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एसकेआरयूः स्वच्छ छात्रावास एवं इकाई को मिलेगा पुरस्कार
महात्मा गांधी की 150वीं एवं लाल बहादुर शास्त्री की 115वीं जयंती पर कार्यक्रम आयोजित
बीकानेर, 2 अक्टूबर। महात्मा गांधी की 150वीं तथा पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 115वीं जयंती के अवसर पर बुधवार को स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय द्वारा मानव संसाधन विकास निदेशालय सभागार में कार्यक्रम आयोजित किया गया।
मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. आर पी सिंह ने कहा कि महात्मा गांधी का जीवन दर्शन तथा उनके सिद्धांत युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी हैं। महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा के पथ पर चलते हुए देश को आजादी दिलाई। उन्होंने जन-जन में स्वच्छता अलख जगाई। प्रो. सिंह ने कहा कि आज देश भी स्वच्छता के प्रति जागरुक हुआ है और खुले में शौच से मुक्ति की ओर तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने लाल बहादुर शास़्त्री के विभिन्न जीवन प्रसंगों पर प्रकाश डाला।
कुलसचिव प्रो. राजेश शर्मा ने कहा कि हमें अपने घर तथा आसपास के क्षेत्र को स्वच्छ रखते हुए इस अभियान में भागीदारी निभानी होगी। स्वस्थ रहने के लिए हमारे चारों ओर का वातावरण का स्वच्छ होना जरूरी है। इस अवसर पर प्रो. विमला डुकवाल ने स्वच्छ कैंपस और डाॅ. ए के सिंह ने जल शक्ति विषय पर व्याख्यान दिए।
कार्यक्रम संयोजक तथा छात्र कल्याण निदेशक प्रो. वीर सिंह ने बताया कि महात्मा गांधी के 150वें जयंती वर्ष पर विश्वविद्यालय द्वारा विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गई। साथ ही उन्होंने स्वच्छ इकाई और स्वच्छ छात्रावास के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर वार्षिक पुरस्कार दिए जाने की घोषणा भी की। इस दौरान कुलपति ने प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया। इस अवसर पर कुलपति ने स्वच्छ कैंपस एवं जल शक्ति मेनुअल का विमोचन भी किया। इसके बाद विद्यार्थियों की स्वच्छता जागरुकता रैली निकाली गई।
संचालन डाॅ. चित्रा हैनरी एवं विवेक व्यास ने किया। इस अवसर पर डीन-डायरेक्टर तथा शैक्षणिक एवं शैक्षणेत्तर स्टाफ सदस्य एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।
महात्मा गांधी की 150वीं एवं लाल बहादुर शास्त्री की 115वीं जयंती पर कार्यक्रम आयोजित
बीकानेर, 2 अक्टूबर। महात्मा गांधी की 150वीं तथा पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 115वीं जयंती के अवसर पर बुधवार को स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय द्वारा मानव संसाधन विकास निदेशालय सभागार में कार्यक्रम आयोजित किया गया।
मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. आर पी सिंह ने कहा कि महात्मा गांधी का जीवन दर्शन तथा उनके सिद्धांत युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी हैं। महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा के पथ पर चलते हुए देश को आजादी दिलाई। उन्होंने जन-जन में स्वच्छता अलख जगाई। प्रो. सिंह ने कहा कि आज देश भी स्वच्छता के प्रति जागरुक हुआ है और खुले में शौच से मुक्ति की ओर तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने लाल बहादुर शास़्त्री के विभिन्न जीवन प्रसंगों पर प्रकाश डाला।
कुलसचिव प्रो. राजेश शर्मा ने कहा कि हमें अपने घर तथा आसपास के क्षेत्र को स्वच्छ रखते हुए इस अभियान में भागीदारी निभानी होगी। स्वस्थ रहने के लिए हमारे चारों ओर का वातावरण का स्वच्छ होना जरूरी है। इस अवसर पर प्रो. विमला डुकवाल ने स्वच्छ कैंपस और डाॅ. ए के सिंह ने जल शक्ति विषय पर व्याख्यान दिए।
