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दुनिया का सबसे
महत्वाकांक्षी प्रयास
भारत द्वारा बुधवार को अगले 21
दिनों के लॉकडाउन की घोषणा के बाद
देश की 130 करोड़ आबादी अपने घर से
नहीं निकल पाएगी। कोरोना वायरस के
संकट से मुकाबले के लिए यह दुनिया का
सबसे महत्वाकांक्षी प्रयास है। भारत में
कोरोना वायरस के अबतक 562 मामले
सामने आ चुके हैं और नौ लोगों की मौत
हो चुकी है। पीएम मोदी ने मंगलवार शाम
तीन सप्ताह के लॉकडाउन की घोषणा की
है। वैसे एटीएम से कैश निकालने के लिए
भी लॉकडाउन से छूट मिलती है। लेकिन
अगर एटीएम आपके घर से दूर हो तो
मुश्किल बढ़ सकती है। ऐसे में बैंक खुद
आपको आपके घर पैसे देने आएगा। हम
आपको बताने जा रहे हैं यह कैसे मुमकिन
होगा।
ये बैंक करते हैं नकदी की
होम डिलीवरी
लॉकडाउन के दौरान बैंक जरूरी सेवाओं
को जारी रखेंगे। एसबीआई, एचडीएफसी
बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक तथा एक्सिस
बैंक अपने ग्राहकों को घर पर कैश
डिलीवरी की सुविधा प्रदान करते हैं।
एसबीआई आपके घर तक
पहुंचाएगा कैश
देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक
एसबीआई आपके घर तक नकदी पहुंचाने
की सुविधा प्रदान करता है। यही नहीं,
आपके घर पर ही बैंक आपके पैसे जमा
लेने की भी सुविधा प्रदान करता है।
100 रुपये का शुल्क
मेडिकल इमर्जेंसी के दौरान
एसबीआई का ग्राहक 100 रुपये का
शुल्क चुकाकर बैंक की इस अनोखी
सुविधा का फायदा उठा सकता है।
एचडीएफसी बैंक में भी यह सुविधा
एचडीएफसी बैंक भी अपने
खातधारक को घर पर नकदी पहुंचाने की
सुविधा प्रदान करता है। कैश लिमिट
5,000-25,000 रुपये है और इसके
लिए बैंक 100-200 रुपये का शुल्क
लेता है।
एक्सिस, कोटक महिंद्रा भी
देता है यह सुविधा एक्सिस बैंक तथा कोटक महिंद्रा
बैंक भी यह सुविधा प्रदान करता है।
इस वर्ष ज्यादा कर्ज ले
सकती है सरकार
दोनों सूत्रों ने बताया कि सरकार
वित्त वर्ष 2020-21 के लिए कर्ज में
इजाफा कर सकती है। सरकार ने आगामी
विा वर्ष के लिए 7.8 लाख करोड़ रुपये
का कर्ज लेने की योजना बनाई है। उन्होंने
कहा कि केंद्रीय बैंक से सरकारी
प्रतिभूतियों को खरीदने के लिए कहा गया
था, हालांकि महंगाई बढऩे के डर से पिछले
एक दशक से आरबीआई ने ऐसा नहीं
किया है। अधिकारी ने कहा, आरबीआई
को दुनिया के अन्य केंद्रीय बैंकों की तरह
ही बॉन्ड खरीदना पड़ेगा।
आरबीआई की विशेष सुविधा का भी इस्तेमाल
उन्होंने बताया कि अगर नकदी की
किल्लत हुई तो केंद्र सरकार आरबीआई की
वेज-ऐंड-मिंस सुविधा का भी इस्तेमाल
कर सकती है, जो केंद्रीय बैंक द्वारा राज्यों
को दी जाने वाली ओवरड्राट फैसिलिटी
है। वित्त मंत्रालय ने हालांकि इस योजना
पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
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साथ ही पढ़ें 👉 कोरोना वायरस को फैलने से रोकने संबंधित जानकारी
10 करोड़ गरीबों के अकाउंट में
सीधे पैसे डाल सकती है सरकार
सीधे पैसे डाल सकती है सरकार
नई दिल्ली ( साभार हिस)। कोरोना
वायरस के बढ़ते मामलों पर लगाम
लगाने के लिए किए गए लॉकडाउन की
वजह से देश की अर्थव्यवस्था पर पडऩे
वाले असर को दूर करने के लिए सरकार
ने कमर कस ली है। केंद्र इसके लिए
1.5 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक
प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा कर सकता
है। मामले की जानकारी रखने वाले दो
सूत्रों ने यह जानकारी दी है। पहचान
जाहिर न करने की शर्त पर सूत्रों ने
बताया कि सरकार ने अभी पैकेज को
अंतिम रूप नहीं दिया है और इसपर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय, वित्त
मंत्रालय तथा भारतीय रिजर्व बैंक के
बीच बातचीत चल रही है। सूत्रों में से
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि
प्रोत्साहन पैकेज 2.3 लाख करोड़ रुपये
तक का हो सकता है, हालांकि अंतिम
आंकड़े को लेकर बातचीत जारी है। इस
सप्ताह के अंत तक इसकी घोषणा हो
सकती है। उन्होंने कहा कि इन पैसों का
इस्तेमाल 10 करोड़ जनता के अकाउंट
में पैसे सीधे ट्रांसफर करने और
