✒️खबरों में बीकानेर 🎤 🌐
📰
<
🙏 मोहन थानवी 🙏
सच्चाई पढ़ें । सकारात्मक रहें । संभावनाएं तलाशें ।
🙏
twitter, Podcast, YouTube, साहित्य-सभागार के साथ-साथ Facebook, Pinterest, LinkedIn और Instagram पर भी आपकी खबरें Khabron Me Bikaner 🎤
🇮🇳
खबरों में बीकानेर 🎤 🌐
✍️
📒 CP MEDIA 🙏
<
📰 📑 पढ़ना और पढ़ाना जीवन सफल बनाना 📚 📖 📓
📰
सच्चाई पढ़ें । सकारात्मक रहें । संभावनाएं तलाशें ।
खबरों में बीकानेर 🎤 🌐
✍️
समाचार विज्ञप्ति
मायड़ भाषा पर तीन दिवसीय गोष्ठी का हुआ समापन/ "आपणी बोली धरती रा रिश्ता अर रुजगार" विषय पर ऑनलाइन गोष्ठी सम्पन्न/
हमारे जीवन मूल्य, संस्कृति, विचार, भाव हमारे ग्राम्य वातावरण में सुरक्षित हैं- ऋषि कुमार मिश्र, राष्ट्रीय महामंत्री, अखिल भारतीय साहित्य परिषद/
अपनी भाषा को आज ब्रांड बनाने की आवश्यकता है- डॉ सुरेंद्र सोनी/
हमारी संस्कृति में सभी के लिए रोजगार की व्यवस्था रही है- साहित्यकार जितेंद्र निर्मोही/
साहित्यकार समाज के प्रति उत्तरदायी- ऋषि कुमार मिश्र
अखिल भारतीय साहित्य परिषद राजस्थान की राजस्थानी साहित्य एवं संस्कृति संबंधी तीन दिवसीय विचार गोष्ठी के अंतिम दिन "आपणी बोली धरती रा रिश्ता अर रोजगार" विषय पर संपन्न हुई । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अखिल भारतीय साहित्य परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री ऋषि कुमार मिश्र रहे । कार्यक्रम संयोजक डॉ शिवदान सिंह जोलावास ने बताया कि गोष्ठी की शुरुआत उदयपुर की कवियत्री रेणु सिरोया के सरस्वती वंदना "वीणा पाणी मात शारदे गांवां में गुणगान, हिवड़ा में उजालों अंतर में दो ज्ञान" से हुई। बीज वक्तव्य जितेंद्र निर्मोही ने रखते हुए कहा कि हमारी संस्कृति में सभी के लिए रोजगार की व्यवस्था की गई थी। हमारे वैवाहिक समारोह में कुम्हार, खाती,नाई , ब्राह्मण, हरिजन सभी के लिए कुछ न कुछ आर्थिक सहायता की व्यवस्था की गई थी । बसेड़ा जाति के लोग बांस काट कर सामग्री बनाते थे, जिनका हमारे घरों में प्रयोग होता था । मांगरोल की खादी बड़ी प्रसिद्ध थी, किंतु आधुनिक काल में मांग खत्म होने से यह खादी उद्योग भी समाप्त हो गया। प्रान्त महामन्त्री पंकज कुमार झा ने बताया कि मुख्य वक्ता डॉ सुरेंद्र सोनी ने अपने उद्बोधन में कहा कि हम कौन हैं यह हमारी संस्कृति बतलाती है। हमारी भाषा हमारी पहचान है । अपनी भाषा को आज ब्रांड बनाने की आवश्यकता है। यह युग आर्थिक युग है और जब तक हम अपनी भाषा और संस्कृति को अर्थ से नहीं जोड़ेंगे हम नई पीढ़ी को इसके साथ आत्मसात नहीं कर सकते। विशिष्ट अतिथि डॉक्टर मंगत बादल ने कहा कि हर राज्य अपनी भाषा को महत्व देता है । राजस्थानी संगीत की अपनी मिठास है । हमें उसे बढ़ावा देना चाहिए। जिससे कई लोगों को इसमें रोजगार मिलेगा । हमें नए प्रयोग के रूप में राजस्थानी भाषा को ऑनलाइन सिखाने का कार्य भी किया जाना चाहिए । मान्यता के लिए हम जिस प्रकार संघर्ष कर रहे हैं, ऐसे संघर्ष में प्रिंट मीडिया में अखबार का विशेष महत्व है। ऐसी स्थिति में हमें राजस्थानी भाषा में भी अखबार प्रकाशित करना चाहिए और उसे प्रोत्साहित करना चाहिए। हमें अपनी पहचान मेवाड़ी, हाडोती ,ढूंढाडी, मारवाड़ी से ऊपर उठते हुए राजस्थानी के रूप में बनानी चाहिए। मुख्य अतिथि ऋषि कुमार मिश्र ने कहा कि क्षेत्रीय बोलियों एवं भाषा व ग्रामीण जीवन पर चर्चा करने का विषय अखिल भारतीय साहित्य परिषद ने अपने कार्यक्रम में लिया है । देशभर में हर बोली और भाषा पर गोष्ठी आयोजित की जा रही है । हमारे जीवन मूल्य, संस्कृति, विचार, भाव हमारे ग्राम्य वातावरण में सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि साहित्यकार समाज के प्रति उत्तरदायी होता है। परिषद के क्षेत्रीय संगठन मंत्री विपिन चंद्र पाठक ने भी अपनी बात रखते हुए कहा कि हमें अपनी क्षेत्रीय भाषा में बोली जाने वाली लोकोक्ति- मुहावरों का संग्रह करना चाहिए । उसे अपनी अगली पीढ़ी तक पहुंचाना अति आवश्यक है, जिससे वह युवा पीढ़ी हमारी संस्कृति से जुड़ी रहे। कार्यक्रम का संचालन बीकानेर से डॉ मोनिका गौड़ ने किया तकनीकी समन्वयक चित्तौड़गढ़ प्रांत महामंत्री पंकज कुमार झा रहे । कार्यक्रम के अंत में आभार प्रदर्शन रुढो राजस्थान के संपादक सुखदेव राव ने व्यक्त किया। इस अवसर पर परिषद के प्रदेश अध्यक्ष डॉ अन्नाराम शर्मा, जितेंद्र शर्मा, सिया चौधरी, श्यामा शर्मा , प्रांत अध्यक्ष विष्णु शर्मा , डॉक्टर करुणा दशोरा, मंगत बादल, सतीश आचार्य, सुखदेव राव,क्षेत्रीय संगठन मंत्री विपिन चंद्र पाठक, डॉ रेनू सिरोया, सुरेंद्र सोनी, हनुमान प्रसाद, बीना गुप्ता, विजय सिंह, नवीन झा, शिवराज भारतीय, डॉ दिलीप धींग सहित परिषद के प्रमुख कार्यकर्ता उपस्थित रहे।कार्यक्रम संयोजक डॉ शिवदान सिंह जोलावास ने भी तीन दिन से गोष्ठी से जुड़े सभी कार्यकर्ताओं, वक्ताओं और मीडिया का धन्यवाद ज्ञापित किया।
📒 CP MEDIA 🙏
अपनी टिप्पणी /कमेंट लिखें 👇🏽



यहां व्यक्त कीजिए - खबर आपकी नजर में...