कार्यक्रम संयोजक तथा छात्र कल्याण निदेशक प्रो. वीर सिंह ने बताया कि महात्मा गांधी के 150वें जयंती वर्ष पर विश्वविद्यालय द्वारा विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गई। साथ ही उन्होंने स्वच्छ इकाई और स्वच्छ छात्रावास के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर वार्षिक पुरस्कार दिए जाने की घोषणा भी की। इस दौरान कुलपति ने प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया। इस अवसर पर कुलपति ने स्वच्छ कैंपस एवं जल शक्ति मेनुअल का विमोचन भी किया। इसके बाद विद्यार्थियों की स्वच्छता जागरुकता रैली निकाली गई।
संचालन डाॅ. चित्रा हैनरी एवं विवेक व्यास ने किया। इस अवसर पर डीन-डायरेक्टर तथा शैक्षणिक एवं शैक्षणेत्तर स्टाफ सदस्य एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।
किसानों को बढ़ना होगा समन्वित खेती प्रणाली की ओर-कुलपति
जल शक्ति अभियान के तहत किसान मेला आयोजित
बीकानेर, 2 अक्टूबर। बीछवाल स्थित कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा बुधवार को जल शक्ति अभियान के तहत किसान मेला आयोजित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केन्द्रीय शुष्क बागवानी संस्थान के निदेशक प्रो. पी. एल. सरोज थे। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय कृषि के परिदृश्य में बदलाव आया है। आज हम खाद्यान्न उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन गए हैं। अब खाद्य सुरक्षा की बजाय पोषण सुरक्षा और लाभदायक खेती की ओर ध्यान देने की जरूरत है। इसके लिए किसानों को खेती की आधुनिक विधियों को अपनाना होगा। उन्होंने केन्द्रीय शुष्क बागवानी संस्थान की विभिन्न गतिविधियों के बारे में बताया तथा किसानों की आय बढ़े, इसके मद्देनजर फूड प्रोसेसिंग, पैकेजिंग तथा मूल्य संवर्धन की संभावनाओं की जानकारी दी।
प्रो. सरोज ने कहा कि हमारे यहां जल संरक्षण का कार्य परम्परागत रूप से होता आया है। एक दौर था जब प्रत्येक गांव में कुएं, तालाब और बावड़ियां हुआ करती थी। धीरे-धीरे विलुप्त होने लगी। परम्परागत जल स्त्रोतों की उपेक्षा से ही जल संकट की शुरूआत हुई। उन्होंने कहा कि आज हमें इस ओर पूर्ण गंभीरता से सोचना होगा, अन्यथा हमारे सामने भीषण संकट पैदा हो जाएगा।
स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर. पी. सिंह ने कहा कि अत्यधिक दोहन के कारण आज भूजल स्तर बहुत नीचे पहुंच गया है। आज देश के 256 जिले तथा 2 हजार 952 ब्लाॅक डार्क जोन में आ गए हैं। कुल उपलब्ध जल में से पीने योग्य जल केवल 2.7 प्रतिशत ही है। शेष समुद्री जल है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्लेशियर लगातार पिघल रहे हैं। शहरीकरण तथा अन्य कारणों से जोत छोटी हो रही है। ऐसे में हमें समन्वित खेती प्रणाली की ओर बढ़ना होगा।
कुलपति ने कहा कि किसानों को चाहिए कि वे कृषि के साथ गाय, बकरी, मछली, मधुमक्खी एवं मुर्गी पालन करें। सब्जियां और फल उगाएं तथा अजोला यूनिट स्थापित करें। उन्होंने जल संरक्षण को आज की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया तथा कहा कि किसान जलवायु के अनुकूल तथा कम पानी वाली फसलें लें। किसान और कृषि विज्ञान केन्द्र आपसी समन्वय बनाए रखें। कृषि वैज्ञानिक समय-समय पर किसानों का मार्गदर्शन करें। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र से जुड़े युवा एंतरप्रेन्योर बनें तथा कृषि विपणन के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करें।
