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तीन दिवसीय संस्कार शिविर शुरू
जीवन की सार्थकता सुसंस्कार में-शशि प्रभाजी म.सा.
बीकानेर, 24 अक्टूबर। जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ के गच्छाधिपति आचार्यश्री मणि प्रभ सूरिश्वरजी की आज्ञानुवर्ती प्रवर्तिनी साध्वीश्री शशि प्रभा म.सा. ने कहा है कि जीवन की सार्थकता सुसंस्कारी बनने में है। संस्कार बिना व्यक्ति परिवार, समाज व देश के लिए पशु के समान दर्जा प्राप्त करता है।
साध्वीजी गुरुवार को ढढ्ढा कोटड़ी में तीन दिवसीय संस्कार जागरण शिविर के लिए ढढ्ढा चैक के इंद्रलोक में मंगल आशीर्वाद दे रहीं थीं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में बच्चों व युवाओं में भौतिक सुख-सुविधाएं और एकेडमिक शिक्षा में वृृद्धि हुई है लेकिन आनेवाली पीढ़ी संस्कार विहीन हो रही है। टी.वी. के बाद वाट्््सएप् ने बच्चों के जीवन का नसैर्गिक विकास, खेलकूद, धार्मिक व सामाजिक गतिविधियों से दूर कर दिया है। अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा तथा बस्ते के बोझ ने भी बच्चों को संस्कार विहीन बना रही है।
उन्होंने कहा कि पहले दादा-दादी, माता-पिता बच्चों को कहानियों, किस्सों के माध्यम से तथा मंदिर व अच्छे स्थान पर ले जाकर संस्कारित करने का अनुकरणीय कार्य करते थे । वर्तमान में मोबाइल व वाट््स एप् ने बच्चों के साथ माता-पिता ही नहीं दादा-दादी को भी व्यस्त कर दिया है। बच्चों का दिमाग धीरे-धीरे विकसित होना चाहिए वह वर्तमान में फर्जिलाज हो रहा है। जो बातें युवा अवस्था में सीखनी समझनी चाहिए वे अब बाल व किशोर अवस्था में सीख व समझ रहे है। यह स्थिति हर परिवार व समाज के लिए ज्ञातक है। अभिभावक को स्वयं सचेष्ट रहते हुए मोबाइल से बातचीत करने वाट््स एप, इंस्ट्राग्राम व ईमेल का संचालन करने में जितना जरूरी हो उतना ही समय देना चाहिए। टाइम पास व मनोरंजन के लिए नहीं । अपने बच्चों को ही बहलाने में मोबाइल नहीं पकड़वाएं तथा दूसरे खेल, गीत व अन्य मनोरंजन के साधनों, धार्मिक गतिविधियों में व्यस्त करें।
शिविर में साध्वीश्री सौम्यगुणा ने कहा कि बच्चों के सर्वांगींण विकास के लिए संस्कार जागरण शिविर वर्तमान में महती आवश्यकता है। इस आवश्यकता को अभिभावक समझें तथा अपने बच्चों को संस्कारित बनाने में समर्पित भाव से कार्य करें। साध्वीश्री संवेग प्रज्ञा व श्रमणी प्रज्ञा ने जैन धर्म सहित मार्मिक व उल्लेखनीय बातों को बताया। नवंकार महामंत्र व सरस्वती के बीज मंत्र के साथ शुरू हुए शिविर में विभिन्न स्कूलों व काॅलेजों के लगभग 250 विद्यार्थी हिस्सा ले रहे है इनमें कई बच्चे जैनेतर समाज के भी शामिल है। बच्चों के विकास के लिए विशेषज्ञ उन्हें कैलोग्राफी, व्यक्तित्व विकास का प्रशिक्षण विभिन्न कलांश में दे रहे हैं। शिविर जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ, श्री खरतरगच्छ युवा परिषद, बीकानेर, खरतरगच्छ महिला परिषद, बालक-बालिका मंडल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। शिविरार्थियों बाहर से आने वाले यात्रियों के अल्पहार व भोजन का लाभ कन्हैयालाल, महावीर व नमन कुमार नाहटा परिवार ने लिया है।
भगवान शांति नाथ मंदिर में पूजा
साध्वीश्री शशि प्रभा के सान्निध्य में गुरुवार को नाहटा चैक के भगवान शांति नाथ मंदिर में अंतरायकर्मों की निर्जरा के लिए भक्ति संगीत के साथ पूजन किया गया। पूजा के दौरान विचक्षण महिला मंडल, सुनील पारख आदि ने भक्ति गीत पेश किए।
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