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खबरों में बीकानेर 🎤 🌐
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रघुकुल रीत सदा चल आई, प्राण जाई पर वचन न जाई
बीकानेर। स्थानीय गर्वमेन्ट प्रेस रोड स्थित गोपीनाथ मंदिर में रविवार को रामलीला महेंद्र सिंह राजपुरोहित की स्मृति में शहरी जन कल्याण सेवा संस्थान एवं श्री राम रामलीला कमेटी द्वारा मंचित रामलीला में चौथे दिन दशरथ-कैकेयी संवाद, मंथरा-कैकेयी संवाद, भरत-केकैयी संवाद व राम वनवास आदि दृश्यों का मंचन किया गया। आयोजक खुशालचंद व्यास ने बताया कि मुख्य अतिथि जिला उद्योग संघ के अध्यक्ष डी पी पच्चीसिया,कार्यक्रम अध्यक्ष अरविन्द्र सिंह,विशिष्ट अतिथि सुनील बांठिया व आशा शर्मा द्वारा दीप प्रज्जवलन के साथ लीला मंचन का शुभारंभ हुआ। राजा दशरथ गुरू वशिष्ठ जी से कहते हैं कि मेरी एक अभिलाषा हैं कि राम को युवराज पद दे दिया जाये यह सुनकर मुनि वशिष्ठ अति प्रसन्न हुए। राजा ने अपने मंत्री और सेवकों को बुलाकर पूछा अगर आप लोगों को अच्छा लगे तो राम का राजतिलक कर दिया जाये। ''रामराज अभिषेकु सुनि हियॅ हरषे नर नारि। लगे सुमंगल सजन सब विधि अनुकूल विचारिÓÓ। राम के राजतिलक की बात सुनकर सभी अयोध्या वासी खुशी से झूम उठते हैं और गाते हैं '' झूम झूम आनन्द मनाओ गाओ मंगल गान कि राजा राम बनेंगेÓÓ। उधर देवता सोचते हैं कि अगर राम को वनवास नहीं होता हैं तो निशाचरों का नाश कैसे होगा? इसके लिए उन्होंने सरस्वती जी से प्रार्थना की और सरस्वती कैकेयी की दासी मंथरा की बुद्धि फेर देती हैं। मंथरा कैकेयी को समझाती हैं कि इस राजतिलक में सिर्फ राम का भला हैं। भरत को कुछ नहीं मिलेगा। कैकेयी कोप भवन में चली जाती हैं और जब राजा दशरथ कैकेयी से कोप भवन में जाने का कारण पूछते हैं तो वह राजा को पहले दिये गये उनके वचन को याद दिलाती है कि समय आने पर दो वरदान मांग लेना, मैं पहला वरदान भरत को राज व दूसरा राम को 14 वर्ष का वनवास मांगती हूॅ। राजा के समझाने के बावजूद कैकेयी नहीं मानती तो यह सुनकर दशरथ हे राम हे राम कहते हुए मूर्छित होकर जमीन पर गिर पड़ते हैं। भगवान राम को यह पता लगता हैं तो वह 14 वर्ष के वनवास के लिए तैयार हो जाते हैं उनके साथ लक्ष्मण व सीता भी तपस्वी वेष में अयोध्या से जाने लगते हैं। सभी नगरवासी विलाप करते हुए राम को रोकने का प्रयास करते हैं '' मत जाओ मत जाओ मत जाओ हे राम अयोध्या छोड़कर मत जाओ। रूक जाओ रूक जाओ रूक जाओ हे नाथ हमारी विनती मत ठुक राओÓÓ। मंत्री सुमंत्र राम, लक्ष्मण व सीता को रथ पर बिठाकर नगर के बाहर ले जाते हैं श्रृंगवेरपुर पहु ंचने पर गंगा जी में स्नान करते हैं। राम आगमन सुनकर निषादराज गुह भगवान राम की आवभगत क रता है और इसके बाद सुमंत्र जी अयोध्या वापस लौट आते हैं और राजा दशरथ राम के वियोग में अपने प्राण त्याग देते हैं। श्री राम रामलीला कमेटी के अध्यक्ष मेघराज आचार्य ने बताया कि गुरूवार क ो केवट संवाद, सूर्पणखा प्रसंग, खरदूषण वध आदि प्रसंगों का मंचन किया जायेगा। अतिथियों का स्वागत संगीता शेखावत ने किया।
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