत उलमा बीकानेर
*भारत सरकार का फ़्रांस के रुख का समर्थन करना बिलकुल गलत।*
*कोई भी मुसलमान अपने प्यारे पैगम्बर हजरत मोहम्मद स.अ.व की शान में मामूली अपमान भी सहन नही कर सकता|*
बीकानेर:03 नवम्बर आज जमीअत उलमा बीकानेर ने एक प्रेस रिलीज जारी करते हुए कहा कि पिछले दिनों फ्रांस में जो कुछ हुआ और अब जो हो रहा है उससे कुछ लोग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता साबित कर रहे हैं और इसका समर्थन भी कर रहे हैं ” लेकिन क्या एक सभ्य समाज में इस प्रकार के व्यवहार को सही ठहराया जा सकता है ? जमीअत उलमा बीकानेर के जनरल सैकेट्री मौलना मोहम्मद इरशाद कासमी ने कहा कि दुनिया के जितने भी धार्मिक और महान लोग हैं उन सब का सम्मान किया जाना चाहिए, चाहे उनका संबंध किसी भी धर्म से हो | हमें हमारे नबी ने यह शिक्षा दी है कि किसी भी धर्म और किसी भी धार्मिक व्यक्ति को बुरा न कहो | पूरी दुनिया के मुसलमान इस आदेश का पालन कर रहे हैं, किसी भी धर्म को मानने वाला यह नहीं कह सकता कि किसी मुसलमान ने उसके धर्म के किसी धार्मिक व्यक्ति का अपमान किया हो या फिर उसका मजाक उड़ाया हो | कासमी ने फ्रांस के राष्ट्रपति द्वारा अपमानजनक प्रकाशन और इस कुकर्म के समर्थन की घोर निंदा करते हुए कहा कि यह असहनीय है, और लोगों के दिल दुखाने से चरमपंथी प्रति क्रिया को बढ़ावा मिलता है और दुनिया की शान्ति को खतरा पैदा हो जाता है | विशेषकर किसी शासक की और से ऐसे अपवित्र कृतियों का समर्थन गंभीर जुर्म और अक्षम्य कार्य है | कासमी ने कहा कि इस्लाम एक शांतिप्रिय धर्म है जो अन्य किसी भी धर्म के सम्मानित व्यक्तियों की भावनाओं का सम्मान करता हैमगर दुनिया की कुछ ताकते बार-बार मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाती है | यह बात निश्चय ही अस्वीकार्य है हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं | कोई भी मुसलमान अपने प्यारे पैगम्बर हजरत मोहम्मद साहब की शान में मामूली अपमान भी सहन नही कर सकता फिर भी तमाम मुसलमानों के लिए जरुरी है कि वो भावनाओं से ऊपर उठकर अच्छे विचार और सहनशीलता से इसका मुकाबला करें | उन्होंने कहा कि हमें बहुत दुःख है कि हमारी सरकार ने फ़्रांस के रुख का समर्थन किया है जिसका अर्थ है कि वे सारी दुनिया के मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को ठोकर मारकर दिलों को ठेस पहुंचाने वाले कानून का समर्थन कर रही है इससे मालूम होता है कि खुद अपने देश के अन्दर सरकार का रुख क्या है, और वो 20 करोड़ मुसलमानों के सिलसिले में क्या दृष्टिकोण रखती है ? हमारा विचार है कि फ्रांस के रुख के समर्थन के मुकाबले खामोश रहना अधिक उचित होता।
मौलाना मोहम्मद इरशाद कासमी
महासचिव
जमीअत उलमा बीकानेर
Whats:-9875257592 Cont:-8005916552
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