प्रसार शिक्षा निदेशालय के उपनिदेशक प्रो. सुभाष चंद्र ने कहा कि जल संरक्षण के लिए परम्परागत तकनीकों को दोबारा अपनाना होगा। खेत का पानी खेत में रहे तथा किसान ‘पर ड्रोप-मोर क्रोप’ की अवधारणा पर कार्य करें तो बेहतर परिणाम आएंगे। उन्होंने सिंगल यूज प्लास्टिक से होने वाले नुकसान के बारे में बताया तथा इनके प्रतिबंध में सहभागिता का आह्वान किया।
मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए कृषि अनुसंधान केन्द्र के क्षेत्रीय निदेशक डाॅ. पी. एस. शेखावत ने शून्य खर्च आधारित खेती के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में सुनियोजित तरीके से खेती करनी होगी, अन्यथा किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
इससे पहले कृषि विज्ञान केन्द्र के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डाॅ. दुर्गासिंह ने केन्द्र की गतिविधियों तथा मेले के उद्देश्यों के बारे में बताया। उन्होंने आगंतुकों का आभार भी जताया। कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा गोद लिए गए गोविंदसर गांव के किसान मूलाराम ने गांव की गतिविधियों की जानकारी दी। इस अवसर पर अतिथियों ने प्रगतिशील किसानों का सम्मान किया। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. सुशील कुमार ने किया।
इस अवसर पर गृह विज्ञान महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. आई पी सिंह, अनुसंधान निदेशक प्रो. एस एल गोदारा, गृह विज्ञान महाविद्यालय अधिष्ठाता प्रो. दीपाली धवान, आइएबीएम निदेशक प्रो. एन के शर्मा, परीक्षा नियंत्रक प्रो. ए के शर्मा, डाॅ. उपेन्द्र मील, डाॅ. बी एस मिठारवाल सहित विश्वविद्यालय के शैक्षणिक एवं शैक्षणेत्तर कर्मचारी-अधिकारी तथा किसान मौजूद रहे।
प्रदर्शनी का अवलोकन
इससे पहले प्रो. सरोज तथा कुलपति ने प्रसार शिक्षा निदेशालय द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इसमें कम पानी वाली फसलें एवं उन्नत किस्में, मसालों की उन्नत किस्में, लहसुन की खेती में सिंचाई पद्धति का प्रभाव, पाॅली हाउस में खीरे की खेती, औषधीय पादप, समन्वित कीट प्रबंधन, लो टनल तकनीक तथा खजूर की खेती सहित विभिन्न तकनीकों एवं योजनाओं की जानकारी संकलित की गई। प्रसार शिक्षा निदेशालय के प्रो. जे. पी. लखेरा एवं एटिक प्रभारी रामधन जाट ने इसके बारे में बताया।
जल शक्ति अभियान के तहत किसान मेला आयोजित
बीकानेर, 2 अक्टूबर। बीछवाल स्थित कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा बुधवार को जल शक्ति अभियान के तहत किसान मेला आयोजित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केन्द्रीय शुष्क बागवानी संस्थान के निदेशक प्रो. पी. एल. सरोज थे। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय कृषि के परिदृश्य में बदलाव आया है। आज हम खाद्यान्न उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन गए हैं। अब खाद्य सुरक्षा की बजाय पोषण सुरक्षा और लाभदायक खेती की ओर ध्यान देने की जरूरत है। इसके लिए किसानों को खेती की आधुनिक विधियों को अपनाना होगा। उन्होंने केन्द्रीय शुष्क बागवानी संस्थान की विभिन्न गतिविधियों के बारे में बताया तथा किसानों की आय बढ़े, इसके मद्देनजर फूड प्रोसेसिंग, पैकेजिंग तथा मूल्य संवर्धन की संभावनाओं की जानकारी दी।
प्रो. सरोज ने कहा कि हमारे यहां जल संरक्षण का कार्य परम्परागत रूप से होता आया है। एक दौर था जब प्रत्येक गांव में कुएं, तालाब और बावड़ियां हुआ करती थी। धीरे-धीरे विलुप्त होने लगी। परम्परागत जल स्त्रोतों की उपेक्षा से ही जल संकट की शुरूआत हुई। उन्होंने कहा कि आज हमें इस ओर पूर्ण गंभीरता से सोचना होगा, अन्यथा हमारे सामने भीषण संकट पैदा हो जाएगा।
