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संतों का जीवन जाति पाँति से ऊपर देवत्व का है-महंत प्रताप पुरी
आज अखिल भारतीय साहित्य परिषद जोधपुर प्रान्त द्वारा आदिकवि वाल्मीकि जयंती व शरद पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित वेब संगोष्ठी में बोलते हुए तारातरा मठ बाड़मेर के आदरणीय महंत प्रताप पुरी जी महाराज ने कहा कि आज समाज विभिन्न जातियों में विभाजित हैं इसलिए सामाजिक समरसता की आवश्यकता बढ़ जाती हैं आज इस अस्पृश्यता, छुआछूत इत्यादि बुराइयों को समाज से दूर करनी होगी ।इस हेतु आज हिंदू समाज के सन्तों का कार्य है कि अपने अपने आश्रम,मठों से इस कार्य को आगे बढ़ना होगा ।वाल्मीकि जी ने रामचरित्र का आख्यान रामायण में लिखा है जो आज हिन्दू समाज का प्रेरणादायी स्रोत हैं भगवान राम ने शबरी के झूठे बेर,केवट से मित्रता से सामाजिक समरसता के उदाहरण उस समय हमारे सामने रखे ।भगवान का चरित्र जिस ऋषिपुरुष ने लिखा उन्हें सीमा में नही बाँध सकते है ।आज श्रेष्ठ वो हैं जो सेवा करता हैं औऱ सेवा करने वाला ही पवित्र होता हैं हम सबएक पुंज के रूप में मिलकर समाज को श्रेष्ठ बनायेगे।सामाजिक समरसता का यह कार्य हमे अपने अपने घर से शुरू करना है।इस अवसर विशिष्ट वक्ता के रुप मे बोलते हुए डॉ गोपी राम शर्मा ने कहा कि रामायण विभिन्न भाषाओं में लिखी गई हैं जो हिन्दू धर्म में श्री राम जी संस्कृति में हम सबको बांधे हुये हैं हमे आज वाल्मीकि जी की जयंती के अवसर पर वाल्मीकि समाज का वन्दन करना चाहिये ।तत्ववेत्ता ,साहित्यकार, लेखक ,गुरुदेव आदिकवि वाल्मीकि से हमें सेवा परमोधर्म की शिक्षा मिलती हैं ।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये साहित्य परिषद् के प्रांताध्यक्ष व जेएनवीयू हिंदी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ नरेंद्र मिश्र ने कहा कि दुरात्मा भी सेवामार्ग पर चलने से पवित्र हो जाती हैं ।प्रथम कुलपति प्रथम आश्रम संस्थापक आदिकवि वाल्मीकि ने लव कुश को शिक्षित किया ।तमसा नदी के किनारे बने यही आश्रम माता सीता का आश्रय स्थल भी रहा ।इसलिये वाल्मीकि जी हम सबके हैं हमें एक साथ समाज मे मिलजुलकर रहना है ।शरद पूर्णिमा में चंद्रमा सोलह कलाओं से अमृत वर्षा करता है और कृष्ण पूर्णावतार रूप में महारास रचते हैं। किसान इस दिन रवी की बुवाई कर उत्सव मनाते हैं। इस अवसर पर कार्यक्रम के संयोजक डॉ शिवराज भारतीय ने कहा कि हमे सामाजिक समरसता बढ़ाने वाला लेखन कार्य ज्यादा करना चाहिए ।कार्यक्रम के समापन पर प्रांत महामंत्री कर्णसिंह बेनीवाल ने सबका आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आजोजन समाज को सामाजिक समरसता की प्रेरणा देते है ।कार्यक्रम के सफल आयोजन के सूत्रधार डॉ पवन पांडे जी ने तकनीकी कार्य को खूबसूरती से निभाया ।डॉ तृप्ति पांडे ने परिषद गीत का वाचन किया ।अंत मे कल्याण मन्त्र के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।इस अवसर पर मोनिका गोड़, डॉ मूलचन्द बोहरा,डॉ परमानन्द भट्ट ,डॉ गोवर्धन सिंह ,डॉ कैलाश कौशल ,डॉ इला पारीक ने काव्य पाठ प्रस्तुत किया ।इस अवसर पर साहित्य मंत्री डॉ आख़िलानन्द पाठक, महिला प्रकोष्ठ की प्रांत संयोजक प्रो. कैलाश कौशल, नीलम पारीक,अमरसिंह सिहाग,डॉ सुरेंद्र पाल आर्य,डॉ. प्रेमसिंह,डॉ कामिनी ओझा, डॉ. ज्योति सिंह, डॉ. नवनीत आचार्य, इत्यादि जुड़े । कर्ण सिंह बेनीवाल महामंत्री जोधपुर प्रान्त अखिल भारतीय साहित्य परिषद सम्पर्क सूत्र 9413537088
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