लॉकडाउन से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए
बिजनस की मदद करने के लिए किया
जा सकता है।
वायरस के बढ़ते मामलों पर लगाम
लगाने के लिए किए गए लॉकडाउन की
वजह से देश की अर्थव्यवस्था पर पडऩे
वाले असर को दूर करने के लिए सरकार
ने कमर कस ली है। केंद्र इसके लिए
1.5 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक
प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा कर सकता
है। मामले की जानकारी रखने वाले दो
सूत्रों ने यह जानकारी दी है। पहचान
जाहिर न करने की शर्त पर सूत्रों ने
बताया कि सरकार ने अभी पैकेज को
अंतिम रूप नहीं दिया है और इसपर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय, वित्त
मंत्रालय तथा भारतीय रिजर्व बैंक के
बीच बातचीत चल रही है। सूत्रों में से
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि
प्रोत्साहन पैकेज 2.3 लाख करोड़ रुपये
तक का हो सकता है, हालांकि अंतिम
आंकड़े को लेकर बातचीत जारी है। इस
सप्ताह के अंत तक इसकी घोषणा हो
सकती है। उन्होंने कहा कि इन पैसों का
इस्तेमाल 10 करोड़ जनता के अकाउंट
में पैसे सीधे ट्रांसफर करने और
लॉकडाउन से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए
बिजनस की मदद करने के लिए किया
जा सकता है।
दुनिया का सबसे
महत्वाकांक्षी प्रयास
भारत द्वारा बुधवार को अगले 21
दिनों के लॉकडाउन की घोषणा के बाद
देश की 130 करोड़ आबादी अपने घर से
नहीं निकल पाएगी। कोरोना वायरस के
संकट से मुकाबले के लिए यह दुनिया का
सबसे महत्वाकांक्षी प्रयास है। भारत में
कोरोना वायरस के अबतक 562 मामले
सामने आ चुके हैं और नौ लोगों की मौत
हो चुकी है। पीएम मोदी ने मंगलवार शाम
तीन सप्ताह के लॉकडाउन की घोषणा की
है। वैसे एटीएम से कैश निकालने के लिए
भी लॉकडाउन से छूट मिलती है। लेकिन
अगर एटीएम आपके घर से दूर हो तो
मुश्किल बढ़ सकती है। ऐसे में बैंक खुद
आपको आपके घर पैसे देने आएगा। हम
आपको बताने जा रहे हैं यह कैसे मुमकिन
होगा।
ये बैंक करते हैं नकदी की
होम डिलीवरी
लॉकडाउन के दौरान बैंक जरूरी सेवाओं
को जारी रखेंगे। एसबीआई, एचडीएफसी
बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक तथा एक्सिस
बैंक अपने ग्राहकों को घर पर कैश
डिलीवरी की सुविधा प्रदान करते हैं।
एसबीआई आपके घर तक
पहुंचाएगा कैश
देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक
एसबीआई आपके घर तक नकदी पहुंचाने
की सुविधा प्रदान करता है। यही नहीं,
आपके घर पर ही बैंक आपके पैसे जमा
लेने की भी सुविधा प्रदान करता है।
100 रुपये का शुल्क
मेडिकल इमर्जेंसी के दौरान
एसबीआई का ग्राहक 100 रुपये का
शुल्क चुकाकर बैंक की इस अनोखी
सुविधा का फायदा उठा सकता है।
एचडीएफसी बैंक में भी यह सुविधा
एचडीएफसी बैंक भी अपने
खातधारक को घर पर नकदी पहुंचाने की
सुविधा प्रदान करता है। कैश लिमिट
5,000-25,000 रुपये है और इसके
लिए बैंक 100-200 रुपये का शुल्क
लेता है।
एक्सिस, कोटक महिंद्रा भी
देता है यह सुविधा एक्सिस बैंक तथा कोटक महिंद्रा
बैंक भी यह सुविधा प्रदान करता है।
इस वर्ष ज्यादा कर्ज ले
सकती है सरकार
दोनों सूत्रों ने बताया कि सरकार
वित्त वर्ष 2020-21 के लिए कर्ज में
इजाफा कर सकती है। सरकार ने आगामी
विा वर्ष के लिए 7.8 लाख करोड़ रुपये
का कर्ज लेने की योजना बनाई है। उन्होंने
कहा कि केंद्रीय बैंक से सरकारी
प्रतिभूतियों को खरीदने के लिए कहा गया
था, हालांकि महंगाई बढऩे के डर से पिछले
एक दशक से आरबीआई ने ऐसा नहीं
किया है। अधिकारी ने कहा, आरबीआई
को दुनिया के अन्य केंद्रीय बैंकों की तरह
ही बॉन्ड खरीदना पड़ेगा।
आरबीआई की विशेष सुविधा का भी इस्तेमाल
उन्होंने बताया कि अगर नकदी की
किल्लत हुई तो केंद्र सरकार आरबीआई की
वेज-ऐंड-मिंस सुविधा का भी इस्तेमाल
कर सकती है, जो केंद्रीय बैंक द्वारा राज्यों
को दी जाने वाली ओवरड्राट फैसिलिटी
है। वित्त मंत्रालय ने हालांकि इस योजना
पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
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