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*छब्बीस साल बाद छपी ‘मरु कृषक’*
*कुलपति प्रो. आर. पी. सिंह ने किया ई-संस्करण का विमोचन*
किसान फिर पढ़ सकेंगे
बीकानेर, 1 जून। स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर. पी. सिंह ने सोमवार को कृषि महाविद्यालय द्वारा प्रकाशित त्रैमासिक पत्रिका ‘मरु कृषक’ के ई-संस्करण का विमोचन किया। पत्रिका में देश के विभिन्न क्षेत्रों के पचास से अधिक कृषि वैज्ञानिकों के आलेख प्रकाशित किए गए हैं। महाविद्यालय द्वारा वर्ष 1994 तक इस पत्रिका का प्रकाशन किया जाता था। इसके बाद इसका प्रकाशन बंद था। कुलपति की पहल पर 26 साल बाद इसे पुनः प्रारम्भ किया गया है। लाॅकडाउन के कारण वर्तमान में इसका ई-संस्करण विमोचित किया गया है।
इस अवसर पर कुलपति ने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों के अनुसंधान एवं कृषि संबंधी जानकारी किसानों तक पहुंचे, इसके मद्देनजर यह शुरूआत की गई है। इससे किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त होगा। उन्होंने बताया कि इस अंक में केंचुए की खाद तैयार करने, जैविक खेती एवं इसके प्रबंधन, ई-कृषि की संभावनाएं, बीजोपचार, जलवायु परिवर्तन का फसल उत्पादन पर प्रभाव, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, भूमि सुधार के लिए जिप्सम का उपयोग, बीज प्रसंस्करण, डिजिटल प्रौद्योगिकी में आय वृद्धि जैसी जानकारियां संकलित की गई हैं। उन्होंने कहा कि यह पत्रिका विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध रहेगी। साथ ही कृषि विज्ञान केन्द्रों के माध्यम से किसानों तक पहुंचाई जाएगी।
कुलपति ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में डिजिटलाइजेशन को सर्वाधिक महत्व दिया जा रहा है। इसके मद्देनजर विश्वविद्यालय द्वारा भी ऐसे नवाचार हो रहे हैं। विश्वविद्यालय द्वारा लाॅकडाउन के दौरान कृषक एवं विद्यार्थी ई-संवाद, ई-लर्निंग, वेबिनार के माध्यम से प्रशिक्षण जैसे कार्य किए गए। इनसे किसानों को लाभ हुआ है। उन्होंने बताया कि पत्रिका में राज्यपाल श्री कलराज मिश्र, मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत, कृषि मंत्री श्री लालंचंद कटारिया के संदेश, मार्गदर्शन स्वरूप प्रकाशित किए गए हैं। भविष्य में भी अधिक से अधिक तकनीकी जानकारियां संकलित करने का प्रयास किया जाएगा।
पत्रिका के प्रधान संपादक तथा कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. आई. पी. सिंह ने बताया कि ‘मरु कृषक’ के माध्यम से तथ्यपरक एवं सटीक तकनीकी ज्ञान किसानों तक पहुंचाया जाएगा। इसके लिए संपादक मंडल का गठन किया गया है।
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