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समाज की सहभागिता बिना भाषा के विकास की कल्पना नहीं की जा सकती-डाॅ. शर्मा
तैस्स्तिोरी की 100वीं पुण्यतिथि पर दो दिवसीय कार्यक्रम सम्पन्न
बीकानेर, 23 नवंबर। शार्दुल राजस्थान रिसर्च इस्टीट्यूट के तत्वावधान् में इटली मूल के राजस्थानी भाषा के विद्वान डाॅ. एल. पी. टैस्सीटोरी की 100वीं पुण्यतिथि के अवसर पर दो दिवसीय समारोह के तहत शनिवार को ब्रह्म बगीचा स्थित मुक्ति संस्था परिसर में ‘राजस्थानी भाषा के विकास में समाज की सहभागिता’ विषयक परिसंवाद आयोजित हुआ। अध्यक्षता वरिष्ठ संगीतज्ञ डाॅ. कल्पना शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि समाज की सहभागिता के बिना किसी भी भाषा के विकास की परिकल्पना नहीं की जा सकती। समाज की उपेक्षा के कारण प्रतिदिन अनेक भाषाएं विलुप्त हो रही हैं।
मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अजय जोशी ने कहा कि भाषा की उत्पत्ति समाज से होती है तथा यही पल्लवित-पोषित होकर भाषा वृहद क्षेत्र तक पहुंच पाती है।
वरिष्ठ कवि, साहित्यकार राजेन्द्र जोशी ने कहा कि मां को बच्चे की पहली शिक्षिका माना जाता है। इस कारण एक मां अथवा महिला, भाषा को एक से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचानो में प्रभावी भूमिका निभा सकती है।
विशिष्ठ अतिथि डॉ. फारूक चौहान ने कहा कि संस्था द्वारा डॉ टैस्सीटोरी की 100वीं पुण्यतिथि वर्ष पर पूरे साल विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
इससे पहले युवा साहित्यकार शशांक शेखर जोशी द्वारा परिसंवाद के विषय पर आधारित पत्रवाचन किया गया। इससे पहले आगंतुकों ने टैस्सीटोरी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। कार्यक्रम का संचालन राजाराम स्वर्णकार ने किया।
इस अवसर पर कवि कथाकार नदीम अहमद नदीम, एन डी रंगा, चतुर्भुज शर्मा, हीरालाल हर्ष, चन्द्रशेखर जोशी, डॉ. नमामी शंकर आचार्य ने भी विचार रखे। कार्यक्रम में मुरली मनोहर पुरोहित, भंवर लाल मेघवाल, मार्कण्डेय पुरोहित, चैन सिंह, गायक कौशल्या रामावत, नारायण दास रंगा सहित अनेक साहित्कार एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थेे। प्रेम नारायण व्यास ने आभार व्यक्त किया ।
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