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तीन दिवसीय जीवन का आधार-गीता का सार विषयक
प्रवचन माला शुरू
गीता में हर समस्या का समाधान- ब्रह्माकुमारी उषा दीदी
बीकानेर, 22 फरवरी। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के क्षेत्रीय केन्द्र सार्दुलगंज की ओर से ’सहज राजयोग से स्वस्थ एवं खुशहाल जीवन’’ विषयान्तर्गत तीन दिवसीय ’’जीवन का आधार-गीता का सार’’ प्रवचन माला शनिवार को वेटरनरी विश्व विद्यालय प्रेक्षागृह शुरू हुई। मुख्य वक्ता देश-विदेश में गीता प्रवचनों के लिए विख्यात राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी उषा दीदी थीं। उन्होंने प्रथम दिन गीता के अमृृत,ज्ञान व रहस्यों की विस्तृत व्याख्या करते हुए इसमें हर समस्या का समाधान बताया। वे रविवार व सोमवार शाम पांच बजे ’’गीता वर्णित सांख्य योगः आत्मज्ञान और स्थित प्रज्ञ’’ और ’’भगवद् दर्शन का वास्तविक स्वरूप’’ विषय पर प्रवचन करेंगी।
शनिवार महापौर सुशीला राजपुरोहित, बी.के.उषा, बी.के.कमल, उद्योगपति शिव रतन अग्रवाल उर्फ फन्ना बाबू, वेटरनरी विश्व विद्यालय के डीन डाॅ.राकेश राव, डाॅ.शंकर लाल जाखड़ व डाॅ.शुक्ला बाला पुरोहित आदि अतिथियों ने दीप प्रज्जवलित कर प्रवचन माला का आगाज किया।
पैतीस वर्षों से मानव सेवा के लिए प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरी विश्व विद्यालय, माउंट आबू में प्रभु समर्पित बी.के.उषा दीदी ने कहा कि गीता में व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक, राष्ट्रीय और वैश्विक समस्या का समाधान है। सार्वभौमिक यह ग्रंथ सभी धर्म मजहबों के लिए कल्याणकारी व हर परिस्थिति में राह दिखाने वाला है। महात्मा गांधी, रविन्द्र नाथ टैगोर व स्वामी विवेकानंद आदि महापुरुषों ने जीवन में गीता को अपनाकर महानता के शिखर पर पहुंचे। इस ग्रंथ का विश्व की अनेक भाषाआंे में अनुवाद हुआ है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान मं प्रत्येक व्यक्ति जीवन की चुनौतियों से गुजर रहा है, उसके दिलो दिमाग में महाभारत चलता रहता है। जब व्यक्ति को जीवन आसार लगने लगता है, उसके पास कुछ भी नहीं बचता, उसके विश्वास, मूल्य, धैर्य,दया आदि मानवीय मूल्यों की सभी हदें टूट रही है, ऐसे में गीता जैसे महानग्रंथ ही उसे सही मार्ग दिखा सकते हैं । गीता के 18 अध्याय, 700 श्लोकों में अतुलनीय ज्ञान है। यह ज्ञान धर्मों की मर्यादा व पवित्रता और मानवीयता को कायम रखने का संदेश देते है तथा हर समस्या का समाधान बताते हैं।
सितम्बर 2019 को अमेरिका सेवेलनेस एम्बेसेडर एट मनोबल आॅडर्स आॅफडिग्नीटरीज एण्ड फिलेन्थ्रपिस्ट जी.ओ.डी. अवार्ड से सम्मानित देश-विदेश में हजारों प्रवचन, सेमिनार और सम्मेलनों में सम्बोधित करने वाली बी.के.उषा ने एनिमेटेड स्लाईड शो के साथ गीता ज्ञान की अद्भूत प्रस्तुति मंें बताया कि वेद व्यासजी ने पांच हजार साल पहले वर्तमान में मानव की चुनौतियों को दिव्य दृृष्टि से देखा तथा उसका समाधान बताया। उन्होंने बताया कि गीता में प्रेम, कर्तव्य, धीरज, संतोष, शांति, सिद्धि और मोक्ष प्राप्ति का उपदेश दिया गया है। गीता हमें जीवन के शत्रुओं से लड़ना सिखाती है और ईश्वर से एक गहरा नाता जोड़ने में मदद करती है। कर्म को महत्व देने वाली गीताजी