स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर. पी. सिंह ने कहा कि अत्यधिक दोहन के कारण आज भूजल स्तर बहुत नीचे पहुंच गया है। आज देश के 256 जिले तथा 2 हजार 952 ब्लाॅक डार्क जोन में आ गए हैं। कुल उपलब्ध जल में से पीने योग्य जल केवल 2.7 प्रतिशत ही है। शेष समुद्री जल है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्लेशियर लगातार पिघल रहे हैं। शहरीकरण तथा अन्य कारणों से जोत छोटी हो रही है। ऐसे में हमें समन्वित खेती प्रणाली की ओर बढ़ना होगा।
कुलपति ने कहा कि किसानों को चाहिए कि वे कृषि के साथ गाय, बकरी, मछली, मधुमक्खी एवं मुर्गी पालन करें। सब्जियां और फल उगाएं तथा अजोला यूनिट स्थापित करें। उन्होंने जल संरक्षण को आज की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया तथा कहा कि किसान जलवायु के अनुकूल तथा कम पानी वाली फसलें लें। किसान और कृषि विज्ञान केन्द्र आपसी समन्वय बनाए रखें। कृषि वैज्ञानिक समय-समय पर किसानों का मार्गदर्शन करें। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र से जुड़े युवा एंतरप्रेन्योर बनें तथा कृषि विपणन के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करें।
प्रसार शिक्षा निदेशालय के उपनिदेशक प्रो. सुभाष चंद्र ने कहा कि जल संरक्षण के लिए परम्परागत तकनीकों को दोबारा अपनाना होगा। खेत का पानी खेत में रहे तथा किसान ‘पर ड्रोप-मोर क्रोप’ की अवधारणा पर कार्य करें तो बेहतर परिणाम आएंगे। उन्होंने सिंगल यूज प्लास्टिक से होने वाले नुकसान के बारे में बताया तथा इनके प्रतिबंध में सहभागिता का आह्वान किया।
मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए कृषि अनुसंधान केन्द्र के क्षेत्रीय निदेशक डाॅ. पी. एस. शेखावत ने शून्य खर्च आधारित खेती के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में सुनियोजित तरीके से खेती करनी होगी, अन्यथा किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
इससे पहले कृषि विज्ञान केन्द्र के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डाॅ. दुर्गासिंह ने केन्द्र की गतिविधियों तथा मेले के उद्देश्यों के बारे में बताया। उन्होंने आगंतुकों का आभार भी जताया। कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा गोद लिए गए गोविंदसर गांव के किसान मूलाराम ने गांव की गतिविधियों की जानकारी दी। इस अवसर पर अतिथियों ने प्रगतिशील किसानों का सम्मान किया। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. सुशील कुमार ने किया।
इस अवसर पर गृह विज्ञान महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. आई पी सिंह, अनुसंधान निदेशक प्रो. एस एल गोदारा, गृह विज्ञान महाविद्यालय अधिष्ठाता प्रो. दीपाली धवान, आइएबीएम निदेशक प्रो. एन के शर्मा, परीक्षा नियंत्रक प्रो. ए के शर्मा, डाॅ. उपेन्द्र मील, डाॅ. बी एस मिठारवाल सहित विश्वविद्यालय के शैक्षणिक एवं शैक्षणेत्तर कर्मचारी-अधिकारी तथा किसान मौजूद रहे।
प्रदर्शनी का अवलोकन
इससे पहले प्रो. सरोज तथा कुलपति ने प्रसार शिक्षा निदेशालय द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इसमें कम पानी वाली फसलें एवं उन्नत किस्में, मसालों की उन्नत किस्में, लहसुन की खेती में सिंचाई पद्धति का प्रभाव, पाॅली हाउस में खीरे की खेती, औषधीय पादप, समन्वित कीट प्रबंधन, लो टनल तकनीक तथा खजूर की खेती सहित विभिन्न तकनीकों एवं योजनाओं की जानकारी संकलित की गई। प्रसार शिक्षा निदेशालय के प्रो. जे. पी. लखेरा एवं एटिक प्रभारी रामधन जाट ने इसके बारे में बताया।
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