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19 से हैरान-परेशान जिंदगी कब
लौटेगी पटरी पर?
क्या है टाइमलाइन
"ऐसी संभावना है कि ये वायरस
एसएआरएस की तरह हिट एंड रन
वायरस साबित हो सकता है और शायद
दोबारा कभी न लौटे"
नईदिल्ली । जिंदगी के
आम पटरी पर लौटने में कितना वक्त
लगेगा? दुनिया के सबसे बड़े लॉकडाउन
के दूसरे हफ्ते में प्रवेश के साथ ये सवाल
हर जुबान पर है. धरती की आबादी के
पांचवें हिस्से यानी भारत के लिए
नजदीकी भविष्य कैसा है? दर्जनों राष्ट्रीय-
अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों और विशेषज्ञों की
राय का निचोड़ आपके सामने पेश कर
रहा है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि
तीन हफ्ते के लॉकडाउन की कामयाबी
या नाकामी पर ही भारत की नोवेल
कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई का
नतीजा निर्भर करेगा। अगर देश बीमारी
के फैलने पर 14 अप्रैल तक नियंत्रण
रख पाता है तो एक महीने के अंदर
जिंदगी सामान्य हो सकती है. वो भी लोगों
के निजी स्तर पर और संस्थानों की ओर
से सावधानियां बरतने, सोशल डिस्टेंसिंग
उपायों का पालन करने के साथ।
सार्वजनिक कार्यक्रम या बड़ी संख्या में
लोगों का इकट्ठा होना अगले कुछ महीनों
के लिए प्रतिबंधित रहेगा। सरकार को
सर्दियों में बीमारी के फिर सिर उठाने की
संभावना से निपटने के लिए भी तैयारी
करनी होगी, लेकिन अगर लॉकडाउन
नाकाम रहता है तो विशेषज्ञ आशंका
जताते हैं कि देश को कम से कम 6 से
8 महीने संकट से रिकवर करने में लग
सकते हैं। कुछ विशेषज्ञ और स्टडीज का
मानना है कि गर्मी और आद्रता वायरस के
संक्रमण की रफ्तार को धीमा कर सकती
है। कंफेडेरेशन ऑफ मेडिकल
एसोसिएशन्स इन एशिया एंड ओशेनिया
के अध्यक्ष डॉ.के.के. अग्रवाल कहते हैं,
'ऐसी संभावना है कि ये वायरस
एसएआरएस की तरह हिट एंड रन
वायरस साबित हो सकता है और शायद
दोबारा कभी न लौटे। ये भी संभावना है
जैसे कि अटकलें लगाईं जा रही हैं कि
गर्मी और आद्रता की वजह से मई, जून
और जुलाई के महीनों में वायरस इतना
असरदार न रहे।Ó अगर ऐसा होता है तो
सामान्य जनजीवन गर्मी के शुरू होने के
साथ मई और जून में पटरी पर लौट
सकता है। सोशल डिस्टेंसिंग जैसी
सावधानियां बरतना, बड़ी सभाओं पर
रोक जैसे कदम सर्दियों के शुरू होने तक
जारी रहने चाहिए। संक्रमण फैलने की
एक और लहर साल के आखिर तक
संभव है।
(साभार हिस) युगपक्ष
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