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जन शिक्षण संस्थान ने किया गांधीजी की शिक्षा को जीवन में उतारने का आह्वान
गांधीजी की 150वीं जयंति पर जन शिक्षण संस्थान, बीकानेर द्वारा
‘अहिंसा और हम’ कार्यक्रम आयोजन
गांधीजी की शिक्षा को जीवन में उतारें - सोहनलाल प्रजापत
बीकानेर 02 अक्टुबर., 2019। ‘‘ गांधीजी का पूरा जीवन ही उनकी शिक्षा है। इसलिए उनकी शिक्षा को हम अपने जीवन में उतारें ’’ ये उद्बोधन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वार्ड पार्षद सोहनलाल प्रजापत ने जन शिक्षण संस्थान, बीकानेर की ओर से 02 अक्टुबर - महात्मा गांधीजी की 150वीं जयंति के अवसर पर रामपुरा बस्ती गली नं. 6 में आयोजित ‘अहिंसा और हम’ कार्यक्रम में व्यक्त किए।
प्रजापत ने कहा कि गांधीजी की शिक्षा का महत्वपूर्ण संदेश अहिंसात्मक जीवन शैली है। गांधीजी ने अपने समस्त आंदोलन अहिंसा के बल पर ही लड़े और उसीके परिणाम से हमारा देश स्वतंत्र हुआ। इसके साथ ही हमें स्वच्छता के संदेश से हमें अपने घर और मौहल्ले को साफ रखने में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
कार्यक्रम में जन शिक्षण संस्थान के निदेशक श्री रामलाल सोनी ने कहा कि गांधीजी भी आप और हम जैसे एक साधारण परिवार में जन्मे साधारण व्यक्ति ही थे, लेकिन राष्ट्रहित लिए पूर्णतः समर्पित होकर किए गए उनके कार्यों ने उन्हें मोहन से महात्मा बना दिया। गांधीजी ने जिस प्रकार अपने जीवन में कठिन से कठिन और असंभव कार्यों को भी अहिंसा और सत्याग्रह के माध्यम से पूरा करके दिखाया। उससे हमें अहिंसा को अपने जीवन-व्यवहार में उतारने की सीख लेनी चाहिए। गांधीजी की अहिंसावादी विचारधारा के बल पर ही गांधीजी के जन्मदिवस को विश्व अहिंसा दिवस के रूप में मनाने लगा है। इसके साथ ही आज से देश में पाॅलिथिन भी पूर्णतः प्रतिबंधित हो रहा है। इसलिए अपनी बस्ती को पाॅलिथिन मुक्त करने में अपना योगदान दें।
आगंतुकों का स्वागत करते हुए जन शिक्षण संस्थान,बीकानेर के कार्यक्रम अधिकारी श्री ओमप्रकाश सुथार ने गांधीजी के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से गांधीजी की 150वीं जयंति के अवसर पर देशहित और मानवहित के लिए निःस्वार्थ भाव से काम करने का संकल्प लेने की बात कही।
कार्यक्रम के अपनी बात सत्र में वैजयन्ति, मनीषा, शालिनी, बसंती, वर्षा लूणा आदि ने गांधीजी ‘बापू’ के बताए सत्य, अहिंसा और कर्मशीलता के मार्ग पर चलकर देश हित के लिए कार्य करने की बात कही।
इसी क्रम ने संस्थान की अनुदेशिकाओं की ओर से श्रीमती सुरजमुखी खड़गावत, जाहनवी सुडिया, सुधा कंवर आदि ने प्रशिक्षण से जुड़े अनुभवों को अभिव्यक्त करते हुए कहा गांधीजी की आत्मनिर्भर होने की सीख पर कार्य करने की बात कही।
कार्यक्रम का प्रारंभ महात्मागांधी जी की प्रिय प्रार्थना - वैष्णवजन तो तैने कहिए... के सामूहिक गान से हुआ। कार्यक्रम के सफल आयोजन में स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता गिरधारी लाल लूण और संस्थान के लेखाकार लक्ष्मीनारायण चूरा व कार्यक्रम सहायक तलत रियाज आदि की सक्रिय सहभागिता रही।
कार्यक्रम के अंत में संस्थान के कार्यक्रम सहायक उमाशंकर आचार्य द्वारा आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया गया ।
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