हमें अहंकार, ईष्र्या व लोभ आदि का त्याग कर मानवता को अपनाने का ज्ञान देती है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में मोबाइल शुकुनि के रूप् में घर-घर में पहुंच गया है। मोबाइल से बच्चों सहित सभी आयु वर्ग के लोगों की मानसिकता विकृृत हो रही है। लोग एडिक्शन व पागलपन और अनेक बुराइयों से ग्रसित हो रहे है। मोबाइल से होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए अनेक देशों कें सेंटर भी स्थापित हो गए है। मोबाइल आने वाली पीढ़ी को संस्कारों से दूर कर दूराचार बढ़ा रहा है।
बी.के.उषा ने महाभारत के विभिन्न पात्रों के नाम अनुसार शब्दार्थ करते हुए कहा कि पांडव अर्थात धर्म का आचरण करने वाले, युद्ध में स्थिर बुद्धि वाला युधिष्टर, आत्म शक्ति संपन्न अर्थात भीम, अर्जित करने वाले सकारात्मक भाव रखने वाला अर्जुन, नियमों व सिद्धान्तों परर चलने वाला नकुल, सहयोगी, दिव्य दृष्टि व दिव्य बुद्धि वाले को सहदेव कहा गया है। कौरव अर्थात अधर्म, राजसता, बाहुल्य या भूमि के अभिमानवाला, गांधारी अर्थात आंखों पर सदा पट््टी बांधे हुए । उन्होंने कहा कि कौरवों के सभी नाम दुः से शुरू होते है। दुः का उपसर्ग है दुख और दुष्टता के भाव व्यक्त करने वाले। धृृतराष्ट्र यानि राष्ट्र केा धृृत भावना से हड़पने वाला, महत्वाकांक्षी, स्वार्थी व अभिमानी। उन्होंने कहा कि कौरवों की बजाए पांडवों के संस्कार ग्रहण करें तथा धर्म का आचरण करते हुए परमात्मा से प्रेम करें। गीता के ज्ञान को हृृदयांगम करते हुए उसके अनुसार जीवन बनाएं।
📒 📰 📑 पढ़ना और पढ़ाना जीवन सफल बनाना 📚 📖 📓
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तीन दिवसीय जीवन का आधार-गीता का सार विषयक
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गीता में हर समस्या का समाधान- ब्रह्माकुमारी उषा दीदी
बीकानेर, 22 फरवरी। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के क्षेत्रीय केन्द्र सार्दुलगंज की ओर से ’सहज राजयोग से स्वस्थ एवं खुशहाल जीवन’’ विषयान्तर्गत तीन दिवसीय ’’जीवन का आधार-गीता का सार’’ प्रवचन माला शनिवार को वेटरनरी विश्व विद्यालय प्रेक्षागृह शुरू हुई। मुख्य वक्ता देश-विदेश में गीता प्रवचनों के लिए विख्यात राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी उषा दीदी थीं। उन्होंने प्रथम दिन गीता के अमृृत,ज्ञान व रहस्यों की विस्तृत व्याख्या करते हुए इसमें हर समस्या का समाधान बताया। वे रविवार व सोमवार शाम पांच बजे ’’गीता वर्णित सांख्य योगः आत्मज्ञान और स्थित प्रज्ञ’’ और ’’भगवद् दर्शन का वास्तविक स्वरूप’’ विषय पर प्रवचन करेंगी।
शनिवार महापौर सुशीला राजपुरोहित, बी.के.उषा, बी.के.कमल, उद्योगपति शिव रतन अग्रवाल उर्फ फन्ना बाबू, वेटरनरी विश्व विद्यालय के डीन डाॅ.राकेश राव, डाॅ.शंकर लाल जाखड़ व डाॅ.शुक्ला बाला पुरोहित आदि अतिथियों ने दीप प्रज्जवलित कर प्रवचन माला का आगाज किया।
