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कोविड-19 की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में प्रभावित नहीं हो कृषि शिक्षा-राज्यपाल
एसकेआरएयू की नेशनल वेबिनार प्रारम्भ
बीकानेर, 26 जून। राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री कलराज मिश्र ने कहा कि कृषि विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने के बाद कृषि वैज्ञानिक के रूप में देश की सेवा करता है। खेती की नई तकनीकें किसानों तक पहुंचाकर खाद्यान्नों का उत्पादन और गुणवत्ता बढ़ाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देता है। ऐसे में यह जरूरी है कि
कोविड-19 जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी कृषि शिक्षा प्रभावित नहीं हो। इसके लिए कृषि विश्वविद्यालयों में समन्वित प्रयास किए जाएं।
कुलाधिपति श्री मिश्र ने शुक्रवार को स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय में ‘कृषि शिक्षा प्रणाली के सृदृढ़ीकरण हेतु रणनीतिः कोविड-19 के बदलते परिदृश्य के तहत’ विषयक दो दिवसीय नेशनल वेबिनार के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए यह उद्गार व्यक्त किए।
श्री मिश्र ने कहा कि वैश्विक महामारी कोविड-19 ने दुनिया की गति रोक सी दी है। दुनिया के लगभग सभी देश इससे प्रभावित हुए हैं। उद्योग, धंधों और रोजगार पर भी इसका विपरीत प्रभाव पड़ा है। इसने शैक्षणिक व्यवस्था को भी प्रभावित किया है। पिछले चार महीनों से शैक्षणिक गतिविधियां लगभग ठप्प हैं। स्कूली स्तर की विभिन्न कक्षाओं के विद्यार्थियों को बिना परीक्षा अगली कक्षा में क्रमोन्नत किया गया है। ऐसे में यह जरूरी है कि कृषि शिक्षा प्रभावित नहीं हो तथा कृषि विद्यार्थियों को पर्याप्त अवसर मिले।
राज्यपाल श्री मिश्र ने कहा कि पानी की बूंद-बूंद पानी बचाना तथा बरसाती जल का संग्रहण करना आज सबसे बड़ी आवश्यकता है। किसान भी पानी का उपयोग पूर्ण सावधानी से करें।
श्री मिश्र ने कहा कि हमारे देश की कुल जनसंख्या की साठ प्रतिशत जनसंख्या कामगार श्रेणी की है, जबकि इनमें से सिर्फ 3 से चार प्रतिशत युवाओं को ही संस्थागत प्रशिक्षण मिला है। इस ओर ध्यान देने की जरूरत है। आज ऐसे समन्वित प्रयास करने की जरूरत है कि उपाधि ग्रहण करने के बाद युवा को रोजगार के लिए भटकना नहीं पड़े। शिक्षित युवा ‘जाॅब प्रोवाइडर’ बनकर उभरे।
राज्यपाल ने कहा कि आज सूचना तकनीकी का दौर है। मोबाइल और इंटरनेट का चलन बढ़ा है। कृषि शिक्षा में इन तकनीकों का भरपूर उपयोग किया जाए।
श्री मिश्र ने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले। उत्पादों के मूल्य संवर्धन एवं विपणन की दिशा में भी कार्य हो। किसानों की आय बढ़ाने के लिए किसान समन्वित कृषि प्रणाली अपनाएं। उन्होंने कहा कि भारत, गांवों का देश है। गांव उठेगा तो देश उठेगा।
विश्वविद्यालय के प्रयासों को सराहा
कुलाधिपति श्री मिश्र ने लाॅकडाउन के दौरान विश्वविद्यालय द्वारा की जा रही गतिविधियों को सराहा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा कुलपति कृषक और कुलपति विद्यार्थी ई-संवाद, किसानों के लिए आॅनलाइन प्रशिक्षण, ई-अध्यापन जैसी पहल की है। इससे कृषि विद्यार्थियों को लाभ हुआ है। उन्होंने कृषि और कृषि कल्याण के क्षेत्र में विश्वविद्यालय को सतत रूप से प्रयासरत रहने का आह्वान किया।
राज्यपाल ने किया ई-विमोचन एवं उद्घाटन
वेबिनार के उद्घाटन सत्र में राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री कलराज मिश्र ने विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित ‘कृषि मार्गदर्शिका 2020-21’ के ई-संस्करण का विमोचन किया तथा विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित समन्वित कृषि प्रणाली इकाई की शिलापट्टिका का ई-उद्घाटन किया।
सतत प्रयासों से मिले स्वर्णिम परिणाम
स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर. पी. सिंह ने विश्वविद्यालय की गतिविधियों एवं भावी कार्ययोजना की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय परिवार के सभी सदस्यों के समन्वित प्रयासों से स्वर्णिम सफलता हासिल हो सकी है। उन्होंने विश्वविद्यालय के एक्रीडेशन, एग्रो टूरिज्म की संभावनाओं, बेकरी यूनिट, सौलर संयंत्र स्थापना, मोबाइल फ्रेंडली वेबसाइट, स्वच्छता अभियान, पौधारोपण, विभिन्न संस्थाओं के साथ किए एमओयू आदि के बारे में जानकारी दी।
कुलपति ने बताया कि दो दिवसीय वेबिनार के दौरान कुल 14 व्याख्यान होंगे। इनमें आइसीएआर के वरिष्ठ अधिकारी तथा देशभर के दस वर्तमान अथवा पूर्व कुलपति अपनी बात रखेंगे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के ऐसे प्रयासों से कृषि विद्यार्थियों को अधिक से अधिक लाभ हो। अतिरिक्त निदेशक अनुसंधान तथा वेबिनार प्रभारी प्रो. एन. के. शर्मा ने बताया कि वेबिनार का आयोजन राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना के तहत किया जा रहा है। उन्होंने राज्यपाल एवं कुलाधिपति तथा अन्य वक्ताओं का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन सहायक आचार्य विवेक व्यास ने किया।
पहले दिन आयोजित हुए व्याख्यान
वेबिनार के पहले दिन सात व्याख्यान हुए। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक (कृषि शिक्षा) डाॅ. रमेश चंद्र अग्रवाल ने भारत में शिक्षा प्रणाली, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय उदयपुर के कुलपति डाॅ. एन. एस. राठौड़ ने उच्च श्रेणी के शैक्षाणिक संस्थानों के विकास हेतु रणनीति विषय पर अपनी बात रखी। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सहायक महानिदेशक (कृषि शिक्षा) डाॅ. पी. एस. पांडेय ने प्रयोगात्मक शिक्षण प्रयोगशालाओं के माध्यम से कृषि उद्यमिता का विकास, राजुवास के कुलपति प्रो. विष्णु शर्मा ने संस्थानों के परस्पर सहयोग द्वारा संसाधनों का समुचित उपयोग और शैक्षणिक उत्कृष्टता तथा कृषि अर्थशास्त्र, आइसीएआर की प्रमुख डाॅ. अलका सिंह ने कोविड-19 के बाद के परिदृश्य में आॅनलाइन कृषि शिक्षा की स्थिति, राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना के समन्वयक डाॅ. आर. बी. शर्मा ने देश में कृषि शिक्षा के विकास में परियोजना की महत्ता तथा कम्प्यूटर अनुप्रयोग प्रमुख डाॅ. सुदीप मारवाह ने आज का दौर और सूचना प्रौद्योगिकी पर व्याख्यान दिया।
वेबिनार के आयोजन में इंजी. विपिन लढ्ढा, डाॅ. अरविंद झांझड़िया, डाॅ. अमित कुमावत, डाॅ. बी. डी. एस. नाथावत आदि ने भागीदारी निभाई।
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