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मंडियों पर सन्नाटे का राज : तीन दिनों में कृषि उपज मंडी को लगभग 90 लाख रुपये
का कारोबारी नुकसान
बीकानेर/श्रीडूँगरगढ़। केन्द्र सरकार द्वारा पारित फार्मर प्रोड्यूसर ट्रेड
एंड कामर्स अध्यादेश के खिलाफ बीकानेर एवं श्रीडूंगररगढ़ कृषि
उपज मंडी गुरुवार को तीसरे दिन भी पूर्णतया बन्द रही। प्रतिदिन
किसानों, मजदूरों, व्यापारियों की रेलमपेल से खचाखच भरी रहने
वाली कृषि उपज मंडियां गुरुवार को तिसरे दिन भी वीरान पड़ी
रहीं। श्रीडूँगरगढ़ व्यापार संघ के अध्यक्ष श्यामसुंदर पारीक ने बताया
कि इन तीन दिनों में कृषि उपज मंडी को लगभग 90 लाख रुपये
का कारोबारी नुकसान हुआ है। 50-60 साल की मेहनत से
एपीएमसी एग्रीकल्चर प्रोडट मार्केट कमेटी-कृषि उपज मंडी
परिसर (एपीएमसी) द्वारा करोड़ों रुपये का इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा किया
गया। जहां किसान की कृषि उपज खुलीं निलामी में नकद भुगतान
व कृषि उपज मंडी के कर्मचारियों की उपस्थिति में विक्रय होतीं थी।
किसान भी इस पारदर्शी व प्रतिस्पर्धात्मक तरीके से विक्रय होने
वाली अपनी कृषि उपज को कृषि उपज मंडी में विक्रय कर पुरी
तरह से सन्तुष्ट था। आधुनिक युग में संचार के साधन इतने बढ़ गये
है, कि पुरे देश की डिमांड सप्लाई के आधार पर तेजी मन्दी का
असर तत्काल हर ढ़ेरी पर आता है। इस कारण कृषि उपज मंडी की
निलामी में पुरी तरह प्रतिस्पर्धात्मक मुल्य किसानों को प्राप्त होते है।
लेकिन सरकार ने कृषि उपज मंडी परिसर के बाहर व्यापार करने
वाले व्यापारी को सभी तरह के टैक्स से छूट प्रदान की है।
वहीं दूसरी ओर परिसर के अंदर व्यापार करने
वाले व्यापारी फर्म पर 1.60 प्रतिशत कृषि मंडी
टैस, 1 प्रतिशत कृषक कल्याण शुल्क, व 5
प्रतिशत जीएसटी लगाकर कुल 7.60 प्रतिशत
अतरिक्त शुल्क कायम रख कर एक ही तरह के
व्यापार में दो तरह की टैस व्यवस्था लागू कर
दी। जिसके कारण कृषि उपज मंडी व कृषि
उपज मंडी के व्यापारी दोनों का अस्तित्व ही पुरी
तरह समाप्त होने के कगार पर पहुंच जाएंगा।
किसानों के लिए भी यह व्यवस्था जले हुए पर
नमक का काम करेगी। उन्होंने बताया कि कृषि
उपज मंडी में किसानों की उपज के भुगतान की
पुरी गारंटी रहती है। लेकिन सिधी खरीद के
कारण झोला छाप हवाई व्यापारी कभी भी
किसानों का बड़ा भुगतना रोक कर फरार हो
सकता है। ऐसी गबन की घटना पहले भी हमारे
क्षैत्र में हो चुकी है। या बड़ी बड़ी कपनीयां
आकर बिना प्रतिस्पर्धा व बिना पारदर्शिता
किसानों का माल खरीद कर अंग्रेजों वाली निती
अपना कर किसान को बन्दुआ मजदूर बना
देगी। ऐसी स्थिति में कृषि किसानों के घाटे का
सौदा साबित होगी। इन सब विपरीत परिस्थितियों
को देखते हुए व्यापार संघ श्रीडूंगररगढ़ सरकार
से पुरजोर श-
दों में यह मांग करता है। कि इस
एक ही तरह के व्यापार में दो तरह का कानून को
पुरी तरह समाप्त कर कृषि उपज मंडी के
व्यापारीयों हितों को ध्यान में रखते हुए इस
अधिनियम में पूरी तरह संशोधन करे।
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