पैतीस वर्षों से मानव सेवा के लिए प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरी विश्व विद्यालय, माउंट आबू में प्रभु समर्पित बी.के.उषा दीदी ने कहा कि गीता में व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक, राष्ट्रीय और वैश्विक समस्या का समाधान है। सार्वभौमिक यह ग्रंथ सभी धर्म मजहबों के लिए कल्याणकारी व हर परिस्थिति में राह दिखाने वाला है। महात्मा गांधी, रविन्द्र नाथ टैगोर व स्वामी विवेकानंद आदि महापुरुषों ने जीवन में गीता को अपनाकर महानता के शिखर पर पहुंचे। इस ग्रंथ का विश्व की अनेक भाषाआंे में अनुवाद हुआ है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान मं प्रत्येक व्यक्ति जीवन की चुनौतियों से गुजर रहा है, उसके दिलो दिमाग में महाभारत चलता रहता है। जब व्यक्ति को जीवन आसार लगने लगता है, उसके पास कुछ भी नहीं बचता, उसके विश्वास, मूल्य, धैर्य,दया आदि मानवीय मूल्यों की सभी हदें टूट रही है, ऐसे में गीता जैसे महानग्रंथ ही उसे सही मार्ग दिखा सकते हैं । गीता के 18 अध्याय, 700 श्लोकों में अतुलनीय ज्ञान है। यह ज्ञान धर्मों की मर्यादा व पवित्रता और मानवीयता को कायम रखने का संदेश देते है तथा हर समस्या का समाधान बताते हैं।
सितम्बर 2019 को अमेरिका सेवेलनेस एम्बेसेडर एट मनोबल आॅडर्स आॅफडिग्नीटरीज एण्ड फिलेन्थ्रपिस्ट जी.ओ.डी. अवार्ड से सम्मानित देश-विदेश में हजारों प्रवचन, सेमिनार और सम्मेलनों में सम्बोधित करने वाली बी.के.उषा ने एनिमेटेड स्लाईड शो के साथ गीता ज्ञान की अद्भूत प्रस्तुति मंें बताया कि वेद व्यासजी ने पांच हजार साल पहले वर्तमान में मानव की चुनौतियों को दिव्य दृृष्टि से देखा तथा उसका समाधान बताया। उन्होंने बताया कि गीता में प्रेम, कर्तव्य, धीरज, संतोष, शांति, सिद्धि और मोक्ष प्राप्ति का उपदेश दिया गया है। गीता हमें जीवन के शत्रुओं से लड़ना सिखाती है और ईश्वर से एक गहरा नाता जोड़ने में मदद करती है। कर्म को महत्व देने वाली गीताजी हमें अहंकार, ईष्र्या व लोभ आदि का त्याग कर मानवता को अपनाने का ज्ञान देती है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में मोबाइल शुकुनि के रूप् में घर-घर में पहुंच गया है। मोबाइल से बच्चों सहित सभी आयु वर्ग के लोगों की मानसिकता विकृृत हो रही है। लोग एडिक्शन व पागलपन और अनेक बुराइयों से ग्रसित हो रहे है। मोबाइल से होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए अनेक देशों कें सेंटर भी स्थापित हो गए है। मोबाइल आने वाली पीढ़ी को संस्कारों से दूर कर दूराचार बढ़ा रहा है।
बी.के.उषा ने महाभारत के विभिन्न पात्रों के नाम अनुसार शब्दार्थ करते हुए कहा कि पांडव अर्थात धर्म का आचरण करने वाले, युद्ध में स्थिर बुद्धि वाला युधिष्टर, आत्म शक्ति संपन्न अर्थात भीम, अर्जित करने वाले सकारात्मक भाव रखने वाला अर्जुन, नियमों व सिद्धान्तों परर चलने वाला नकुल, सहयोगी, दिव्य दृष्टि व दिव्य बुद्धि वाले को सहदेव कहा गया है। कौरव अर्थात अधर्म, राजसता, बाहुल्य या भूमि के अभिमानवाला, गांधारी अर्थात आंखों पर सदा पट््टी बांधे हुए । उन्होंने कहा कि कौरवों के सभी नाम दुः से शुरू होते है। दुः का उपसर्ग है दुख और दुष्टता के भाव व्यक्त करने वाले। धृृतराष्ट्र यानि राष्ट्र केा धृृत भावना से हड़पने वाला, महत्वाकांक्षी, स्वार्थी व अभिमानी। उन्होंने कहा कि कौरवों की बजाए पांडवों के संस्कार ग्रहण करें तथा धर्म का आचरण करते हुए परमात्मा से प्रेम करें। गीता के ज्ञान को हृृदयांगम करते हुए उसके अनुसार जीवन बनाएं।
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